कचरा समझकर फेंक देते हैं पान के डंठल? जानिए इसके चमत्कारी फायदे और पुराने घरेलू नुस्खे

भारत में पूजा-पाठ, मांगलिक कार्यों और भोजन के बाद पान खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। आमतौर पर लोग जब भी पान तैयार करते हैं या घरों में इसका इस्तेमाल करते हैं, तो पान के पत्ते के पीछे लगी लंबी डंठल को तोड़कर बेकार समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं। लेकिन आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय घरेलू चिकित्सा पद्धति में पान के पत्ते से भी ज्यादा गुणकारी और औषधीय तत्वों से भरपूर इसके डंठल को माना गया है। पान के डंठल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) गुण कूट-कूट कर भरे होते हैं। प्राचीन समय में जब तुरंत दवाइयों की सुविधा हर गांव में उपलब्ध नहीं होती थी, तब घर की बुजुर्ग महिलाएं छोटी-मोटी मौसमी बीमारियों, बच्चों के पेट दर्द और कफ-खांसी के इलाज में पान के डंठल का ही सहारा लेती थीं। आज के समय में भी यदि सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए, तो यह कई आम स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक अचूक और सुरक्षित घरेलू नुस्खा साबित हो सकता है।

मौसमी खांसी, सर्दी और बलगम की जकड़न से दिलाए मिनटों में आराम

मौसम बदलते ही गले में खराश, सूखी खांसी या फेफड़ों में बलगम जमने की समस्या बेहद आम हो जाती है। ऐसे में पान के डंठल का काढ़ा या रस गले की सूजन और सीने की जकड़न को खोलने में जादुई असर दिखाता है। यदि आपको या परिवार में किसी को लगातार खांसी उठ रही हो, तो चार-पांच ताजे पान के डंठल को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद इसे सिलबट्टे या खरल में कूटकर इसका ताजा रस निकाल लें। लगभग आधा चम्मच डंठल के रस में बराबर मात्रा में शुद्ध शहद और एक चुटकी पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर दिन में दो बार गुनगुने रूप में चाटने से गले को तुरंत ठंडक मिलती है और फेफड़ों में फंसा पुराना कफ पिघलकर बाहर निकलने लगता है। इसके अलावा, दो कप पानी में पान के डंठल, थोड़ी सी अदरक और दो लौंग डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए; इस काढ़े की चुस्कियां लेने से बंद नाक और भारी सिरदर्द में फौरन राहत मिलती है।

कमजोर पाचन, गैस और बच्चों के पेट फूलने की समस्या का रामबाण इलाज

खान-पान में गड़बड़ी, तला-भुना खाने या लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से पेट में भारीपन, अपच, एसिडिटी और गैस बनना एक आम परेशानी है। पान के डंठल में पाचन रसों को सक्रिय करने वाले पाचक एंजाइम्स को बढ़ाने की कुदरती क्षमता होती है। यदि खाना खाने के बाद पेट फूला हुआ लगे या डकारें आ रही हों, तो पान के एक या दो डंठल को चुटकी भर काले नमक या भुने जीरे के साथ धीरे-धीरे चबाकर उसका रस निगलें। यह नुस्खा आंतों की सक्रियता को बढ़ाता है और पेट में जमी गैस को तुरंत बाहर निकालने में मदद करता है। छोटे बच्चों में जब गैस या बदहजमी के कारण पेट फूल जाता है और वे दर्द से रोने लगते हैं, तो पुराने नुस्खों के अनुसार पान के ताजे डंठल पर हल्का सा गुनगुना अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) या शुद्ध सरसों का तेल लगाकर पेट और नाभि के चारों ओर गोलाई में हल्की मालिश करने से बच्चों के पेट दर्द में काफी आराम मिलता है।

सिरदर्द, माइग्रेन और जोड़ों के दर्द व सूजन में भी है बेहद असरदार

आज की तनावभरी जीवनशैली और कंप्यूटर स्क्रीन पर घंटों काम करने से होने वाले सिरदर्द या माइग्रेन के दर्द में पान का डंठल एक प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करता है। पान के डंठल में मौजूद ठंडक और वासोडिलेटर तत्व नसों के तनाव को कम करने में सहायक होते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए ताजे डंठल को थोड़े से कपूर या नीलगिरी के तेल के साथ बारीक पीसकर पेस्ट बना लें और इसे माथे या कनपटी पर लेप की तरह लगाएं। दस से पंद्रह मिनट में ही सिर की नसों का भारीपन और खिंचाव दूर होने लगता है। इसके साथ ही, यदि शरीर के किसी हिस्से में चोट लगने, मोच आने या गठिया के कारण जोड़ों में सूजन और अकड़न हो गई हो, तो पान के डंठल को तिल के तेल में धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक डंठल काले न पड़ जाएं। इस तेल को छानकर गुनगुना करके दर्द वाले हिस्से पर हल्के हाथों से मालिश करने पर सूजन उतर जाती है और मांसपेशियों का दर्द शांत हो जाता है।

मुंह की बदबू, पायरिया और दांतों के दर्द से दिलाए हमेशा के लिए छुटकारा

मुंह के स्वास्थ्य के लिए पान का उपयोग हमेशा से प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इसके डंठल में मसूड़ों को मजबूत करने वाले कसैले (एस्ट्रिंजेंट) तत्व अधिक सघन रूप में पाए जाते हैं। यदि मसूड़ों से खून आने, सूजन, पायरिया या मुंह से दुर्गंध आने की समस्या हो, तो पान के डंठल को पानी में अच्छी तरह उबालकर माउथवॉश तैयार किया जा सकता है। इस पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में दो से तीन बार कुल्ला करने पर मुंह में छिपे हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और सांसों की ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है। दांत में तेज दर्द या कीड़ा लगने की स्थिति में डंठल को हल्का सा कुचलकर उसमें एक लौंग का दाना लपेटकर प्रभावित दांत के नीचे दबाकर रखने से निकलने वाला अर्क सुन्न करने का काम करता है और दर्द को तुरंत शांत कर देता है।

पान के डंठल का प्रयोग करते समय इन जरूरी सावधानियों का रखें ध्यान

हालांकि पान के डंठल पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं, फिर भी किसी भी घरेलू उपाय को अपनाते समय सही जानकारी और सफाई बेहद जरूरी है। बाजार से लाए गए पान के पत्तों और डंठल पर अक्सर धूल, मिट्टी या कीटनाशकों का छिड़काव हो सकता है, इसलिए इस्तेमाल से पहले उन्हें बहते साफ पानी में अच्छी तरह दो-तीन बार जरूर धोएं। यदि किसी व्यक्ति को पान के पत्तों से एलर्जी है, मुंह में छालों की गंभीर समस्या है या पेट में अल्सर की शिकायत है, तो उन्हें आंतरिक रूप से इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के मामले में किसी भी जड़ी-बूटी का आंतरिक उपयोग करने से पहले हमेशा किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम होता है।

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