मिशन 2027 का बिगुल: BJP शीर्ष नेतृत्व ने पश्चिमी UP में डाला डेरा, मेरठ-सहारनपुर से शुरू हुआ महामंथन; Gen Z, किसान और 4800 शक्ति केंद्रों के जरिए बिछेगी सियासी बिसात

उत्तर प्रदेश की सत्ता में लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक वापसी दर्ज करने और ‘हैट्रिक’ लगाने के संकल्प के साथ भारतीय जनता पार्टी ने अपने ‘मिशन-2027’ का औपचारिक चुनावी शंखनाद कर दिया है। भाजपा की परंपरा रही है कि वह हर बड़े चुनावी अभियान का आगाज पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्रांतिधरा से करती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने वेस्ट यूपी की 71 विधानसभा सीटों को साधने के लिए मेरठ और सहारनपुर में सीधा डेरा डाल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में यह तीन दिवसीय सघन संगठनात्मक मंथन शुरू हुआ है। इस दौरे का सीधा और स्पष्ट मकसद पिछले चुनावों में कमजोर पड़ी कड़ियों को मजबूत करना, असंतुष्ट पुराने कार्यकर्ताओं को मनाना और पहली बार वोट डालने वाली नई पीढ़ी (Gen Z) के मिजाज को टटोलकर एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार करना है।

मेरठ में 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों से संवाद, युवाओं से AI और रोजगार पर चर्चा

इस महामंथन के पहले चरण के तहत मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने पश्चिमी क्षेत्र के लगभग 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों को सीधे संबोधित कर बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का स्पष्ट मंत्र दिया। भाजपा जानती है कि बूथ प्रबंधन ही उसकी चुनावी जीत की सबसे मजबूत रीढ़ है। इसके साथ ही, पार्टी ने एक बड़ा प्रयोग करते हुए 2000 से अधिक छात्र-छात्राओं और युवाओं के साथ ‘युवा संवाद’ का विशेष सत्र आयोजित किया। इस संवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई तकनीक, शिक्षा प्रणाली, स्थानीय रोजगार, महंगाई और करियर से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सीधे युवाओं से यह समझने की कोशिश कर रहा है कि बदलते डिजिटल दौर में युवा मतदाता सरकार की नीतियों को किस नजरिए से देख रहे हैं और उनकी वास्तविक अपेक्षाएं क्या हैं।

22 सितंबर को सहारनपुर में शाकुंभरी देवी दर्शन और पुराने दिग्गजों से बैठक

मेरठ में एक ही दिन में चार मैराथन संगठनात्मक बैठकें और रात्रि प्रवास करने के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 22 सितंबर को सहारनपुर कूच करेगा। यहां राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां शाकुंभरी देवी के दर्शन-पूजन के साथ अपने दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे। सहारनपुर में आयोजित होने वाली दो अहम बैठकों में पश्चिमी क्षेत्र के वर्तमान व पूर्व सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों और संगठन के वरिष्ठ पुराने पदाधिकारियों को तलब किया गया है। अक्सर चुनावों के समय पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जो शिकायतें सामने आती हैं, पार्टी नेतृत्व इस बार चुनाव से काफी पहले ही उन गिले-शिकवों को दूर कर सबको एक मंच पर लाने की कवायद में जुट गया है।

क्यों भाजपा के लिए करो या मरो का सवाल है पश्चिमी यूपी?

भाजपा ने संगठनात्मक दृष्टि से पूरे उत्तर प्रदेश को छह क्षेत्रों में बांटा है, जिसमें पश्चिम क्षेत्र के अंतर्गत मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के कुल 14 जिले आते हैं। इन 14 जिलों में 71 विधानसभा और 14 लोकसभा सीटें शामिल हैं। 2017 में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था, जहां 71 में से भाजपा केवल 40 सीटें जीत सकी थी, जबकि सपा-रालोद गठबंधन ने 31 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा के विजय रथ को झटका दिया था।

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस इलाके ने पार्टी को बड़ा सबक सिखाया, जब 14 में से 7 सीटें विपक्ष की झोली में चली गईं। सहारनपुर में कांग्रेस, जबकि कैराना और मुजफ्फरनगर जैसी प्रतिष्ठा वाली सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। विधानसभा सीटों के आंकड़ों को देखें तो शामली जिले की तीनों सीटों पर भाजपा का खाता नहीं खुल सका था, मेरठ की 7 में से केवल 3 सीटें ही भाजपा जीत पाई थी और मुजफ्फरनगर में भी 6 में से महज 2 सीटों पर जीत मिली थी। मुरादाबाद मंडल में भी विपक्षी गठबंधन का दबदबा देखने को मिला था। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत सबसे पहले इसी इलाके में झोंक दी है।

रालोद का साथ और जाट-किसान समीकरण साधने की नई रणनीति

हालांकि, 2022 के मुकाबले 2027 का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल चुका है। 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाला राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अब एनडीए (NDA) गठबंधन का अटूट हिस्सा है। भाजपा इस नए समीकरण के सहारे जाट, किसान और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पैठ को और ज्यादा मजबूत करना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि जयंत चौधरी के साथ समन्वय बेहतर रहा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का आपसी तालमेल बैठ गया, तो विपक्ष के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की धार को पूरी तरह कुंद किया जा सकता है।

पश्चिमी यूपी में गन्ने का भुगतान, बिजली दरें, आवारा पशुओं की समस्या और स्थानीय अपराध नियंत्रण सबसे संवेदनशील चुनावी मुद्दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल के महीनों में कानून-व्यवस्था की बहाली और विकास परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन पर खास जोर दिया है। शीर्ष नेतृत्व के इस दो दिवसीय जमीनी प्रवास से साफ संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा 2027 की जंग को किसी भी हाल में हल्के में नहीं ले रही है और समय रहते जमीन पर मौजूद हर खामी की मरम्मत करने में जुट चुकी है।

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