
स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के प्रति बढ़ती जागरूकता के दौर में योग आज हर वर्ग की जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुका है। शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक शांति और बीमारियों से बचाव के लिए करोड़ों लोग प्रतिदिन योगाभ्यास कर रहे हैं। हालांकि, इसी उत्साह के बीच एक चिंताजनक प्रवृत्ति भी तेजी से उभरी है—शरीर की प्राकृतिक क्षमता से परे जाकर जबरन खिंचाव पैदा करना और आसनों को जबरदस्ती साधने का प्रयास करना। इसी गंभीर विषय का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) ने एक विस्तृत परामर्श जारी कर देशवासियों को सख्त चेतावनी दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योग कोई आक्रामक व्यायाम या जिम वर्कआउट नहीं है जहां ‘नो पेन, नो गेन’ का सिद्धांत लागू हो। योग का मूल आधार संतुलन, विश्राम और जागरूकता है। यदि कोई व्यक्ति बिना तैयारी के अपने शरीर पर अनुचित दबाव डालता है, तो यह लाभ पहुंचाने के बजाय स्थायी शारीरिक क्षति, मांसपेशियों में खिंचाव और जोड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
‘स्थिर सुखम् आसनम्’: महर्षि पतंजलि के मूल सिद्धांत को भूलने से बढ़ रहे हैं चोट के मामले
आयुष मंत्रालय ने अपने परामर्श में योग के शास्त्रीय आधार की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए महर्षि पतंजलि के प्रसिद्ध सूत्र ‘स्थिर सुखम् आसनम्’ का स्मरण कराया है। इसका सीधा अर्थ है कि जिस शारीरिक स्थिति में स्थिरता और सुख की अनुभूति हो, वही वास्तविक आसन है। मंत्रालय ने रेखांकित किया है कि प्राचीन योग ग्रंथों में कहीं भी शरीर को प्रताड़ित करने या पीड़ा सहते हुए आसन करने की बात नहीं कही गई है। आज कई साधक दूसरों से आगे निकलने या जल्दी परिणाम पाने के फेर में अपने जोड़ों और हड्डियों पर अत्यधिक दबाव डाल देते हैं। अस्पतालों के ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) और फिजियोथेरेपी विभागों में हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, जो गलत और आक्रामक योगाभ्यास के कारण सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, स्लिप डिस्क, शियाटिका और लिगामेंट टियर की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। योग का उद्देश्य शरीर को लचीला और मन को शांत करना है, न कि उसे किसी सर्कस के करतब की तरह मोड़ना।
सोशल मीडिया रील्स और सेल्फी कल्चर: बिना गुरु के कठिन आसनों की नकल पड़ रही भारी
मंत्रालय ने विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे इंस्टाग्राम और यूट्यूब—पर वायरल होने वाले 15 से 30 सेकंड के वीडियो को देखकर योगाभ्यास करने की आदत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इंटरनेट पर जटिल आसनों—जैसे शीर्षासन (हेडस्टैंड), चक्रासन (व्हील पोज), मयूरासन (पीकॉक पोज) और पश्चिमोत्तानासन—को देखकर युवा और शुरुआती अभ्यासी बिना किसी वार्म-अप या योग्य योग प्रशिक्षक के सीधे उनकी नकल करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले अधिकांश फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स वर्षों के अभ्यास और खास जेनेटिक लचीलेपन के कारण उन आसनों को सहजता से कर पाते हैं। जब एक सामान्य डेस्क-जॉब करने वाला व्यक्ति, जिसकी रीढ़ की हड्डी और हैमस्ट्रिंग पहले से ही सख्त हैं, अचानक शरीर को 180 डिग्री मोड़ने का प्रयास करता है, तो रीढ़ के मणकों (वर्टेब्रा) के बीच स्थित डिस्क खिसकने या नसों के दबने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। आयुष मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि योग हमेशा किसी प्रमाणित योग शिक्षक की सीधी देखरेख में ही सीखा जाना चाहिए।
रीढ़, गर्दन और घुटनों पर सबसे ज्यादा खतरा: जानिए कौन से आसन कब बन सकते हैं घातक
आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन में उन प्रमुख अंगों और आसनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जहां थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है:
