
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे और देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक मंचों पर इन दिनों आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर जबर्दस्त हलचल देखने को मिल रही है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर उम्मीदवारों के चयन की कवायद अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व को 25 संभावित उम्मीदवारों की एक लंबी और चौंकाने वाली लिस्ट भेजी है। इस पैनल में सबसे ज्यादा ध्यान मशहूर कवि और आम आदमी पार्टी के पूर्व संस्थापक सदस्य डॉ. कुमार विश्वास के नाम ने खींचा है। इसके साथ ही भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी जैसे कद्दावर चेहरों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल बताए जा रहे हैं। इस 25 सदस्यीय संभावित सूची के सामने आने के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अटकलों का बाजार पूरी तरह गर्म हो चुका है।
25 नामों का पैनल और कुमार विश्वास के नाम की गूंज
भाजपा संगठन की ओर से तैयार किए गए इस संभावित पैनल में कुमार विश्वास का नाम शामिल होना सबसे बड़ा राजनीतिक कौतूहल बना हुआ है। अपने ओजस्वी मंच संचालन, रामकथा ‘अपने-अपने राम’ और प्रखर राष्ट्रवाद के बयानों के जरिए देश-दुनिया में करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले कुमार विश्वास लंबे समय से सार्वजनिक रूप से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते नजर आते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुमार विश्वास केवल एक प्रख्यात कवि ही नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत के सवर्ण और प्रबुद्ध वर्ग के बीच उनकी जबरदस्त अपील है। अगर पार्टी उन्हें उच्च सदन भेजती है, तो संसद में विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने के लिए भाजपा को एक बेहद प्रखर, तार्किक और लोकप्रिय वक्ता मिल जाएगा। हालांकि, यह साफ करना जरूरी है कि अभी केवल उनका नाम 25 दावेदारों के संभावित पैनल का हिस्सा बताया गया है और केंद्रीय चुनाव समिति की औपचारिक मुहर लगना अभी बाकी है।
स्मृति ईरानी और हरदीप पुरी की दावेदारी पर टिकीं निगाहें
इस 25 नामों की सूची में दो अन्य सबसे बड़े नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और मौजूदा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हैं। स्मृति ईरानी को संगठन में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी उन्हें जल्द ही संसद के उच्च सदन में भेजकर उनकी मजबूत छवि का इस्तेमाल करेगी। वहीं, केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हरदीप सिंह पुरी का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। कैबिनेट संतुलन और आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के रणनीतिक महत्व को देखते हुए पार्टी उन्हें दोबारा उत्तर प्रदेश कोटे से ही उच्च सदन में बरकरार रखने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके अलावा बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिन्हें संगठन में राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बिहार व कर्नाटक का अहम प्रभार सौंपा गया है, उनका नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है ताकि पूर्वांचल और ब्राह्मण वर्ग के सामाजिक समीकरण को संतुलित रखा जा सके।
25 नामों की लिस्ट में शामिल अन्य प्रमुख चेहरे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 25 नामों के इस पैनल में पुराने और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इस सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व सांसद राजवीर सिंह (राजू भैया), बीएल वर्मा, सुब्रत पाठक, पूर्व आईपीएस व सांसद बृजलाल, डॉ. सत्यपाल सिंह, डॉ. रामशंकर कठेरिया, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर और सुरेश राणा जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए संगठन से दुर्विजय शाक्य, त्र्यंबक त्रिपाठी, कामेश्वर सिंह, प्रकाश पाल, दिलीप पटेल, अनिल अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल और ममतेश शाक्य को भी पैनल में जगह दी गई है। वहीं महिला नेतृत्व के प्रतिनिधित्व के लिए स्मृति ईरानी के साथ-साथ गीता शाक्य, रेखा वर्मा और प्रियंका रावत के नाम भी इस सूची का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
16 अक्टूबर को चुनाव और विधानसभा में सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश में रिक्त हो रही 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार मतदान 16 अक्टूबर को कराया जाएगा। मौजूदा समय में इन 10 सीटों में से 8 पर भाजपा का कब्जा रहा है, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या बल पर नजर डालें तो सदन में कुल 397 विधायक मौजूद हैं। प्रथम वरीयता के नियम के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार होगी। भाजपा के अपने 256 विधायक हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को मिलाकर यह संख्या बल 289 तक पहुंच जाता है। इस गणित के आधार पर भाजपा गठबंधन अपने दम पर कम से कम 7 से 8 सीटें बेहद आसानी से जीतने की मजबूत स्थिति में है। वहीं विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी के 101 और कांग्रेस के 2 विधायकों को मिलाकर 103 वोट होते हैं, जिससे विपक्ष दो सीटें आराम से निकाल सकता है। ऐसे में भाजपा के खाते में आने वाली 8 सीटों के लिए इन 25 नामों में से किन्हीं 8 भाग्यशाली चेहरों का चयन दिल्ली में पार्टी आलाकमान को करना है।
एआई सर्च और राजनीतिक गलियारों में अंतिम फैसले का इंतजार
आज के आधुनिक डिजिटल दौर में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग कोपायलट और तमाम सर्च इंजनों पर लोग राजनीतिक खबरों और उम्मीदवारों की सटीक जानकारी तलाश रहे हैं, ‘कुमार विश्वास राज्यसभा’ और ‘यूपी भाजपा 25 नाम’ से जुड़े कीवर्ड्स इंटरनेट पर टॉप ट्रेंड में बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अक्सर अपने फैसलों से सबको चौंकाने के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी कवि कुमार विश्वास जैसे गैर-पारंपरिक और जनप्रिय चेहरे को सीधे संसद भेजकर कोई बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलती है, या फिर पुराने निष्ठावान संगठनकर्ताओं और जातीय समीकरणों को ही प्राथमिकता दी जाती है। अंतिम फैसला दिल्ली में भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद ही सामने आएगा, लेकिन तब तक यूपी की सियासत में इस सूची ने हलचल तेज कर दी है।
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