
वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज राजनेता डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बेबाक बयानों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों का समर्थन करते हुए ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा पेश किया है। ट्रंप ने इन हमलों को जायज ठहराते हुए ईरान की आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए और कहा कि वहां की सरकार ने अपने ही नागरिकों पर जो जुल्म ढाए हैं, वह असहनीय हैं।
ईरान में 32 हजार आंदोलनकारियों की मौत का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों का बचाव करते हुए एक भयावह आंकड़ा दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि महज तीन सप्ताह के भीतर ईरान में करीब 32 हजार आंदोलनकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ट्रंप के मुताबिक, जिस देश में मानवाधिकारों का इस कदर हनन हो रहा हो और जहां जनता की आवाज को कुचला जा रहा हो, वहां की शासन व्यवस्था के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से न्यायसंगत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सत्ता संरचना न केवल अपने देश बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन चुकी है।
‘मैं जंग के पक्ष में नहीं रहता’, ट्रंप की सफाई
अक्सर अपनी आक्रामक नीतियों के लिए चर्चा में रहने वाले ट्रंप ने इस बार खुद को एक शांतिप्रिय नेता के तौर पर पेश किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि लोगों की धारणा के विपरीत वह युद्ध के प्रबल विरोधी हैं। ट्रंप ने दावा किया कि किसी भी अन्य व्यक्ति या राजनेता के मुकाबले वह जंग के पक्ष में सबसे कम रहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता शांति स्थापित करना है, लेकिन जब सुरक्षा और न्याय की बात आती है, तो कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है।
अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई पर बड़ा बयान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव चरम पर है। अमेरिकी कूटनीति और सैन्य हस्तक्षेप को लेकर ट्रंप ने साफ किया कि इजरायल का साथ देना और ईरान की आक्रामकता को रोकना अमेरिका के हित में है। उन्होंने वर्तमान प्रशासन की नीतियों और अपनी भविष्य की रणनीतियों के बीच एक लकीर खींचते हुए यह संकेत दिया कि उनके नेतृत्व में ‘पीस थ्रू स्ट्रेंथ’ यानी शक्ति के माध्यम से शांति की नीति ही सबसे प्रभावी है।
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