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गर्दन और सर्वाइकल रीजन: सर्वांगासन, हलासन और शीर्षासन करते समय शरीर का पूरा वजन गर्दन और कंधों पर आ जाता है। यदि गर्दन की मांसपेशियां कमजोर हों या व्यक्ति को पहले से हल्का सर्वाइकल पेन हो, तो इन आसनों को बिना सहारे करने से गर्दन की नसें दब सकती हैं और हाथों में सुन्नपन आ सकता है।
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कमर और निचली रीढ़ (Lumbar Spine): आगे की ओर झुकने वाले आसन (जैसे पादहस्तासन या पश्चिमोत्तानासन) करते समय घुटनों को बिल्कुल सीधा रखकर पीठ को झटके से मोड़ने पर लोअर बैक की मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन या हर्नियेटेड डिस्क की समस्या हो सकती है।
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घुटने और टखने: पद्मासन या सिद्धासन में जबरदस्ती पैर फंसाने की कोशिश में घुटने के मेनिस्कस (कार्टिलेज) और लिगामेंट्स के फटने का जोखिम रहता है। यदि जांघों और कूल्हों में पर्याप्त लचीलापन न हो, तो पद्मासन के लिए जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।
प्राणायाम में सांस का अनुचित ठहराव: हाई बीपी और दिल के मरीजों के लिए चेतावनी
शारीरिक आसनों के अलावा, मंत्रालय ने प्राणायाम (सांसों के नियंत्रण) को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कई लोग टीवी या वीडियो देखकर भस्त्रिका, कपालभाति और कुंभक (सांस को भीतर या बाहर जबरन रोकना) का अत्यधिक तेज गति से अभ्यास करने लगते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), हृदय रोग, हर्निया, हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो या आंखों में ग्लूकोमा की समस्या हो, तो उसे तीव्र कपालभाति और लंबे समय तक सांस रोकने वाले प्राणायामों से पूरी तरह बचना चाहिए। कपालभाति में झटके से पेट अंदर खींचने पर रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है और मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं पर अनुचित दबाव पड़ सकता है। प्राणायाम हमेशा सहज, शांत और नाड़ी शोधन जैसे सरल अनुलोम-विलोम से शुरू होना चाहिए, जिसमें किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक तनाव न हो।
सुरक्षित योगाभ्यास के लिए आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देश: इन बातों का हमेशा रखें ध्यान
मंत्रालय ने दैनिक जीवन में सुरक्षित और फलदायी योगाभ्यास सुनिश्चित करने के लिए कुछ मूलभूत नियम निर्धारित किए हैं:
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सूक्ष्म व्यायाम और वार्म-अप अनिवार्य: सीधे मुख्य आसन शुरू करने के बजाय कम से कम 10 से 15 मिनट गर्दन, कंधे, कलाई, कमर और घुटनों के सूक्ष्म व्यायाम (हल्के मूवमेंट्स) करें ताकि शरीर का तापमान बढ़े और मांसपेशियां लचीली हों।
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शरीर के संकेतों को सुनें (Body Signals): यदि किसी भी मुद्रा में तीखा दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना या सुन्नपन महसूस हो, तो तुरंत उस मुद्रा से बाहर आ जाएं। खिंचाव (स्ट्रेच) और दर्द (पेन) के अंतर को समझना बेहद आवश्यक है।
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प्रॉप्स और साधनों का उपयोग करें: शुरुआती दिनों में योग ब्लॉक, बेल्ट, कुशन या दीवार के सहारे का उपयोग करने में कोई संकोच न करें। सहारा लेकर सही पोस्चर बनाना, गलत तरीके से बिना सहारे आसन करने से कहीं बेहतर है।
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स्वास्थ्य स्थिति की पूर्व जांच: किसी भी पुरानी बीमारी, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को योगाभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक और सर्टिफाइड योग थेरेपिस्ट से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
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शांत और नियमित श्वसन: किसी भी आसन में शरीर को रोकते समय सांस कभी न रोकें। सांसों की गति सामान्य और गहरी रहनी चाहिए। योग का समापन हमेशा शवासन या योग निद्रा से करें ताकि तंत्रिका तंत्र शांत हो सके।
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