
बॉलीवुड में अपने बेजोड़ डांस, कॉमिक टाइमिंग और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा की जोड़ी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे मजबूत और चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है। दोनों अक्सर टीवी शोज और साक्षात्कारों में अपनी खट्टी-मीठी नोकझोंक और एक-दूसरे के प्रति अटूट प्यार को खुलकर बयां करते हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान गोविंदा ने अपने करियर के शुरुआती संघर्ष और सुनीता के साथ अपने रिश्ते के उस दौर को याद किया, जब वे स्टारडम की सीढ़ियां चढ़ रहे थे और जिंदगी कई बड़े बदलावों से गुजर रही थी। गोविंदा ने बताया कि जब उनका करियर तेजी से बदल रहा था, तब उन्होंने सुनीता से एक ऐसा गंभीर सवाल पूछा था, जिसने उनके रिश्ते की नींव को हमेशा के लिए पुख्ता कर दिया।
‘जब तुम वापस आओगी तो मैं बदला हुआ मिलूंगा, क्या तुम्हें यह मंजूर होगा?’
गोविंदा ने उस किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा आया था जब सुनीता कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रही थीं। उस समय गोविंदा फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए दिन-रात जी-तोड़ मेहनत कर रहे थे, लगातार शूट्स कर रहे थे और उनका लाइफस्टाइल तेजी से एक बड़े अभिनेता के सांचे में ढल रहा था। गोविंदा को यह एहसास था कि चकाचौंध भरी यह दुनिया किसी भी इंसान के तौर-तरीकों, प्राथमिकताओं और व्यस्तताओं को पूरी तरह बदल देती है।
गोविंदा ने भावुक होकर बताया—”मैंने सुनीता की आंखों में देखकर बहुत संजीदगी से कहा था कि जब तुम लौटकर आओगी, तो शायद मुझे पहले जैसा साधारण और बेफिक्र लड़का नहीं पाओगी। स्टारडम, काम का दबाव और यह माहौल मुझे थोड़ा बदल देंगे… क्या तुम्हें मेरा यह बदला हुआ रूप चलेगा?” यह सवाल एक ऐसे नौजवान का था जो अपनी प्रेमिका को किसी धोखे या भ्रम में नहीं रखना चाहता था और भविष्य की हकीकत से रूबरू करा रहा था।
सुनीता का वह दो टूक और दिल जीतने वाला जवाब जिसने बांध दिया रिश्ता
गोविंदा के इस संजीदा सवाल पर सुनीता आहूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के जो जवाब दिया, उसने गोविंदा का दिल पूरी तरह जीत लिया। सुनीता ने बड़ी सहजता और अटूट भरोसे के साथ कहा—”चलेगा! तुम जैसे भी हो, जिस भी रूप में रहोगे, मुझे पूरी तरह कबूल हो। मुझे तुम्हारे हालात या तुम्हारे बदलाव से फर्क नहीं पड़ता, मुझे सिर्फ तुमसे मतलब है।”
सुनीता के इस एक जवाब ने गोविंदा के मन में उठ रहे सारे संशय, डर और असुरक्षा की भावना को एक झटके में मिटा दिया। गोविंदा ने स्वीकार किया कि उस दौर में जब एक उभरते हुए कलाकार के पास अनिश्चितताओं के अलावा कुछ नहीं था, तब सुनीता का यह निस्वार्थ समर्थन और भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।
37 वर्षों का अटूट सफर: हर उतार-चढ़ाव में ढाल बनकर खड़ी रहीं सुनीता
गोविंदा और सुनीता का विवाह साल 1987 में हुआ था। शुरुआती दौर में करियर के डर से अपनी शादी को छुपाकर रखने से लेकर 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस के निर्विवाद ‘किंग’ बनने तक, सुनीता हमेशा पर्दे के पीछे गोविंदा की सबसे मजबूत रीढ़ बनी रहीं। जब गोविंदा का करियर ढलान पर आया और इंडस्ट्री के कई लोगों ने उनसे किनारा कर लिया, तब भी सुनीता ने एक मजबूत चट्टान की तरह पूरे परिवार को संभाला।
गोविंदा ने कई मौकों पर यह माना है कि उनकी जिंदगी में जो भी अनुशासन, ठहराव और खुशहाली है, उसका पूरा श्रेय सुनीता को जाता है। चकाचौंध से भरी फिल्मी दुनिया में जहां रिश्ते अक्सर बिखर जाते हैं, वहीं गोविंदा और सुनीता की यह अनकही दास्तान आज भी युवाओं को प्यार, समझ और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का सच्चा पाठ पढ़ाती है।
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