
भारतीय सेना के एक अत्यंत संवेदनशील आयुध डिपो (Armoury Depot) से अत्याधुनिक असॉल्ट राइफलों और भारी मात्रा में जिंदा गोला-बारूद के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर ने देश के सुरक्षा तंत्र और खुफिया महकमे के होश उड़ा दिए हैं। त्रिस्तरीय कड़े सुरक्षा घेरे, चौबीसों घंटे सशस्त्र पहरेदारी और कड़े इन्वेंट्री प्रोटोकॉल के बीच से घातक सैन्य हथियारों का गायब होना केवल एक सामान्य चोरी का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में एक अत्यंत गंभीर सेंध माना जा रहा है।
सैन्य अधिकारियों द्वारा नियमित स्टॉक ऑडिट और हथियारों की गिनती (Physical Muster Verification) के दौरान इस बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जब लॉगबुक में दर्ज आंकड़ों और शस्त्रागार (Kote) में रखे हथियारों के वास्तविक मिलान में भारी विसंगति पाई गई, तो तुरंत मुख्यालय को सतर्क किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सेना की शीर्ष कमान ने तुरंत प्रभाव से उच्चस्तरीय ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (Court of Inquiry) का गठन कर विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
गायब हथियारों में इंसास, इंसास मैगजीन और हजारों राउंड जिंदा कारतूस
प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, गायब हुए हथियारों में भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मानक 5.56mm इंसास (INSAS) असॉल्ट राइफलें, ऑटोमैटिक वेपन्स और उच्च क्षमता वाले आधुनिक हथियारों के अलावा हजारों की संख्या में जिंदा कारतूस (Ammunition) शामिल हैं।
चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि सैन्य शस्त्रागारों में परिंदा भी पर नहीं मार सकता। वहां किसी भी हथियार को निकालने या जमा करने के लिए ‘डबल-लॉक’ प्रणाली, बायोमेट्रिक और रजिस्टर में यूनिट कमांडर से लेकर क्वार्टर मास्टर तक के आधिकारिक हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। ऐसे में बिना किसी बाहरी तोड़फोड़ या अलार्म के बजे इतने बड़े पैमाने पर हथियारों का गायब हो जाना साफ तौर पर अंदरूनी मिलीभगत, संगठित षड्यंत्र या लंबे समय से चल रहे योजनाबद्ध हेरफेर की ओर इशारा कर रहा है।
क्या अंडरवर्ल्ड या आतंकी-अलगाववादी सिंडिकेट से जुड़े हैं तार?
इस घटना के सामने आते ही सैन्य खुफिया इकाई (Military Intelligence) के साथ-साथ केंद्रीय खुफिया एजेंसियां (IB) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी अलर्ट मोड पर आ गई हैं। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इन हथियारों को सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों, पूर्वोत्तर के उग्रवादी गुटों, नक्सली कैडर या देश के बड़े संगठित आपराधिक गिरोहों (गैंगस्टर्स) तक तो नहीं पहुंचाया गया है।
हाल के वर्षों में देश के कई हिस्सों में गैंगस्टरों और तस्करों के पास से सैन्य ग्रेड के अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए हैं। ऐसे में एजेंसियों को अंदेशा है कि कहीं किसी हथियार तस्कर सिंडिकेट ने डिपो के भीतर मौजूद कुछ ‘काली भेड़ों’ को लालच देकर इस खेप को बाहर तो नहीं निकलवाया। हथियारों के सीरियल नंबरों को सभी राज्यों की एटीएस (ATS), एसटीएफ (STF) और सीमा सुरक्षा बलों के साथ साझा किया जा रहा है ताकि किसी भी जब्ती या मुठभेड़ के दौरान उनकी पहचान तुरंत की जा सके।
डिपो के पहरेदारों से लेकर अफसरों तक रडार पर, शुरू हुई कड़ी पूछताछ
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की टीम ने घटनास्थल को अपने नियंत्रण में ले लिया है और डिपो में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों, शस्त्रागार प्रभारियों (Armourers), संतरियों और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं:
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सीसीटीवी और डिजिटल लॉग की जांच: शस्त्रागार और परिसर के सभी प्रवेश व निकास द्वारों पर लगे बीते कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग्स की फॉरेंसिक विशेषज्ञों से गहन जांच कराई जा रही है।
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ड्यूटी रोस्टर और छुट्टी का रिकॉर्ड: संदिग्ध समय सीमा के दौरान जिन जवानों या कर्मचारियों की ड्यूटी शस्त्रागार के आसपास थी या जो अचानक लंबी छुट्टी पर गए, उनकी गतिविधियों और फोन कॉल्स का विश्लेषण किया जा रहा है।
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बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल: संदेह के घेरे में आए कर्मियों के व्यक्तिगत बैंक खातों, यूपीआई लेन-देन और हालिया संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की जांच की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।
देश भर की सैन्य छावनियों और शस्त्रागारों में सुरक्षा ऑडिट के कड़े निर्देश
इस दुस्साहसिक घटना के बाद सेना मुख्यालय ने देश भर की सभी सैन्य छावनियों, फील्ड फॉर्मेशन्स और आयुध डिपो के लिए सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर दी है। सभी कमांड्स को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद शस्त्रागारों का 100% भौतिक सत्यापन (Physical Audit) तत्काल पूरा करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वर्दी के अनुशासन और देश की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी व्यक्ति—चाहे वह किसी भी रैंक या ओहदे पर हो—दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कोर्ट मार्शल और कठोर दंडात्मक धाराओं के तहत ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की जाएगी जिससे भविष्य में कोई भी देश के शस्त्रागार की ओर आंख उठाने की हिम्मत न कर सके।
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