नोएडा के सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी को मिली नई जिंदगी: अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी, रिवाइज्ड लेआउट प्लान मंजूर; 10,000+ होमबायर्स को बड़ी राहत

नोएडा के सबसे प्रीमियम और पर्यावरण-अनुकूल माने जाने वाले सेक्टर 150 ‘स्पोर्ट्स सिटी’ (Sports City Project) में अपने आशियाने और रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे 10,000 से अधिक होमबायर्स के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत भरी खबर सामने आई है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Noida Authority) ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में औपचारिक हलफनामा पेश करते हुए जानकारी दी है कि सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी के बहुप्रतीक्षित संशोधित लेआउट प्लान (Revised Layout Plan) को आधिकारिक रूप से अंतिम मंजूरी दे दी गई है। सालों से स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में देरी, बिल्डरों की वित्तीय देनदारियों और विनियामक पेचों के कारण इस पूरे 300 एकड़ के सेक्टर में निर्माण कार्यों, कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) जारी करने और फ्लैटों की रजिस्ट्री पर जो कठोर रोक लगी हुई थी, अब उसके हटने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। शीर्ष अदालत में दाखिल इस जानकारी के बाद एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार और परेशान खरीदारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

सेक्टर 150 को मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर की ‘स्पोर्ट्स सिटी’ के रूप में परिकल्पित किया गया था, जहां मुख्य आवंटियों (कंसोर्टियम लीड्स) को शर्त के तहत कुल भूमि के कम से कम 70 प्रतिशत हिस्से पर विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं—जैसे 9-होल गोल्फ कोर्स, मल्टीपर्पज इंडोर व आउटडोर स्टेडियम, टेनिस कोर्ट, तैराकी परिसर और खेल अकादमियां विकसित करनी थीं। शेष 30 प्रतिशत भूमि पर ही ग्रुप हाउसिंग और कॉमर्शियल निर्माण की अनुमति थी।

  • बिल्डरों द्वारा शर्तों की अनदेखी: मुख्य डेवलपर्स ने खेल सुविधाएं तैयार किए बिना आवासीय फ्लैट्स बनाकर बेचना शुरू कर दिया और अपनी जमीन को दर्जनों छोटे-छोटे बिल्डरों को सब-लीज पर काट दिया।

  • अथॉरिटी की सख्त कार्रवाई: जब कैग (CAG) की रिपोर्ट और आंतरिक ऑडिट में खेल ढांचे के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, तो नोएडा अथॉरिटी ने वर्ष 2021 के आसपास सेक्टर 150 के सभी प्रोजेक्ट्स के नए नक्शे पास करने, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट देने और रजिस्ट्री कराने पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगा दिया था।

  • होमबायर्स का पिसना: इस प्रतिबंध का खामियाजा उन निर्दोष फ्लैट खरीदारों को भुगतना पड़ा, जिन्होंने अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई लगाकर फ्लैट तो बुक करा लिए थे, लेकिन प्रोजेक्ट तैयार होने के बावजूद उन्हें न तो पजेशन मिल पा रहा था और न ही मालिकाना हक यानी रजिस्ट्री हो पा रही थी।

मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि बिल्डरों और विकास प्राधिकरण के बीच के विवाद में उन खरीदारों को बंधक नहीं बनाया जा सकता जिन्होंने पूरा भुगतान कर दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा गठित ‘अमिताभ कांत समिति’ (Amitabh Kant Committee) की सिफारिशों को लागू करते हुए उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए एक व्यावहारिक नीति तैयार की।

  • संशोधित लेआउट में खेल सुविधाओं का पुनर्संतुलन: नए मंजूर लेआउट प्लान में खेल परिसर की भूमि को व्यावहारिक और चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

  • जीरो पीरियड का लाभ: कोविड काल और अदालती मुकदमों के दौरान के समय को ब्याज माफी (Zero Period) के तहत समायोजित कर बिल्डरों की देनदारियों का पुनर्गठन किया गया है।

  • 25% अग्रिम जमा की शर्त: डेवलपर्स को निर्देश दिया गया है कि वे कुल बकाये का 25 प्रतिशत तुरंत प्राधिकरण में जमा कराएं ताकि उनके प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों की उप-पट्टा विलेख (Sub-lease Deed/Registry) तत्काल शुरू कराई जा सके।

संशोधित लेआउट प्लान को सुप्रीम कोर्ट में आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद सेक्टर 150 के लगभग 15 से 20 बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर इसका सकारात्मक असर तुरंत देखने को मिलेगा:

  1. रजिस्ट्री प्रक्रिया का शुभारंभ: जिन सोसायटियों के टावर पूरी तरह बनकर तैयार हैं और खरीदार बिना रजिस्ट्री के रह रहे थे, उनके लिए अब त्रिपक्षीय रजिस्ट्री (Tripartite Registry) कैंप लगाए जा सकेंगे।

  2. अटके कंप्लीशन सर्टिफिकेट (OC/CC) जारी होंगे: कई टावर 95% से अधिक पूरे होकर केवल अथॉरिटी के अप्रूवल के अभाव में फंसे थे, उन्हें अब बिजली-पानी के स्थायी कनेक्शन और अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।

  3. वित्तीय तरलता और निर्माण में तेजी: रुके हुए प्रोजेक्ट्स में बैंकों से अतिरिक्त फंडिंग और SWAMIH फंड जैसे राहत पैकेजों के रास्ते खुलेंगे, जिससे अधूरे पड़े टावरों का निर्माण कार्य फिर से तेज गति से शुरू हो सकेगा।

  4. संपत्ति के मूल्यों में उछाल: रजिस्ट्री पर रोक हटने से सेक्टर 150 की संपत्तियों की रीसेल वैल्यू और बाजार साख में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।

अथॉरिटी ने शीर्ष अदालत को यह भी आश्वस्त किया है कि संशोधित लेआउट पास करने का मतलब मूल स्पोर्ट्स सिटी के विजन से समझौता करना बिल्कुल नहीं है। डेवलपर्स को निर्धारित समयसीमा (Time-Bound Timeline) के भीतर गोल्फ कोर्स, स्पोर्ट्स क्लब और स्टेडियम के निर्माण की गारंटी देनी होगी। इसके लिए बिल्डरों से बैंक गारंटी और एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) के जरिए निगरानी रखी जाएगी ताकि खेल ढांचे के नाम पर आवंटित जमीन का कोई अन्य व्यावसायिक दुरुपयोग न हो सके। सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी के इस गतिरोध का टूटना न केवल नोएडा के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह उन हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों की सबसे बड़ी कानूनी और नैतिक जीत है जो अपने सपनों के घर का कानूनी मालिकाना हक पाने के लिए वर्षों से दर-दर भटक रहे थे।

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