बॉम्बे हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मांगी बिना शर्त माफी, ‘लीव इंडिया नोटिस’ पर 7 दिसंबर तक राहत

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान इन दिनों अपनी किसी नई फिल्म की रिलीज के कारण नहीं, बल्कि देश छोड़ने के प्रशासनिक नोटिस और बॉम्बे हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणियों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अभिनेता के लिए भारी कानूनी मुसीबत बन गया। इस मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने अभिनेता के आचरण पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने उन्हें स्पष्ट लहजे में याद दिलाया कि उनके पास भारत की नहीं बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता है और वह यहां केवल ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड धारक के रूप में रह रहे हैं। पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि जरा सोचिए अगर कोई भारतीय नागरिक अमेरिका जाकर वहां की व्यवस्था के खिलाफ किसी राजनीतिक धरने या विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेता, तो क्या वहां की सरकार इसे बर्दाश्त करती? उसे तो अगली ही उपलब्ध फ्लाइट से फौरन भारत वापस डिपोर्ट कर दिया जाता।

सिर्फ हलफनामा नहीं चलेगा, बिना शर्त माफी पर ही टिकी अदालत की राहत

अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान अभिनेता इमरान खान के वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का प्रदर्शन के आयोजकों से कोई सीधा लेना-देना या संगठनात्मक संबंध नहीं था। वह तो केवल कौतूहलवश वहां से गुजरते हुए भीड़ को देखने रुके थे। वकील ने अदालत को भरोसा दिलाते हुए एक हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की कि अभिनेता भविष्य में इस तरह के किसी भी राजनीतिक आंदोलन या धरने का हिस्सा नहीं बनेंगे। हालांकि, हाई कोर्ट की खंडपीठ इस दलील से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि एक सेलिब्रिटी और सार्वजनिक हस्ती होने के नाते उनके कहे और किए का समाज पर व्यापक असर पड़ता है। केवल औपचारिकता भरा हलफनामा पर्याप्त नहीं होगा। यदि उन्होंने अनजाने में भी इस प्रदर्शन में भाग लिया है, तो उन्हें अपनी इस गलती पर शपथ पत्र के जरिए बिना शर्त माफी मांगनी होगी और गहरा खेद व्यक्त करना होगा। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अभिनेता की ओर से अदालत के समक्ष बिना शर्त माफीनामा और लिखित अंडरटेकिंग पेश की गई, जिसके बाद ही पीठ ने राहत के आदेश पर हस्ताक्षर किए।

बचपन से भारत में रहे तो नागरिकता क्यों नहीं ली, जजों के सीधे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने इमरान खान के कानूनी दर्जे और उनकी दोहरी स्थिति पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए। जजों ने उनके वकील से पूछा कि इमरान खान लगभग दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं, उनकी स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और पूरा फिल्मी करियर इसी देश में बना, उन्हें देश भर के लोगों ने एक सितारे के रूप में बेशुमार प्यार और पहचान दी, तो उन्होंने आज तक औपचारिक रूप से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन क्यों नहीं किया? पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिनेता यहां रहते हैं, यहीं काम करते हैं और सारे नागरिक लाभ उठाते हैं, लेकिन उनके पासपोर्ट पर विदेशी नागरिकता दर्ज है। अदालत ने कहा कि ओसीआई कार्ड धारकों को भारत में व्यापार करने, संपत्ति रखने और रहने के कई अधिकार तो मिलते हैं, लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले राजनीतिक अधिकार और अभिव्यक्ति के जरिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता विदेशी नागरिकों को हासिल नहीं है। यदि उन्हें राजनीतिक विरोध और मतदान में हिस्सा लेना है, तो वे अमेरिका जा सकते हैं और वहां अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एफआरआरओ का ‘लीव इंडिया नोटिस’ और 7 दिसंबर तक मिली मोहलत

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी एफआरआरओ द्वारा जारी किया गया वह आदेश है, जिसमें इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का फरमान सुनाया गया था। अगस्त क्रांति मैदान की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने अभिनेता को कुछ देर के लिए हिरासत में लिया था और इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्रालय तथा एफआरआरओ को भेजी थी। इसके साथ ही भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया द्वारा भी नियमों के उल्लंघन को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। एफआरआरओ ने इसे विदेशी नागरिक द्वारा वीजा और ओसीआई नियमों का खुला उल्लंघन मानते हुए देश छोड़ने का नोटिस थमा दिया। इस नोटिस के खिलाफ इमरान खान ने तत्काल बॉम्बे हाई कोर्ट की शरण ली और दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना ही एकतरफा आदेश पारित कर दिया गया। हाई कोर्ट ने अभिनेता के बिना शर्त माफीनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए ‘लीव इंडिया नोटिस’ के अमल पर 7 दिसंबर 2026 तक रोक बढ़ा दी है। अदालत ने एफआरआरओ को निर्देश दिया है कि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए अभिनेता को अपनी बात रखने का पूरा मौका दे और उसके बाद ही कोई अंतिम प्रशासनिक निर्णय ले।

सेलिब्रिटी स्टेटस और विदेशी नागरिकता के कानूनी दायरों पर नजीर बना मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट में चला यह घटनाक्रम भारत में रह रहे उन सभी विदेशी नागरिकों और ओसीआई कार्ड धारकों के लिए एक बड़ी कानूनी नजीर बन गया है जो सार्वजनिक जीवन या सिनेमा जगत में सक्रिय हैं। अदालत ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता, पारिवारिक पृष्ठभूमि या सेलिब्रिटी रुतबा उसे देश के कानूनों और आव्रजन नियमों से ऊपर नहीं रख सकता। भारत के कानून के मुताबिक कोई भी विदेशी नागरिक भारत की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों या सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन नहीं कर सकता। इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि जब तक कोई व्यक्ति आधिकारिक रूप से भारत का नागरिक नहीं बन जाता, तब तक उसे भारतीय नागरिकों के समान राजनीतिक विशेषाधिकार नहीं मिल सकते। फिलहाल 7 दिसंबर तक इमरान खान को देश से निकाले जाने के खतरे से फौरी राहत तो मिल गई है, लेकिन एफआरआरओ की आगामी जांच और गृह मंत्रालय के रुख पर यह तय होगा कि बॉलीवुड के इस जाने-माने चेहरे का भारत में सफर आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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