17 अक्टूबर से 30 दिन तक नीच राशि तुला में रहेंगे सूर्यदेव: इन 4 राशियों के जातक रहें बेहद सावधान, सेहत और करियर पर पड़ेगा असर

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा और आत्मा, मान-सम्मान, पिता व नेतृत्व के कारक माने जाने वाले सूर्यदेव 17 अक्टूबर को कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार तुला राशि को सूर्य की ‘नीच राशि’ (Debilitated Sign) माना जाता है। जब भी कोई प्रभावशाली ग्रह अपनी नीच राशि में संचरण करता है, तो उसके सकारात्मक और शुभ प्रभावों में स्वाभाविक रूप से कमी आ जाती है तथा नकारात्मक प्रभावों की संभावना बढ़ जाती है। सूर्यदेव 17 अक्टूबर से लेकर अगले एक महीने यानी 16 नवंबर तक तुला राशि में ही विराजमान रहेंगे। इस 30 दिवसीय गोचर काल के दौरान समाज, राजनीति और व्यक्तिगत जीवन पर व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। विशेष रूप से मेष, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को इस अवधि में अपने कार्यक्षेत्र, वित्तीय निर्णयों, पारिवारिक संबंधों और स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

तुला राशि (Libra): लग्न भाव में नीच का सूर्य ला सकता है मानसिक तनाव और मान-सम्मान की चुनौती

सूर्य का यह गोचर तुला राशि के जातकों के प्रथम यानी लग्न भाव में ही होने जा रहा है, इसलिए सबसे अधिक सीधा और संवेदनशील प्रभाव इसी राशि के जातकों पर पड़ेगा। लग्न में नीच के सूर्य के प्रभाव से जातक के आत्मविश्वास में कमी, मानसिक अस्थिरता और स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन या अहंकार देखने को मिल सकता है। इस दौरान आपको कार्यस्थल पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों और सहयोगियों के साथ किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचना चाहिए, क्योंकि छोटी सी बहस भी आपकी प्रतिष्ठा और पदोन्नति को प्रभावित कर सकती है। साझेदारी में व्यापार करने वाले लोगों को अनुबंधों और पैसों के लेनदेन में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सिरदर्द, माइग्रेन, आंखों से जुड़ी समस्याएं और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) में उतार-चढ़ाव की शिकायत रह सकती है। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अनावश्यक तर्कों से दूर रहना ही श्रेयस्कर होगा।

मेष राशि (Aries): सप्तम भाव में सूर्य की मौजूदगी से दांपत्य और पार्टनरशिप में बढ़ सकती है तल्खी

मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं और सूर्य इनके मित्र ग्रह माने जाते हैं, लेकिन सूर्य का नीच अवस्था में गोचर मेष राशि के जातकों की कुंडली के सातवें भाव में हो रहा है। ज्योतिष में सप्तम भाव दांपत्य जीवन, दैनिक व्यापार और साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में नीच के सूर्य की उपस्थिति जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न कर सकती है। व्यापारिक साझेदारों के बीच गलतफहमियां पनप सकती हैं, जिससे व्यावसायिक योजनाओं में देरी होने की आशंका रहेगी। यदि आप इस दौरान कोई नया व्यापारिक अनुबंध या साझेदारी शुरू करने का विचार कर रहे हैं, तो उसे 30 दिनों के लिए टाल देना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निवेश संबंधी निर्णय नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्रोध और वाणी पर संयम रखना ही इस पूरे महीने आपकी सबसे बड़ी ढाल साबित होगा।

मिथुन राशि (Gemini): पंचम भाव में गोचर से शिक्षा, संतान और आर्थिक फैसलों में बरतें सतर्कता

मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर कुंडली के पंचम भाव में होने जा रहा है, जो बुद्धि, उच्च शिक्षा, प्रेम प्रसंग और संतान का भाव माना जाता है। पंचम भाव में सूर्य के कमजोर होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता की कमी और मानसिक भटकाव का सामना करना पड़ सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। संतान पक्ष की ओर से किसी प्रकार की चिंता या उनके स्वास्थ्य को लेकर भागदौड़ की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार, सट्टेबाजी या जोखिम भरे वित्तीय निवेशों से इस महीने पूरी तरह दूरी बनाकर रखें, क्योंकि अचानक आर्थिक हानि होने की संभावना बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में भी अहंकार के टकराव से दूर रहें और अपने साथी की भावनाओं का पूरा सम्मान करें।

मकर राशि (Capricorn): दशम भाव में नीच सूर्य से कार्यक्षेत्र में राजनीति और पिता के स्वास्थ्य की चिंता

मकर राशि के जातकों की कुंडली में सूर्य दशम यानी कर्म और कार्यक्षेत्र के भाव में गोचर करेंगे। दशम भाव में सूर्य को दिगबली माना जाता है, लेकिन नीच राशि में होने के कारण इसके शुभ फल खंडित हो सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को ऑफिस की अंदरूनी राजनीति से सतर्क रहने की जरूरत है; विरोधी आपकी छोटी-छोटी गलतियों को उच्चाधिकारियों के सामने बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं। इस दौरान कार्यस्थल पर अपनी जिम्मेदारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और गुप्त बातें साझा करने से बचें। पिता या पिता तुल्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य को लेकर यह समय थोड़ा संवेदनशील रह सकता है, इसलिए उनकी नियमित जांच और दवाओं का खास ख्याल रखें। सरकारी नौकरी या कानूनी मामलों से जुड़े लोगों को सभी कागजी कार्यवाही नियमपूर्वक पूरी रखनी चाहिए ताकि किसी तरह के नोटिस या जांच से बचा जा सके।

सूर्य के नीच प्रभाव से बचने के आसान और अचूक ज्योतिषीय उपाय

सूर्य के इस 30 दिवसीय नीच गोचर के दुष्प्रभावों को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में कुछ सरल उपाय बताए गए हैं। प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प और कुमकुम डालकर ‘ॐ घृणिः सूर्याय नमः’ अथवा ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके साथ ही नित्य आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना आत्मविश्वास और आरोग्य की वृद्धि के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। रविवार के दिन नमक का त्याग करें या कम सेवन करें तथा पिता व वरिष्ठजनों का आशीर्वाद लेकर ही दिन की शुरुआत करें। जरूरतमंदों को तांबा, गेहूं, गुड़ या लाल वस्त्र का दान करने से सूर्य के नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और मानसिक शांति बनी रहती है।

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