
मिडिल ईस्ट और खास तौर पर सऊदी अरब में काम करने की इच्छा रखने वाले लाखों भारतीय युवाओं के लिए एक बेहद अहम और राहत भरी खबर सामने आ रही है। खाड़ी देशों (Gulf Countries) में भारतीय कार्यबल की भूमिका हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण रही है और भारत से हर साल लाखों लोग रोजगार की तलाश में सऊदी अरब का रुख करते हैं। हाल के दिनों में सऊदी अरब सरकार द्वारा श्रम कानूनों, न्यूनतम वेतन ढांचे, और डिजिटल कॉन्ट्रैक्टिंग सिस्टम में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं। इन नए रिफॉर्म्स के तहत सऊदी अरब में कई स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड जॉब रोल्स में वेतन पैकेज काफी बेहतर हुए हैं, जिससे औसतन वेतन 1.52 लाख रुपये (भारतीय रुपये में) या उससे भी अधिक तक पहुंच रहा है। इस बड़ी खबर के सामने आने के बाद से ही उन 27 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों के मन में उम्मीद की नई किरण जगी है जो पहले से ही सऊदी अरब में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं या फिर वहां जाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
क्या 27 लाख भारतीयों को मिलेगा इस भारी-भरकम सैलरी का सीधा फायदा या इसमें छिपी है कोई शर्त?
जब भी खाड़ी देशों में सैलरी बढ़ाने या न्यूनतम वेतन नियमों में संशोधन की बात आती है, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि इसका फायदा असल में किन-किन कर्मचारियों को मिलने वाला है। जानकारों और विदेश मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, 1.52 लाख रुपये (लगभग 6,500 से 7,000 सऊदी रियाल) का यह आकर्षक वेतन मुख्य रूप से उन भारतीय पेशेवरों को मिल रहा है जो टेक्निकल, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, भारी वाहन ड्राइविंग, और NEOM जैसे विजन 2030 के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे हैं। जहां तक बात आम ब्लू-कॉलर वर्कर्स या अनस्किल्ड लेबर की है, तो उनके लिए भी ‘क़िवा’ (Qiwa) डिजिटल पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्ट्स अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिससे नियोक्ताओं द्वारा सैलरी काटने या समय पर वेतन न देने की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लग सके। इस तरह 27 लाख भारतीयों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सुरक्षा, मेडिकल इंश्योरेंस और टैक्स-फ्री आय का बड़ा फायदा मिलना तय माना जा रहा है।
विजन 2030 और 0% इनकम टैक्स: क्यों भारतीय युवाओं के लिए पहली पसंद बन रहा है सऊदी अरब?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ‘विजन 2030’ (Vision 2030) पूरे देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रहा है। इसके तहत देश भर में कई नए शहर, पर्यटन केंद्र और औद्योगिक कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं, जिसके लिए लाखों हुनरमंद कर्मचारियों की भारी आवश्यकता है। भारतीय पेशेवरों के लिए सऊदी अरब में काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वहां व्यक्तिगत वेतन पर 0% (शून्य प्रतिशत) इनकम टैक्स लगता है, यानी आपकी पूरी की पूरी सैलरी आपकी शुद्ध कमाई होती है। इसके अलावा ज्यादातर प्रतिष्ठित कंपनियां कर्मचारियों को मुफ्त रहना (Accommodation), कंपनी की तरफ से फ्री ट्रांसपोर्टेशन, हेल्थ इंश्योरेंस और हर साल या दो साल में घर आने-जाने का हवाई टिकट भी मुहैया कराती हैं। यही वजह है कि यूरोप या अमेरिका की तुलना में भारतीय कामगारों के लिए सऊदी अरब में पैसे बचाना बेहद आसान हो जाता है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार आता है।
डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट्स और ‘क़िवा’ (Qiwa) पोर्टल से कैसे सुरक्षित होंगे भारतीय कर्मचारियों के अधिकार?
अतीत में कई बार ऐसी शिकायतें देखने को मिलती थीं जहां खाड़ी देशों में जाने वाले भारतीय कामगारों को अनुबंध के अनुसार वेतन नहीं मिलता था या एजेंटों द्वारा झूठे वादे करके भेजा जाता था। लेकिन अब सऊदी सरकार की नई नीतियों के बाद पूरी व्यवस्था पारदर्शी और डिजिटल हो चुकी है। अब किसी भी भारतीय नागरिक को वर्क वीजा तभी जारी होता है जब उसका डिजिटल जॉब ऑफर ‘क़िवा’ (Qiwa) और MHRSD पोर्टल पर पंजीकृत हो। इससे भारतीय कामगारों को यह गारंटी मिलती है कि जो सैलरी और सुविधाएं भारत में साइन किए गए एग्रीमेंट में लिखी हैं, वही उन्हें सऊदी अरब पहुंचने के बाद भी मिलेंगी। यदि कोई कंपनी या कफील (स्पॉन्सर) अनुबंध का उल्लंघन करता है, तो कर्मचारी आसानी से सरकारी पोर्टल के जरिए कानूनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इस आधुनिक व्यवस्था ने प्रवासियों के मन से धोखाधड़ी के डर को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और उन्हें अपनी कड़ी मेहनत का सही मूल्य दिलाने में मदद की है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और प्रवासियों के घर पर इस सैलरी बढ़ोतरी का क्या पड़ेगा दूरगामी प्रभाव?
विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं और खाड़ी देशों से आने वाला धन (Remittance) भारत के कई राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल और राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। जब सऊदी अरब में काम कर रहे 27 लाख भारतीयों की आय और नौकरी की सुरक्षा में सुधार होगा, तो वे अपने घर और ज्यादा पैसा भेज सकेंगे। इससे न केवल उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, भारत सरकार का विदेश मंत्रालय और सऊदी दूतावास मिलकर काम कर रहे हैं ताकि भारतीय युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के तहत ट्रेनिंग देकर बेहतर पैकेज वाली नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके। कुल मिलाकर, सऊदी अरब के ये नए लेबर रिफॉर्म्स और आकर्षक सैलरी पैकेज भारत-सऊदी अरब के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और लाखों भारतीय परिवारों के सुनहरे भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित होने वाले हैं।
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