Russia-China-India Oil : रूस से चीन जा रहे सात तेल टैंकरों ने अचानक बदला रास्ता, अब भारत की ओर मुड़े…

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। रूस से कच्चे तेल की खेप लेकर चीन की ओर जा रहे कम से कम सात बड़े तेल टैंकरों ने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदल लिया है। ताज़ा सैटेलाइट ट्रैकिंग और शिपिंग डेटा के अनुसार, ये टैंकर अब चीन के बजाय भारत के बंदरगाहों की ओर रुख कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत की बढ़ती ऊर्जा शक्ति और रणनीतिक खरीदारी को दर्शाता है। इसी बीच खबर है कि भारत की सभी प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियां रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं।

चीन को छोड़ भारत की ओर क्यों मुड़े रूसी टैंकर?

समुद्री मार्ग से रूस का कच्चा तेल ले जा रहे इन सात टैंकरों का अचानक भारत की ओर मुड़ना एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक हलचल माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे रूसी तेल पर मिलने वाली भारी छूट और भारत के रिफाइनर्स द्वारा दिए गए बेहतर सौदे हो सकते हैं। आमतौर पर चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, लेकिन हाल के दिनों में भारत ने जिस तरह से अपनी तेल आयात रणनीति में बदलाव किया है, उससे रूस के लिए भारत एक भरोसेमंद और बड़े बाजार के रूप में उभरा है। इन टैंकरों के भारतीय तटों पर पहुंचने से घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।

भारतीय रिफाइनर्स के बीच मची रूसी तेल की होड़

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से ही भारत ने अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद जारी रखी है। अब देश की सभी सरकारी और निजी क्षेत्र की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियां रूसी कच्चे तेल के भंडार को भरने के लिए सक्रिय हो गई हैं। इंडियन ऑयल (IOCL), रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी दिग्गज कंपनियां रूस के साथ नए और बड़े सौदों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। जानकारों का मानना है कि सस्ती दरों पर मिलने वाला यह तेल न केवल रिफाइनिंग मार्जिन को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत के व्यापार घाटे को कम करने में भी सहायक होगा।

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारत का बढ़ता दबदबा

रूस से आने वाले तेल जहाजों का रास्ता बदलना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। पश्चिम के प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी भी देश के साथ व्यापार करने के लिए स्वतंत्र है। चीन के मुकाबले भारत की रिफाइनिंग क्षमता और मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है, यही वजह है कि रूसी निर्यातक अब बीजिंग के बजाय नई दिल्ली को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले दिनों में रूसी तेल की आवक और बढ़ने की संभावना है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

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