राम मंदिर ट्रस्ट को आज मिलेगा पहला स्थायी CEO: सर्च कमेटी ने अध्यक्ष को सौंपा 3 दिग्गजों के नामों का गोपनीय पैनल

धर्मनगरी अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह कॉर्पोरेट व पेशेवर स्वरूप देने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाया जा चुका है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार एक स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। उच्चस्तरीय सर्च कमेटी ने देश के प्रशासनिक, सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के परीक्षण के बाद तीन सबसे योग्य नामों का गोपनीय पैनल तैयार कर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दिया है। बुधवार को अयोध्या में मणिरामदास छावनी स्थित ट्रस्ट अध्यक्ष के आवास पर आयोजित ट्रस्टियों की महत्वपूर्ण बैठक में इस ऐतिहासिक निर्णय पर अंतिम मुहर लगाई जा रही है।

अयोध्या धाम सहित उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, धार्मिक केंद्र प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर-उन्नाव समेत दिल्ली-एनसीआर के प्रशासनिक गलियारों में इस बैठक को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से रोजाना लाखों श्रद्धालुओं की निरंतर आमद, करोड़ों रुपये के चढ़ावे का प्रबंधन और मंदिर निर्माण के दूसरे चरण की गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए एक पूर्णकालिक और सशक्त सीईओ की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। चढ़ावा विवाद के बाद संगठन में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बहाल करने के उद्देश्य से शुरू हुई इस चयन प्रक्रिया का परिणाम आज सार्वजनिक होने की पूरी उम्मीद है।

5,585 आवेदनों में से छंटे 3 नाम: सर्च कमेटी ने अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा पैनल

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ पद के लिए देश-विदेश से भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। सर्च कमेटी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस प्रतिष्ठित पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन समिति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम स्क्रीनिंग टूल्स और उच्चस्तरीय तकनीकी मूल्यांकन के जरिए प्राथमिक छंटनी की प्रक्रिया को संपन्न किया। इसके पश्चात दिल्ली-एनसीआर, पुणे और ओडिशा के संबलपुर में स्थापित विशेषज्ञ टीमों ने उम्मीदवारों के प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड, ईमानदारी, संकट प्रबंधन और हिंदू धर्म व संस्कृति के प्रति निष्ठा की गहन पड़ताल की।

शुरुआती दौर के बाद 16 चुनिंदा उम्मीदवारों को व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए 11 और 12 अगस्त को अयोध्या तलब किया गया था। इन 16 उम्मीदवारों के विस्तृत इंटरव्यू और विजन डॉक्यूमेंट के मूल्यांकन के बाद सर्च कमेटी ने तीन मुख्य नामों का अंतिम पैनल तैयार किया, जबकि तीन अन्य नामों को सुरक्षित (रिजर्व) श्रेणी में रखा गया है। इस पैनल में भारतीय सेना के एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, सिविल सेवा के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। छह प्रस्तावित नामों में एक महिला उम्मीदवार का नाम भी शामिल है। सर्च कमेटी के सचिव समीर पंडा और सदस्यों ने यह सीलबंद रिपोर्ट ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की उपस्थिति में ट्रस्ट के पटल पर रखी।

रिटायर्ड जस्टिस, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और परमाणु वैज्ञानिक की समिति ने तय किए मानक

इस चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए ट्रस्ट ने देश की तीन जानी-मानी हस्तियों की अध्यक्षता में सर्च कमेटी का गठन किया था। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और देश के वरिष्ठ पूर्व परमाणु वैज्ञानिक व शिरडी के श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे शामिल रहे।

कमेटी ने चयन के लिए बेहद कड़े मापदंड तय किए थे। उम्मीदवार के पास बड़े पैमाने पर भीड़ नियंत्रण, तीर्थयात्री सुविधाओं के विकास, बड़े बजट के प्रबंधन, सुरक्षा ऑडिट, अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और विवाद-मुक्त प्रशासनिक छवि का कम से कम दो दशकों का अनुभव होना अनिवार्य था। इसके साथ ही उम्मीदवार का सनातन परंपराओं में अटूट विश्वास रखने वाला होना भी बुनियादी शर्तों में शामिल था। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तीन नामों को किसी वरिष्ठता क्रम (रैंकिंग) में नहीं रखा गया है, बल्कि तीनों ही उम्मीदवार इस पद के लिए समान रूप से सक्षम हैं। अब ट्रस्ट की बैठक में इन नामों को प्राथमिकता (1, 2, 3) के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाएगा और पहले नंबर के उम्मीदवार को औपचारिक नियुक्ति प्रस्ताव भेजा जाएगा।

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद संगठनात्मक सर्जरी: ट्रस्ट डीड में ऐतिहासिक संशोधन

