मिडिल-ईस्ट पर ट्रंप सरकार में ही खींचतान? ट्रंप के रुख से उलट बोले जेडी वेंस; साफ कहा- ‘डटा रहेगा अमेरिका

वाशिंगटन के सत्ता गलियारों और व्हाइट हाउस के भीतर मिडिल ईस्ट नीति को लेकर सब कुछ सामान्य है या अंदरखाने कोई बड़ी खींचतान शुरू हो गई है? यह गंभीर सवाल अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हालिया बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ‘अमेरिका फर्स्ट’ और दुनिया के अंतहीन युद्धों से अमेरिकी सेना को बाहर निकालने की वकालत करते रहे हैं। ट्रंप का रुख हमेशा से यह रहा है कि अमेरिका को विदेशी मामलों और खासकर मिडिल ईस्ट के विवादों में कम से कम उलझना चाहिए और वहां से जल्द से जल्द वापसी करनी चाहिए। लेकिन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रतिष्ठित टेक समिट में जो रुख अपनाया, वह ट्रंप की पारंपरिक नीति से पूरी तरह अलग दिशा में जाता दिखाई दे रहा है। वेंस ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल मिडिल ईस्ट से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा और क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी पहले की तरह डटकर बनी रहेगी।

ऑल-इन समिट में बोले वेंस: अमेरिका हटा तो दुनिया में मच जाएगा भयानक ऊर्जा संकट

लास एंजिल्स में आयोजित ‘ऑल-इन समिट’ (All-In Summit) के दौरान एक वर्चुअल संबोधन में जेडी वेंस ने मिडिल ईस्ट से अमेरिकी वापसी के खतरों पर दुनिया को आगाह किया। वेंस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अमेरिका ने इस संवेदनशील मोड़ पर मिडिल ईस्ट को अकेला छोड़ दिया, तो दुनियाभर के बाजारों में भीषण ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) खड़ा हो जाएगा। उन्होंने जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि शांति वार्ताओं और कूटनीतिक दबाव के बावजूद ईरानी सेना लगातार व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बना रही है। वेंस ने कहा, “अगर इस समय अमेरिका यह कह दे कि यह क्षेत्र अब अपने भरोसे रहेगा, तो दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति पूरी तरह चरमरा जाएगी। जो लोग हमारी मौजूदगी से नाराज हैं, उन्हें समझना होगा कि इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अमेरिका के हटते ही ईरान खुलेआम जहाजों पर गोलीबारी तेज कर देगा और अर्थव्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाएंगी।”

ट्रंप के ‘कम दखल’ बनाम वेंस के ‘सख्त रुख’ में दिखा वैचारिक मतभेद

जेडी वेंस के इस बयान को भू-राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप प्रशासन के अंदरूनी विरोधाभास के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि वेंस ने अपने भाषण में यह स्वीकार किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी संसाधनों को विदेशी विवादों में झोंकने के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से हिचकेगा। वेंस ने दोहराया कि वाशिंगटन का सबसे बड़ा राष्ट्रीय संकल्प यह है कि वह ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। वेंस ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लिया गया यह निर्णय पूरी तरह जिम्मेदारी भरा है, जिसका सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान की आक्रामकता और अस्थिरता के बावजूद वैश्विक बाजारों तक तेल की निर्बाध सप्लाई पहुंचती रहे।

इजरायल पर भी सख्त तेवर: अमेरिका की विदेश नीति नेतन्याहू के अधीन नहीं

इस संबोधन के दौरान जेडी वेंस का सबसे चौंकाने वाला रुख इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर सामने आया। वेंस ने कड़े शब्दों में साफ किया कि अमेरिका की मिडिल ईस्ट नीति पूरी तरह से इजरायल के हितों के ‘अधीन’ (Subservient) होकर नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि इजरायल सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान में अमेरिका का एक बेहद अहम और करीबी साझेदार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि दोनों देश हर रणनीतिक फैसले पर एकमत हों। वेंस ने नाटो (NATO) का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे यूरोप में नाटो सहयोगियों के साथ साझेदारी के बावजूद अमेरिकी नीति उनके निर्देशों पर तय नहीं होती, ठीक उसी तरह मिडिल ईस्ट में भी अमेरिका केवल अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले 40 वर्षों के राष्ट्रपतियों में ट्रंप अकेले ऐसे नेता हैं, जो अमेरिकी जनता के हित में जरूरत पड़ने पर ‘बीबी’ नेतन्याहू से अलग रास्ता चुनने और खुलकर असहमत होने की हिम्मत रखते हैं।

लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और मिडटर्म चुनावों का दबाव

विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि जेडी वेंस का यह कड़ा संदेश केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि लाल सागर में हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़वी हकीकत का नतीजा है। अमेरिका अगर पीछे हटता है तो खाड़ी के प्रमुख सहयोगी जैसे सऊदी अरब और यूएई खुद को असुरक्षित महसूस करने लगेंगे और वैश्विक व्यापारिक मार्ग बाधित हो जाएंगे। इसके अलावा, आगामी मिडटर्म चुनावों के मद्देनजर रिपब्लिकन पार्टी पर तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति को काबू में रखने का भारी घरेलू दबाव है। ऐसे में ट्रंप भले ही युद्ध से दूरी बनाने का चुनावी नैरेटिव पेश कर रहे हों, लेकिन प्रशासन के दूसरे सबसे ताकतवर नेता जेडी वेंस ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा और ईरान पर लगाम लगाने के लिए अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट के रणनीतिक मोर्चों पर मजबूती से डटी रहेगी।

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