
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना बिगुल पूरी तरह से फूंक दिया है। संगठन की कमान संभालते ही ‘बुआ-भतीजे’ यानी बीएसपी सुप्रीमो मायावती और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की जोड़ी ने सियासी हलचल को तेज कर दिया है। बुलंदशहर में ऐतिहासिक चुनावी शंखनाद करने के बाद अब आकाश आनंद 2 नवंबर को सहारनपुर के मैदान में उतरकर विरोधियों पर दहाड़ने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 5 नवंबर को राजधानी लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाकर रणनीति को अंतिम रूप देने जा रही हैं। चुनावी मैदान में बसपा के इस आक्रामक रुख ने सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही खेमों में खलबली मचा दी है।
पश्चिम उत्तर प्रदेश हमेशा से बीएसपी का पारंपरिक और सबसे मजबूत सियासी किला रहा है। इसी किले को दोबारा अभेद्य बनाने के उद्देश्य से आकाश आनंद 2 नवंबर को सहारनपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। सहारनपुर में दलित-मुस्लिम समीकरणों की मजबूत पृष्ठभूमि को देखते हुए इस जनसभा को बेहद अहम माना जा रहा है। बुलंदशहर की पहली सफल रैली के बाद सहारनपुर में आकाश आनंद का यह दूसरा बड़ा पड़ाव होगा, जहां वे कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और किसान मुद्दों को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार पर सीधा निशाना साधेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आकाश आनंद का मुख्य फोकस युवाओं और कैडर वोटरों को एक साथ जोडने का है, ताकि आगामी चुनावों में बहुजन समाज पार्टी को फिर से प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक पायदान पर पहुंचाया जा सके।
सहारनपुर में आकाश आनंद के शक्ति प्रदर्शन के ठीक तीन दिन बाद 5 नवंबर को बीएसपी सुप्रीमो मायावती लखनऊ में पार्टी के दिग्गजों और रणनीतिकारों की क्लास लेंगी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रदेश भर के सभी जिला प्रभारियों, मंडल प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारियों को तलब किया गया है। मायावती इस समीक्षा बैठक के दौरान राज्य भर में चलाए जा रहे कैडर कैंपों और संगठन विस्तार अभियान की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी। इसके साथ ही 2027 के चुनाव अभियान की अग्रिम रूपरेखा और आकाश आनंद के आगामी दौरे की समीक्षा भी की जाएगी। लखनऊ की इस बैठक से बसपा कार्यकर्ताओं को नया दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश के कोने-कोने में बसपा की चुनावी मुहिम रफ्तार पकड़ सके।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी नई राजनीतिक रणनीति के तहत कार्यों का स्पष्ट बंटवारा किया है। जहां युवा चेहरे के रूप में आकाश आनंद प्रदेश के विभिन्न मंडलों में धुआंधार रैलियां करके युवाओं और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं मायावती खुद लखनऊ के कंट्रोल रूम से संगठन की कमान संभाल रही हैं। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि बसपा की यह दोहरी रणनीति पार्टी के जनाधार को वापस लाने में काफी कारगर साबित हो सकती है। बुलंदशहर के अनूपशहर की रैली में उमड़े विशाल जनसैलाब ने यह साबित कर दिया है कि आकाश आनंद की सक्रियता से जमीन पर पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल कई गुना बढ़ गया है।
बहुजन समाज पार्टी के इस नए तेवर से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां आकाश आनंद 2 नवंबर को सहारनपुर के बाद नवंबर महीने में ही आगरा, अयोध्या, और कानपुर नगर जैसे प्रमुख जिलों में ताबड़तोड़ रैलियां करने वाले हैं, वहीं 5 नवंबर की लखनऊ बैठक में मायावती जमीनी स्तर पर प्रत्याशियों के चयन और बूथ मैनेजमेंट की चाबी सौंप सकती हैं। बसपा के इस तेज चुनावी अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘बुआ-भतीजे’ की जोड़ी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहुजन आंदोलन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है।
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