‘राम जी के 5 बाप थे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर गरमाई देश की सियासत: भड़के अखिलेश यादव बोले- ‘अब सच्चे सनातनी लिखेंगे इनकी पर्ची

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों को लेकर एक बार फिर बड़े विवादों के केंद्र में आ गए हैं। भगवान श्रीकृष्ण को लेकर हाल ही में दिए गए एक विवादित बयान की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोशल मीडिया पर उनका एक और पुराना व सनसनीखेज वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री कथा मंच से भगवान श्रीराम के पांच पिता होने का दावा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वे कहते दिखाई दे रहे हैं, “राम जी के पांच बाप थे, ये बड़ी विचित्र बात है। इसको स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है। राम जी के पांच पिताजी थे, इसका लेख किसी को कहीं पर भी नहीं मिलेगा। हमारी तो छोटी उम्र है, मति है नहीं फिर भी बता रहे हैं। यह बात किसी से पूछ भी मत लेना।” इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स, धार्मिक संतों और विपक्षी नेताओं में तीव्र आक्रोश फैल गया है।

‘अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे’: अखिलेश यादव का सीधा और तीखा प्रहार

इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री का यह विवादित वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए उन पर तीखा हमला बोला। सपा प्रमुख ने लिखा:

“ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है? पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया, अब भगवान राम के पिता के बारे में अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं। अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे।'”

अखिलेश यादव ने न केवल धीरेंद्र शास्त्री के धार्मिक ज्ञान और आचरण पर सवाल खड़े किए, बल्कि उन्हें सत्ताधारी दल और ‘राजनीतिक आकाओं’ का मोहरा बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

धीरेंद्र शास्त्री ने क्या दिया था तर्क? गिनाए थे 5 पिताओं के नाम

वायरल हो रहे वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री अपने इस दावे के पीछे की अनोखी व्याख्या पेश करते हुए पांच पिताओं के नाम भी गिनाते हैं:

  1. अग्निदेव: उन्होंने कहा कि पहले पिता अग्निदेव हैं, क्योंकि यज्ञ के दौरान अग्निदेव से ही खीर प्रकट हुई थी जिससे प्रभु का प्राकट्य हुआ।

  2. राजा दशरथ: दूसरे पिता राजा दशरथ हैं, जिन्होंने राम का लालन-पालन किया।

  3. पक्षीराज जटायु: तीसरे पिता के रूप में जटायु का नाम लेते हुए उन्होंने तर्क दिया कि देवासुर संग्राम के समय दशरथ की मूर्छा जटायु ने तोड़ी थी और राम ने दशरथ की नहीं, बल्कि जटायु को पिता मानकर उनका अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) किया था।

  4. महर्षि विश्वामित्र: चौथे पिता महर्षि विश्वामित्र को बताया और कहा कि दशरथ ने राम को सौंपते हुए कहा था कि आज से आप ही इनके पिता हैं।

  5. महाराज जनक: पांचवें पिता के रूप में माता सीता के पिता राजा जनक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्नी के पिता भी पिता समान होते हैं।

हालांकि, हिंदू धार्मिक विद्वानों और आचार्यों का कहना है कि पिता तुल्य आदर देना और ‘पांच बाप’ जैसे अमर्यादित व असंवेदनशील शब्दों का सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित और धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है।

पहले ‘कृष्ण टेढ़े’ और अब ‘राम के 5 पिता’: लगातार विवादों में घिरे शास्त्री

धीरेंद्र शास्त्री पिछले कुछ दिनों से लगातार अपने बयानों के कारण चौतरफा घिरे हुए हैं। इससे पहले मध्य प्रदेश के करैरा में एक कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की तुलना श्रीराम से करते हुए कहा था कि “हमारे वाले (राम जी) तो खड़े भी होते हैं तो एकदम सीधे, तुम्हारे वाले (ठाकुर जी) तो खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े।” इस बयान के बाद मथुरा और ब्रज क्षेत्र के साधु-संतों, धर्माचार्यों और कृष्ण भक्तों ने कड़ा ऐतराज जताया था, जिसके बाद शास्त्री को सार्वजनिक सफाई देते हुए क्षमा मांगनी पड़ी थी। अब राम के पिताओं को लेकर सामने आई इस क्लिप ने विवाद को और अधिक हवा दे दी है।

यूपी की सियासत में ‘सनातनी बनाम चुनावी’ का नया अखाड़ा

उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के नेता अखिलेश यादव पर काशी विश्वनाथ और अयोध्या न जाने को लेकर तुष्टिकरण के आरोप लगा रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान को लपकते हुए खुद को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और सनातन धर्म के वास्तविक सम्मान का रक्षक साबित करने की कोशिश की है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह समेत कई अन्य नेताओं ने भी शास्त्री के इस बयान की निंदा की है। जानकारों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री के आगामी आयोजनों और उनकी प्रस्तावित पदयात्राओं को लेकर अब सियासी और सामाजिक गतिरोध और तेज होने के आसार हैं।

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