
धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाले पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर बेनकाब हो गया है। पाकिस्तान के आव्रजन (इमिग्रेशन) और सुरक्षा अधिकारियों ने अड़ियल रवैया अपनाते हुए पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को वैध वीजा होने के बावजूद भारत आने से रोक दिया। यह पूरा मामला लाहौर स्थित अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का है, जहां भारत के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए फ्लाइट पकड़ने पहुंचे सिख तीर्थयात्रियों को क्लीयरेंस देने से साफ इनकार कर दिया गया। भारत सरकार द्वारा सभी वैध यात्रा दस्तावेज और वीजा जारी किए जाने के बाद भी पाकिस्तान के गृह मंत्रालय और इमिग्रेशन विंग द्वारा उठाए गए इस मनमाने कदम से दुनिया भर के सिख समुदाय में भारी गुस्सा और नाराजगी फैल गई है।
लाहौर एयरपोर्ट पर घंटों चली खींचतान: बोर्डिंग पास मिलने के बाद रोका गया जत्था
घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के विभिन्न शहरों—ननकाना साहिब, पेशावर, हसन अब्दाल और लाहौर से संबंधित सिख श्रद्धालुओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत स्थित सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (अमृतसर), श्री आनंदपुर साहिब और दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए भारतीय उच्चायोग से बाकायदा वैध वीजा हासिल किया था। सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद श्रद्धालु तय कार्यक्रम के अनुसार लाहौर एयरपोर्ट पहुंचे।
एयरपोर्ट पर टिकट और बैगेज चेक-इन के बाद जब श्रद्धालु इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंचे, तो वहां तैनात अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों और आंतरिक मंजूरियों का अस्पष्ट हवाला देते हुए उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और यात्रा की अनुमति देने से मना कर दिया। श्रद्धालुओं द्वारा भारतीय दूतावास से जारी वैध वीजा और स्वीकृत यात्रा कार्यक्रम दिखाने के बावजूद अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। घंटों तक चले विरोध और मान-मनौव्वल के बाद भी जत्थे को टर्मिनल से बाहर कर दिया गया, जिससे उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूट गईं और उन्हें भारी मानसिक व आर्थिक आघात पहुंचा।
भारत आने वाले सिख तीर्थयात्रियों पर पाकिस्तान का दोहरा मापदंड
यह घटनाक्रम पाकिस्तान के उस दोहरे मापदंड को उजागर करता है, जिसके तहत वह दुनिया को दिखाने के लिए करतारपुर कॉरिडोर और अपने यहां आने वाले भारतीय सिखों के स्वागत का ढोंग रचता है, लेकिन जब अपने ही देश के अल्पसंख्यक सिख नागरिकों के धार्मिक अधिकारों और उनकी आस्था की बात आती है, तो उन पर कड़े पहरे और बेवजह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं।
पाकिस्तान में रह रहे सिख लंबे समय से भारत स्थित अपने पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन की इच्छा संजोए रखते हैं। जब महीनों की जटिल प्रक्रियाओं और जांच-पड़ताल के बाद भारत सरकार उन्हें वीजा जारी करती है, तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां और गृह विभाग उन्हें प्रताड़ित करने और रोकने के नए-नए हथकंडे अपनाते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक रुकावट नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक आजादी का खुला उल्लंघन है।
सिख संगठनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जताया कड़ा रोष
पाकिस्तानी अधिकारियों की इस संवेदनहीन हरकत पर भारत और विदेशों के सिख संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमृतसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के पदाधिकारियों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।
सिख नेताओं ने कहा कि धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक तनातनी से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए। जब श्रद्धालु सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए यात्रा पर निकल रहे थे, तो उन्हें एयरपोर्ट पर रोकना मानवाधिकारों और धार्मिक आस्था का अपमान है। सिख संगठनों ने पाकिस्तान सरकार और वहां के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) से पूछा है कि आखिर किस कानून या सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अपने ही नागरिकों को उनके पवित्र तीर्थस्थलों की यात्रा से वंचित किया गया।
भारत सरकार से राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग
इस गंभीर घटना के सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों और सिख समाज ने भारत के विदेश मंत्रालय से मामले में तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। मांग की जा रही है कि भारत सरकार राजनयिक माध्यमों से इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तानी हुकूमत के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में वैध वीजा धारक किसी भी सिख श्रद्धालु को इस तरह की बेवजह की प्रताड़ना और रोक-टोक का शिकार न होना पड़े।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम उसके भीतर बढ़ते संकीर्ण नजरिए और अल्पसंख्यकों के प्रति उपेक्षापूर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर कड़ी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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