भारत-सूरीनाम दोस्ती के 50 साल: ‘हम केवल पार्टनर नहीं, परिवार हैं’, विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान

नई दिल्ली/पारामारिबो: विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों कैरिबियाई देशों की अपनी नौ दिवसीय यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव पर सूरीनाम पहुंचे हैं। जमैका की सफल यात्रा के बाद सूरीनाम की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने दोनों देशों के बीच के गहरे रिश्तों को एक नई परिभाषा दी। जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और सूरीनाम के संबंध महज औपचारिक या राजनयिक नहीं हैं, बल्कि ये पूरी तरह से ‘पारिवारिक जुड़ाव’ पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर उनका यह बयान वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव और आत्मीय रिश्तों को दर्शाता है।

50 साल का सफर: दूर के साझेदार से आत्मीय परिवार तक

विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ में अपने लेख के माध्यम से दोनों देशों की साझा विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत, सूरीनाम को किसी सुदूर देश या सामान्य व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि एक आत्मीय परिवार के सदस्य की तरह देखता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उच्च स्तरीय यात्राओं का जिक्र करते हुए उन्होंने 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सूरीनाम यात्रा और राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी की भारत यात्रा को मील का पत्थर बताया।

खाद्य सुरक्षा और विकास कार्यों में भारत का साथ

भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सूरीनाम के विकास में योगदान दिया है। जयशंकर ने उल्लेख किया कि भारत ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सूरीनाम को 425 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री सहायता के रूप में प्रदान की है। इसके अलावा, भारत समर्थित कई विकास परियोजनाएं सूरीनाम में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जो वहां के स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही हैं। यह सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय एक-दूसरे का हाथ थामने वाली अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

हिंदी के वैश्विक प्रचार और पर्यावरण संरक्षण में साझा संकल्प

सांस्कृतिक मोर्चे पर सूरीनाम का योगदान अतुलनीय है। विदेश मंत्री ने विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में सूरीनाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के बीच यह भाषाई सेतु संबंधों को और भी सजीव बनाता है। केवल संस्कृति ही नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। सूरीनाम अब भारत की पहल वाले ‘इंटरनेशनल सोलर एलायंस’ और ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ जैसी वैश्विक मुहीमों का एक सक्रिय भागीदार बन चुका है।

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