
न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय सत्र के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर भारत द्वारा रूस से की जा रही कच्चे तेल की खरीद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कठघरे में खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में पारित ‘लिंडसे ग्राहम एक्ट’ के तहत रूसी तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100% तक दंडात्मक टैरिफ लगाने की चेतावनी के तुरंत बाद जेलेंस्की ने इसका खुला समर्थन किया है।
जेलेंस्की ने कड़े शब्दों में कहा कि रूस की पूरी युद्ध अर्थव्यवस्था भारत, चीन और तुर्किये जैसे एशियाई खरीदारों पर टिकी हुई है। यदि भारत और उसके सहयोगी देश तेल खरीदना बंद कर दें, तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास जंग जारी रखने के लिए कोई आर्थिक संसाधन नहीं बचेगा और युद्ध तुरंत खत्म हो जाएगा।
‘रूस अपनी अर्थव्यवस्था भारत के दम पर चला रहा है’ – जेलेंस्की का बड़ा बयान
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के इतर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी ऊर्जा व्यापार पर सीधा प्रहार किया। जेलेंस्की ने कहा, “रूस अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह भारत और कुछ हद तक चीन व तुर्किये के सहारे चला रहा है। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अगर ये देश रूस के साथ अपना ऊर्जा व्यापार बंद कर दें, तो मॉस्को को युद्ध तुरंत रोकना पड़ेगा।”
जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि जंग के मैदान में रूसी सेना का मुकाबला करने के साथ-साथ पुतिन के ‘फंडिंग सोर्स’ पर हमला करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक रूसी तेल और गैस से अरबों डॉलर का राजस्व मॉस्को के खजाने में जाता रहेगा, तब तक यूक्रेन पर मिसाइल और ड्रोन हमले नहीं रुकेंगे। जेलेंस्की ने वैश्विक बिरादरी से अपील की कि भारत, चीन और अमेरिका मिलकर ऐसा आर्थिक दबाव बनाएं जिससे रूस की युद्ध क्षमता पूरी तरह ध्वस्त हो जाए।
ट्रंप के ‘टैरिफ कानून’ के समर्थन में उतरे यूक्रेनी राष्ट्रपति
जेलेंस्की का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण देते हुए रूसी तेल के शीर्ष 5 खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने के कानूनी अधिकार मिलने का दावा किया था। ट्रंप के साथ द्विपक्षीय मुलाकात के बाद जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रशासन के इस कड़े रुख का समर्थन किया।
जेलेंस्की ने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप इस युद्ध को खत्म कराने में हमारी पूरी मदद करेंगे। हमें सर्दियां शुरू होने से पहले इस संघर्ष को रोकना होगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ का समर्थन करते हैं, तो जेलेंस्की ने साफ संकेत दिया कि जो भी देश रूस के साथ सौदेबाजी जारी रखेगा, उस पर आर्थिक दबाव डालना एक सही और आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि यदि पुतिन युद्ध रोकने और बातचीत की मेज पर आने से इनकार करते हैं, तो अमेरिका को अपने कड़े प्रतिबंध कानून और टैरिफ शक्तियों का पूरी कठोरता से इस्तेमाल करना चाहिए।
भारत के रुख पर दबाव बनाने की लगातार कोशिशें
यह पहला मौका नहीं है जब जेलेंस्की ने भारत की तेल खरीद पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी वे कई पश्चिमी मंचों पर कह चुके हैं कि ऊर्जा पुतिन का सबसे बड़ा हथियार है और सस्ती दरों पर तेल खरीदकर देश अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को हवा दे रहे हैं।
हालांकि हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, फिर भी रूस भारत का सबसे बड़ा एकल कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। जेलेंस्की चाहते हैं कि भारत केवल आयात में कमी न करे, बल्कि रूसी तेल का पूरी तरह बहिष्कार कर दे।
नई दिल्ली का अडिग रुख: राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
जेलेंस्की के इन बयानों और वाशिंगटन से मिल रही टैरिफ धमकियों पर भारत सरकार का रुख पहले दिन से बिल्कुल स्पष्ट और अटल रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और पेट्रोलियम मंत्रालय ने बार-बार पश्चिमी देशों और कीव को आईना दिखाया है:
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1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा: भारत का साफ कहना है कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी वाले विकासशील देश के लिए सस्ती और निर्बाध ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार का पहला राष्ट्रीय दायित्व है।
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वैश्विक तेल बाजार में संतुलन: भारत ने तर्क दिया है कि यदि भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता अचानक रूसी तेल खरीदना बंद कर देंगे, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के पार चली जाएंगी, जिससे पूरी दुनिया में महामंदी और भीषण महंगाई आ जाएगी।
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रूस का समर्थन: भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी हाल ही में कहा था कि भारत किसी देश की मदद के लिए नहीं, बल्कि अपने आर्थिक विकास और नागरिकों के हित के लिए तेल खरीदता है, और मॉस्को भारत की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जेलेंस्की की इस ताजा बयानबाजी और ट्रंप के टैरिफ कार्ड ने भारत-अमेरिका और भारत-यूक्रेन कूटनीतिक रिश्तों में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जहां भारत अपने संप्रभु आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता से खड़ा नजर आ रहा है।
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