बर्फ के अंदर कैद हैं सफेद मोतियों की लड़ियां, कनाडा की झील का रहस्य कर देगा हैरान?

कुदरत के खजाने में कई ऐसे रहस्य और अजूबे छिपे हुए हैं, जिन्हें देखकर इंसान दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाता है। हमारी इस धरती पर कई ऐसी प्राकृतिक संरचनाएं और घटनाएं घटित होती हैं जो किसी तिलिस्म या साइंस-फिक्शन फिल्म के दृश्य जैसी नजर आती हैं। इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर दुनिया भर के ट्रैवलर्स और वैज्ञानिकों के बीच कनाडा की एक ऐसी ही रहस्यमयी झील की तस्वीरें और वीडियो जबरदस्त चर्चा का विषय बने हुए हैं। कड़ाके की ठंड में जब इस झील का पानी जम जाता है, तो इसके पारदर्शी और नीले रंग की बर्फ की परतों के ठीक नीचे सफेद मोतियों की अनगिनत लड़ियां कैद हुई दिखाई देती हैं। पहली नजर में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी ने बर्फ के नीचे हजारों-लाखों मोतियों के हार सजा दिए हों या फिर कोई जादुई मोमबत्ती जल रही हो। कुदरत के इस बेहद खूबसूरत, आकर्षक और मंत्रमुग्ध कर देने वाले नजारे को देखने के लिए हर साल दुनिया के कोने-कोने से लाखों पर्यटक और फोटोग्राफर्स कनाडा के इस बर्फीले इलाके का रुख करते हैं। लेकिन बर्फ के शीशे जैसे पारदर्शी टुकड़े के भीतर कैद इन सफेद मोतियों का सच केवल सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही जटिल, दिलचस्प और चौंकाने वाला वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है, जिसे जानकर हर कोई दंग रह जाता है।

कनाडा की अब्राहम लेक (Abraham Lake): जहाँ जमा देने वाली ठंड में घटती है यह अनूठी घटना

कनाडा के अल्बर्टा (Alberta) प्रांत में कनाडाई रॉकजीज (Canadian Rockies) की बर्फीली वादियों के बीच स्थित ‘अब्राहम लेक’ (Abraham Lake) ही वह प्रसिद्ध स्थान है जहाँ यह अलौकिक और जादुई नजारा हर साल सर्दियों के मौसम में देखने को मिलता है। यह एक मानवनिर्मित यानी आर्टिफिशियल झील है जिसे उत्तर सास्काचेवान नदी पर बांध बनाकर तैयार किया गया था। जब कड़ाके की ठंड में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, तो झील की ऊपरी सतह बेहद कठोर और बिल्कुल शीशे जैसी पारदर्शी बर्फ की चादर में बदल जाती है। इसी पारदर्शी बर्फ के ठीक नीचे गहराई में गोल-गोल सफेद रंग की लड़ियां और स्तंभ बने हुए दिखाई देते हैं, जो बिल्कुल मोतियों की तरह चमकते हैं। जैसे-जैसे आप इस जमी हुई झील पर कदम रखते हैं, आपके पैरों के ठीक नीचे जमे हुए इन मोतियों के बुलबुले ऐसे तैरते हुए महसूस होते हैं मानो वे किसी दूसरी ही दुनिया का हिस्सा हों। इस झील की खासियत यह है कि यहाँ चलने वाली तेज और बर्फीली हवाएं बर्फ की ऊपरी सतह पर जमी बर्फबारी को उड़ा देती हैं, जिससे नीचे का दृश्य पूरी तरह साफ और क्रिस्टल क्लियर नजर आता है, जिससे इन मोतियों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।

सफेद मोतियों का चौंकाने वाला वैज्ञानिक सच: बुलबुलों में बंद है बेहद खतरनाक मीथेन गैस

