
अमेरिका में जारी 2026 के बहुचर्चित मिडटर्म चुनावों के मतदान के ठीक बीच पश्चिम एशिया के मोर्चे से एक अत्यंत गंभीर और विस्फोटक सैन्य खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण और फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित केशम द्वीप (Qeshm Island) पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। ईरानी समाचार एजेंसियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, केशम द्वीप पर एक के बाद एक पांच जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में लड़ाकू विमान मंडराते देखे गए। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए इसे ‘सीमित रक्षात्मक कार्रवाई’ करार दिया है और दावा किया है कि यह हमला अमेरिकी संपत्तियों व निगरानी विमानों पर ईरान द्वारा दागी गई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के जवाब में किया गया। इस ताज़ा हमले ने दोनों देशों के बीच महीनों से सुलग रहे संघर्ष को अचानक एक नए और खूनी मोड़ पर ला खड़ा किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का मुख्य अखाड़ा, तेल टैंकरों पर हमले के बाद भड़की आग
ताजा सैन्य हमलों का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजरता है। हाल के दिनों में इस संकरे समुद्री गलियारे में कई वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर संदिग्ध ड्रोन व विस्फोटक नौकाओं से हुए हमलों के बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों और जहाजों की नाकाबंदी किए जाने के बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार टकराव बढ़ रहा था। केशम द्वीप बंदर अब्बास के ठीक सामने और मुख्य शिपिंग लेन के मुहाने पर स्थित है, जहां ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मिसाइल लॉन्च पैड्स, रडार स्टेशन और फास्ट-अटैक बोट्स के बेस हैं। अमेरिकी हमलों ने सीधे तौर पर इन्हीं सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में ईरानी सेना ने भी पूरे खाड़ी क्षेत्र में अपनी मिसाइल बैटरियों को ‘मैक्सिमम डिटेरेंस’ के तहत एक्टिव कर दिया है।
परमाणु ठिकानों पर हमले की चेतावनी और वैश्विक कूटनीति में भारी खलबली
इस पूरे सैन्य संघर्ष के बीच सबसे खौफनाक पहलू दोनों पक्षों के परमाणु रुख को लेकर सामने आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया रैलियों और बयानों में दोहराया है कि जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने और उनके पास कभी परमाणु हथियार न होने का पूर्ण लिखित समझौता नहीं होता, तब तक सैन्य विकल्प खुले रहेंगे। अमेरिकी सैन्य हलकों में ईरान के भूमिगत यूरेनियम संवर्धन केंद्रों और ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) जैसे गहराई में बने परमाणु ढांचों को निशाना बनाने की योजनाएं चर्चा में रही हैं। वहीं दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनके संप्रभु या परमाणु ठिकानों पर व्यापक हमला हुआ, तो वे अपनी परमाणु नीति की सीमाओं को तोड़ते हुए पूर्ण सामरिक प्रतिरोध (अल्टीमेट डिटेरेंस) का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी चेतावनी दी है कि संघर्ष के इस स्तर पर पहुंचने के बाद यदि किसी भी परमाणु साइट पर विस्फोट होता है, तो वह पूरे क्षेत्र के लिए पर्यावरणीय और मानवीय तबाही साबित होगा।
मिडटर्म चुनावों के राजनीतिक दबाव और सुलह की वार्ताओं के बीच फंसा भविष्य
यह सैन्य स्ट्राइक उस वक्त हुई है जब वाशिंगटन में सत्ता का शक्ति संतुलन दांव पर लगा है। ट्रंप प्रशासन जहां एक तरफ घरेलू मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिकी हितों पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा, वहीं दूसरी तरफ बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए कतर, ओमान और पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति समझौते की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। खुद अमेरिकी नेतृत्व ने हमले से चंद घंटे पहले संकेत दिए थे कि तेहरान के साथ समझौता ‘संभव’ है, जबकि ईरान ने भी होर्मुज को सशर्त खोलने की दो-दिवसीय योजना की बात कही थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर बार बातचीत की मेज सजने से पहले दोनों पक्षों की ओर से दागे जाने वाले रॉकेट और बम सुलह की उम्मीदों पर पानी फेर देते हैं। यदि आने वाले घंटों में ईरान ने अमेरिकी नौसेना या खाड़ी में मौजूद सैन्य ठिकानों पर जवाबी बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, तो यह संघर्ष एक पूर्ण और अनियंत्रित क्षेत्रीय महायुद्ध में तब्दील हो सकता है।
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