तमिलनाडु जाकर विजय से मिलेंगे ‘बाबरी’ की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर: अल्पसंख्यकों के हक में साझा मोर्चे का ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर नई मस्जिद की नींव रखकर चर्चा में आए पूर्व टीएमसी विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने एक चौंकाने वाला राजनीतिक बयान दिया है। कबीर ने घोषणा की है कि वह जल्द ही तमिलनाडु का दौरा करेंगे और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख व अभिनेता विजय से मुलाकात करेंगे।

हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि वह नए राजनीतिक चेहरों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा—

“मैं तमिलनाडु जाकर विजय से मिलूंगा। मैं उनके साथ मिलकर काम करना चाहता हूं। हम चाहते हैं कि दोनों साथ आकर उन नीतियों और हालात के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएं जिनसे अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है। मेरी प्राथमिकता राजनीति में नए चेहरे हैं; पहले से जमी हुई पुरानी पार्टियों के साथ काम करना बेहद मुश्किल हो चुका है।”

रेजीनगर उपचुनाव के बाद दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व से भी मिलेंगे

पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है, जिनका चुनाव चिह्न ‘मेज’ (Table) है। कबीर ने बताया कि उपचुनाव संपन्न होने के बाद वह सीधे दिल्ली का रुख करेंगे।

  • राज्य इकाई की शिकायत: कबीर ने कहा कि वह दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष केंद्रीय नेताओं से मिलकर पश्चिम बंगाल के जमीनी हालात और बंगाल बीजेपी इकाई की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।

  • विलय की अटकलों को खारिज किया: उन्होंने यह भी साफ किया कि दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से मुलाकात का यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनकी पार्टी का बीजेपी में विलय हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम एक स्वतंत्र पार्टी हैं और यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है कि हम मुद्दों के आधार पर जिससे चाहें उससे बातचीत करें।”

टीएमसी पर साधा तीखा निशाना: ‘पार्टी अब पूरी तरह दिशाहीन’

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होने के बाद हुमायूं कबीर लगातार सत्ताधारी दल पर हमलावर रहे हैं। टीएमसी में दोबारा वापसी की संभावनाओं पर उन्होंने दो टूक कहा:

  • वापसी का कोई सवाल नहीं: उन्होंने कहा कि टीएमसी अब पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है, इसलिए उसमें वापस जाने की कोई गुंजाइश नहीं है।

  • प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप: कबीर ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पुलिस सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि रेजीनगर में उनके कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया गया और लगातार गिरफ्तारियां कर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया, जिसके चलते उन्हें खुद सार्वजनिक रैलियां छोड़कर सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करने पर मजबूर होना पड़ा।

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद से ही कबीर पर कोलकाता में हमले भी हो चुके हैं, जिसका आरोप उन्होंने स्थानीय टीएमसी नेताओं पर लगाया था। अब दक्षिण भारत के नए राजनीतिक खिलाड़ी विजय से हाथ मिलाने की उनकी इस पहल को बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में अल्पसंख्यक विमर्श को नया मोड़ देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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