राम मंदिर ट्रस्ट में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की पृष्ठभूमि हाल ही में सामने आए दान और चढ़ावा चोरी के कथित प्रकरण से जुड़ी हुई है। मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट के लंबे समय तक महासचिव रहे चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में दोनों इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार किए गए थे। इस घटनाक्रम के बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंदिर के संचालन में संस्थागत सुधारों की जोरदार वकालत की थी।

बुधवार की बैठक में न केवल सीईओ के नाम का चयन किया जा रहा है, बल्कि ट्रस्ट की मूल नियमावली (Trust Deed) में व्यापक संशोधनों को भी पारित किया जा रहा है। देश के वरिष्ठतम कानूनविद् और पूर्व अटॉर्नी जनरल के. परासरन से कानूनी सलाह लेने के बाद तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार ट्रस्ट के महासचिव और नए सीईओ के अधिकारों व दायित्वों का स्पष्ट विभाजन किया जा रहा है। अब तक मंदिर के वित्तीय और दैनिक प्रशासनिक अधिकार कुछ व्यक्तियों तक केंद्रित थे, लेकिन नए नियमों के तहत दैनिक प्रशासन, सुरक्षा, वित्तीय लेखा-जोखा और कर्मचारी प्रबंधन पूरी तरह से सीईओ के अधिकार क्षेत्र में होगा, जो सीधे ट्रस्ट बोर्ड और महासचिव को रिपोर्ट करेंगे।

ट्रस्ट में 3 नए ट्रस्टियों की हुई नियुक्ति: अशोक सिंघल के परिजन और अयोध्या की हस्तियां शामिल

सीईओ के चयन के साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने रिक्त पड़े तीन ट्रस्टी पदों को भी विधिवत रूप से भर दिया है। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे तथा अयोध्या राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के दुखद निधन के कारण ट्रस्ट में तीन स्थान खाली हो गए थे। बुधवार को बैठक के पहले सत्र में सर्वसम्मति से तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की घोषणा कर दी गई।

ट्रस्ट के नए सदस्यों में विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत शीर्ष नेता अशोक सिंघल के करीबी रिश्तेदार और दिल्ली के प्रमुख उद्योगपति महेश भागचन्दका, अयोध्या के प्रतिष्ठित नागरिक मदन मोहन पांडेय और उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद से निर्मला यादव को शामिल किया गया है। इसके अलावा ट्रस्ट में संवाद को प्रभावी बनाने के लिए एक आधिकारिक मीडिया प्रभारी (PRO) के पद के सृजन पर भी सहमति बन गई है। संघ प्रचारक और वरिष्ठ इंजीनियर जगन्नाथ गुलवे की मंदिर निर्माण कार्यों में दोबारा वापसी को भी व्यवस्था को मजबूत करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पहले सीईओ को मिलेंगे व्यापक अधिकार: तिरुपति और वैष्णो देवी की तर्ज पर बदलेगी अयोध्या धाम की व्यवस्था

अयोध्या में राम मंदिर का प्रशासनिक ढांचा अब आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) की तर्ज पर पूरी तरह आधुनिक और स्वचालित बनाया जा रहा है। नवनियुक्त सीईओ के पास विशाल अधिकार होंगे। वे मंदिर परिसर में तैनात 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों, अर्चकों, सफाईकर्मियों, आईटी प्रोफेशनल्स और दान प्रबंधन टीमों का सीधा नेतृत्व करेंगे।

सीईओ के मुख्य दायित्वों में देश-विदेश से आने वाले लाखों रामभक्तों के लिए सुगम दर्शन प्रणाली विकसित करना, कतार प्रबंधन (Queue Management), डिजिटल दान काउंटरों का रियल-टाइम ऑडिट, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक विश्रामालयों का निर्माण और रामनवमी व दीपोत्सव जैसे महाउत्सवों का आपदा-रहित संचालन शामिल रहेगा। इसके साथ ही मंदिर परिसर में बन रहे परकोटे, शेषावतार मंदिर, सप्त ऋषियों के मंदिरों और अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय के शेष निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा कराने की जिम्मेदारी भी सीईओ की कार्ययोजना का मुख्य हिस्सा होगी।

सर्च कमेटी द्वारा सौंपे गए नामों में से जिस भी व्यक्तित्व के नाम पर ट्रस्ट अपनी मुहर लगाएगा, उसे औपचारिक मानदेय पैकेज के साथ कार्यभार संभालने का आमंत्रण दिया जाएगा। यदि चयनित उम्मीदवार प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं, तो गुरुवार सुबह तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पहले स्थायी सीईओ के नाम की आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा कर दी जाएगी। इस बड़े संस्थागत बदलाव से रामभक्तों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि अयोध्या में रामलला के दरबार की व्यवस्थाएं अब पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप संचालित होंगी।

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