शेख हसीना से सुलह की राह तलाश रहा बांग्लादेश? ढाका के बदले सुर पर उठे सवाल— हृदय परिवर्तन या कोई नया राजनीतिक दांव

बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने वाले ढाका के राजनीतिक हलकों में अब अप्रत्याशित नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। जहां कुछ समय पहले तक हसीना के प्रत्यर्पण, उन पर दर्ज मुकदमों और पार्टी के समूल खात्मे की बातें सार्वजनिक मंचों से कही जा रही थीं, वहीं अब पर्दे के पीछे और कई राजनीतिक मंचों पर ‘राष्ट्रीय सुलह’ और सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की भाषा सुनाई देने लगी है। इस अचानक आए बदलाव ने दक्षिण एशियाई कूटनीति के जानकारों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को चौंका दिया है कि आखिर चंद हफ्तों में ऐसा क्या घट गया कि कट्टर विरोधी भी बातचीत की संभावनाओं को खारिज नहीं कर रहे।

ढाका के कई प्रमुख नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बयानों में यह बात उभरकर सामने आ रही है कि देश को लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता में नहीं रखा जा सकता। अवामी लीग को पूरी तरह से राजनीति से बेदखल करके चुनाव कराना न केवल चुनावी प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि भविष्य में एक और गृहयुद्ध जैसी स्थिति को जन्म दे सकता है। इसी जमीनी हकीकत को भांपते हुए अब सुलह और शांतिपूर्ण संवाद के संकेत दिए जा रहे हैं।

अचानक हृदय परिवर्तन या जमीनी हकीकत का दबाव, क्या है इस यू-टर्न की असली वजह?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसे विशुद्ध ‘हृदय परिवर्तन’ समझना भारी भूल होगी। इसके पीछे गहरे रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक दबाव काम कर रहे हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिरी हुई है। देश का गारमेंट उद्योग, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग ढांचा डगमगाया हुआ है। इसके अलावा, अवामी लीग बांग्लादेश के सबसे पुराने और सबसे बड़े राजनीतिक संगठनों में से एक है, जिसका कैडर देश के कोने-कोने में, खासकर ग्रामीण इलाकों और सरकारी तंत्र में गहराई तक समाया हुआ है।

प्रशासन को यह समझ आ चुका है कि अवामी लीग के लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पूरी तरह किनारे करके देश की कानून-व्यवस्था को सामान्य नहीं बनाया जा सकता। अगर अवामी लीग ने आगामी आम चुनावों का पूरी तरह बहिष्कार किया या हिंसक प्रतिरोध का रास्ता चुना, तो नई सरकार के लिए वैधता हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा। इसलिए सुलह की यह बातचीत दरअसल व्यवस्था को पटरी पर लाने और तनाव को कम करने का एक ‘डैमेज कंट्रोल’ फॉर्मूला माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत का रुख, क्यों बैकफुट पर आ रही है ढाका की अंतरिम व्यवस्था

इस कूटनीतिक बदलाव में अंतरराष्ट्रीय ताकतों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र लगातार बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और सर्वसमावेशी (Inclusive) चुनावों की मांग कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर प्रमुख राजनीतिक दलों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो चुनावों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना मुश्किल होगा।

दूसरी ओर, भारत के साथ संबंधों में आया खिंचाव भी ढाका के लिए भारी पड़ रहा है। शेख हसीना वर्तमान में भारत में मौजूद हैं और नई दिल्ली ने हमेशा यह रेखांकित किया है कि बांग्लादेश में शांति, स्थिरता और सभी समुदायों की सुरक्षा सर्वोपरि है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सीमा सुरक्षा के रिश्ते इतने जटिल हैं कि भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करके ढाका अपनी अर्थव्यवस्था को नहीं संभाल सकता। ऐसे में शेख हसीना और अवामी लीग के प्रति रुख में लचीलापन दिखाकर ढाका भारत और पश्चिमी देशों के साथ अपने बिगड़ते संबंधों को संतुलित करने की जुगत में है।

क्या यह कोई नया झांसा है, चुनावों से पहले अवामी लीग को साधने की चाल?

अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेताओं और शेख हसीना के करीबियों को इस तथाकथित सुलह की पेशकश पर गहरा संदेह है। उनका मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक छलावा हो सकता है ताकि पार्टी के कार्यकर्ताओं के आक्रोश को शांत किया जा सके और उन्हें सड़कों पर उतरने से रोका जा सके। अवामी लीग के नेताओं का तर्क है कि एक तरफ सुलह की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के सैकड़ों नेताओं पर दर्ज मुकदमों और प्रतिबंधों को वापस नहीं लिया गया है।

जानकारों का कहना है कि जब तक अंतरिम प्रशासन और विपक्षी दल ठोस कानूनी कदम नहीं उठाते, तब तक इन बयानों को सिर्फ एक राजनीतिक चाल (Tactical Pause) माना जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ढाका सच में शेख हसीना के साथ किसी सम्मानजनक समझौते की मेज पर आता है या फिर यह चुनावी वैतरणी पार करने के लिए रचा गया एक नया कूटनीतिक दांव साबित होता है। आने वाले महीने बांग्लादेश के लोकतंत्र और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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