
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी के बीच मतदाता सूचियों में पाई जाने वाली गड़बड़ियों ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। मामला राज्य की महत्वपूर्ण विधान परिषद यानी एमएलसी चुनावों की वोटर लिस्ट से जुड़ा हुआ है, जहां पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर धांधली और गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है। पार्टी का साफ तौर पर कहना है कि चुनाव जैसे पवित्र लोकतांत्रिक उत्सव में यदि वोटर लिस्ट जैसी बुनियादी चीज में ही इस तरह की गंभीर खामियां या जानबूझकर की गई छेड़छाड़ पाई जाएगी, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद करना बेमानी होगा। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद से प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल दागे जा रहे हैं।
विवाद तब और अधिक गहरा गया जब समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आधिकारिक तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज और पर्चियां सार्वजनिक कर दीं। पार्टी का दावा है कि जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वोटर लिस्ट में एक ही नाम और समान विवरण वाले पांच अलग-अलग मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा सूची में कई ऐसे अजीबोगरीब और आपत्तिजनक नाम भी छपे हुए हैं जिन्हें देखकर किसी को भी अपनी आंखों पर यकीन न हो। विपक्षी दलों का आरोप है कि ये महज कोई साधारण तकनीकी या प्रिंटिंग की गलती नहीं है, बल्कि इसके पीछे सोची-समझी रणनीति के तहत चुनावों को प्रभावित करने और फर्जी मतदान कराने का बड़ा खेल चल रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों ने इन तमाम सबूतों और पर्चियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने रखते हुए तुरंत प्रभाव से सूची की समीक्षा करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर वोटर लिस्ट की कमियों के वायरल होने के बाद निर्वाचन आयोग भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित जिलाधिकारियों और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों से फौरी तौर पर रिपोर्ट तलब की है। आयोग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान यदि स्तर पर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती गई है या जानबूझकर गलत प्रविष्टियां जोड़ी गई हैं, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पात्र और वास्तविक मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के प्रशासनिक अमले को निर्देश दिए हैं कि मतदान से पहले इस प्रकार के दोहरे नामों, फर्जी प्रविष्टियों और तकनीकी त्रुटियों की त्वरित पहचान कर उन्हें सूची से हटाया जाए ताकि चुनाव की शुचिता पर कोई आंच न आ सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां एक तरफ विपक्षी दल इसे सत्ताधारी दल की शह पर चुनावी प्रक्रिया में सेंध लगाने की साजिश करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर सूचियों को दुरुस्त करने के लिए युद्ध स्तर पर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि देश के सबसे बड़े राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए यह बेहद जरूरी है कि मतदाता सूचियों का डेटा पूरी तरह से त्रुटिहीन हो। किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि वहां का मतदाता बिना किसी डर और असमंजस के अपने विवेक का इस्तेमाल कर सके। फिलहाल, इस ताजा विवाद के सामने आने के बाद जिला प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर और डिजिटल माध्यमों से सूचियों के मिलान में जुट गई हैं, और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग इन शिकायतों के आधार पर कितना कड़ा और प्रभावी कदम उठाता है।
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