जब वैज्ञानिक इस खूबसूरत और जादुई घटना की तह तक पहुंचे, तो जो सच निकलकर सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था। बर्फ के नीचे मोतियों की तरह चमकने वाले ये गोल-गोल आकार कोई पत्थर, रत्न या जादुई संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि ये वास्तव में अत्यंत ज्वलनशील ‘मीथेन गैस’ (Methane Gas) के बुलबुले हैं। झील की गहराई और तलहटी में मौजूद पेड़-पौधे, पत्तियां, लकड़ियां और मृत जीव जब जमा हो जाते हैं, तो वहाँ पाए जाने वाले बैक्टीरिया बिना ऑक्सीजन की मौजूदगी में उनका अपघटन (Decomposition) यानी सड़ाव शुरू कर देते हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में मीथेन गैस का निर्माण होता है। यह गैस पानी के निचले हिस्सों से बुलबुलों के रूप में ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है ताकि वायुमंडल में मुक्त हो सके। लेकिन कड़ाके की ठंड के कारण जब झील का ऊपरी पानी तेजी से बर्फ बनने लगता है, तो ये बुलबुले सतह तक पहुँचने से पहले ही अलग-अलग परतों में जम जाते हैं। इस तरह एक के ऊपर एक जमे हुए बुलबुलों की कतारें बन जाती हैं, जो बाहर से देखने पर सफेद मोतियों की लंबी-लंबी लड़ियों जैसी दिखाई देती हैं।

जितनी खूबसूरत, उतनी ही खतरनाक: एक छोटी सी चिंगारी से उठ सकती है आग की विशाल लपटें

यद्यपि यह नजारा देखने में बेहद लुभावना, शांत और विहंगम लगता है, लेकिन इसके साथ एक बहुत बड़ा खतरा भी जुड़ा हुआ है। मीथेन एक अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक गैस मानी जाती है। जब सर्दियों का मौसम खत्म होने लगता है या जब वैज्ञानिक इस बर्फ की परत में छोटा सा छेद करके माचिस की तीली या लाइटर जलाते हैं, तो इस छिपे हुए बुलबुले से बाहर निकलने वाली गैस तुरंत आग पकड़ लेती है और बर्फ के ऊपर नीले और पीले रंग की भयानक लपटें उठने लगती हैं। बर्फ और आग का यह संगम अपने आप में एक अद्भुत विरोधाभास पेश करता है। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पर्यटकों को सख्त चेतावनी देती हैं कि वे इस जमी हुई झील पर घूमते समय किसी भी तरह की आग, सिगरेट या लाइटर का इस्तेमाल न करें। यदि कोई लापरवाही से बर्फ की पतली परत को तोड़ देता है या वहाँ आग जलाने की कोशिश करता है, तो एक बहुत बड़ा विस्फोट हो सकता है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी यह झील

कनाडा की अब्राहम लेक केवल एक खूबसूरत पर्यटन स्थल ही नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के पर्यावरणविदों और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के लिए एक प्रयोगशाला भी बनी हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की झीलों के नीचे कैद मीथेन गैस का विशाल भंडार ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के लिहाज से एक बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है। मीथेन गैस, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की तुलना में कई गुना अधिक क्षमता से गर्मी को सोखती है और वायुमंडल के तापमान को बढ़ाती है। जैसे-जैसे धरती का तापमान बढ़ रहा है और परमाफ्रॉस्ट (Permafrost) यानी स्थायी रूप से जमी हुई बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे झीलों के नीचे से मीथेन गैस का रिसाव तेजी से बढ़ रहा है। यदि ये अरबों-खरबों मीथेन बुलबुले एक साथ वायुमंडल में छूट जाते हैं, तो इससे वैश्विक तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। इसलिए, जहां एक तरफ यह झील अपनी असीम सुंदरता और बर्फ के भीतर छिपे मोतियों जैसे दृश्यों से पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यह हमें कुदरत के उस नाजुक संतुलन और चेतावनी की याद भी दिलाती है जिसे बचाना पूरी मानवता के लिए बेहद जरूरी है।

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