
कंगारुओं के देश ऑस्ट्रेलिया में जाकर काम करने और अपने सपनों की उड़ान भरने की चाह रखने वाले लाखों भारतीय युवाओं और कुशल पेशेवरों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्रालय और प्रवासन विभाग (Department of Home Affairs) ने अपने वर्क वीजा और आव्रजन (Immigration) नियमों में बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों का सीधा प्रभाव भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले वर्क वीजा आवेदकों, छात्रों और कुशल श्रमिकों (Skilled Workers) पर पड़ने वाला है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर बढ़ रही प्रवासियों की संख्या को संतुलित करना, गुणवत्तापूर्ण कार्यबल को प्राथमिकता देना और स्थानीय श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करना है। यदि आप भी कंगारू देश में नौकरी हासिल कर अपना भविष्य संवारने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों, सैलरी थ्रेशोल्ड, स्किल असेसमेंट और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के बारे में पहले से पूरी जानकारी जुटा लेना बेहद आवश्यक है ताकि आपका वीजा आवेदन खारिज न हो।
कोर स्किल्स सैलरी थ्रेशोल्ड और वीजा फीस में बढ़ोतरी: अब कितनी सैलरी मिलने पर ही मिलेगा वर्क परमिट?
ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन विभाग द्वारा किए गए संशोधनों के तहत स्किल्ड एम्प्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा (जैसे सबक्लास 482 और 186) के लिए न्यूनतम आय सीमा (Core Skills Income Threshold) को बढ़ाकर 79,423 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब ऑस्ट्रेलिया की किसी कंपनी या नियोक्ता को किसी भारतीय कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए सरकार द्वारा तय की गई इस न्यूनतम आय सीमा या उससे अधिक का सालाना सैलरी पैकेज देना होगा। इसके साथ ही, विशेषज्ञ कौशल (Specialist Skills Stream) के लिए यह न्यूनतम सीमा बढ़कर लगभग 146,576 AUD तय की गई है। सैलरी थ्रेशोल्ड के अलावा, वीजा आवेदन शुल्क (Visa Application Charges) में भी वृद्धि की गई है। नए नियमों के बाद भारतीय आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे अपने जॉब ऑफर लेटर की अच्छी तरह से जांच कर लें ताकि यह पक्का हो सके कि कंपनी उन्हें ऑस्ट्रेलियाई श्रम मानकों के अनुरूप ही वेतन और सुविधाएं दे रही है।
किन-किन क्षेत्रों के पेशेवरों को मिलेगी वीजा प्रोसेसिंग में प्राथमिकता और कैसे काम करेगा नया प्राथमिकता नियम?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार की नई आव्रजन नीति (Ministerial Directions 121 & 122) के तहत वीजा आवेदनों के प्रसंस्करण (Processing Priorities) की एक नई सूची तैयार की गई है। इस व्यवस्था के तहत कुछ विशेष क्षेत्रों के पेशेवरों को वीजा जारी करने में सबसे पहली प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें मुख्य रूप से हेल्थकेयर (डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ), इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कंस्ट्रक्शन (सिविल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन ट्रेड्स), शिक्षण एवं शिक्षा क्षेत्र (Teachers), और कृषि एवं संसाधन क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। यदि आपका पेशा और योग्यता इन प्राथमिकता वाली सूचियों के अंतर्गत आती है, तो आपके वर्क वीजा आवेदन का निपटारा बहुत तेजी से किया जाएगा। इसके विपरीत, नॉन-प्रायोरिटी सेक्टर से जुड़े मामलों में कागजातों की बेहद गहनता से जांच की जाएगी और प्रोसेसिंग टाइम में कुछ अधिक समय भी लग सकता है।
भारतीय स्नातकों के लिए MATES योजना और टूरिस्ट/स्टूडेंट वीजा से वर्क वीजा पर स्विचिंग पर सख्त पाबंदी
भारतीय युवाओं और नए ग्रेजुएट्स के लिए राहत की बात यह है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के तहत शुरू की गई ‘मैट्स’ (MATES – Mobility Arrangement for Talented Early-professionals Scheme) योजना के माध्यम से शीर्ष भारतीय शिक्षण संस्थानों (NIRF Top 100) से स्नातक युवा बिना किसी स्पॉन्सरशिप के दो साल तक ऑस्ट्रेलिया में काम कर सकते हैं। हालांकि, इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्रालय ने टूरिस्ट वीजा (Visitor Visa) या स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया जाकर वहां से आसानी से वर्क वीजा में स्विच करने (Visa Switching) के रास्ते पर काफी हद तक लगाम लगा दी है। अब ‘नो फर्दर स्टे’ (No Further Stay) जैसी शर्तों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है, जिसका मतलब है कि अधिकांश आवेदकों को अपने वर्क वीजा या नए वीजा के लिए भारत (Offshore) वापस लौटकर ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ऑस्ट्रेलिया वर्क वीजा आवेदन करते समय भारतीय अभ्यर्थी ध्यान रखें ये महत्वपूर्ण बातें और सावधानियां
ऑस्ट्रेलिया में नौकरी का सपना देख रहे भारतीयों के लिए अब फर्जी जॉब ऑफर और धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों से सावधान रहना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। वीजा के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को मान्यता प्राप्त निकायों से अपना स्किल असेसमेंट (Skills Assessment) कराना अनिवार्य है। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त अंग्रेजी भाषा परीक्षाओं (जैसे IELTS, PTE Academic या CELPIP) में आवश्यक अंक प्राप्त करना बेहद जरूरी है। यदि आप भी ऑस्ट्रेलिया जाने की योजना बना रहे हैं, तो हमेशा ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट (homeaffairs.gov.au) या पंजीकृत मार्स एजेंटों (MARA Registered Agents) के माध्यम से ही अपनी वीजा प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। नियमों में आई इस सख्ती का मकसद भले ही अनधिकृत प्रवेश को रोकना हो, लेकिन योग्य और कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए ऑस्ट्रेलिया के दरवाजे आज भी उतने ही सम्मान और अवसरों के साथ खुले हुए हैं।
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