US Midterm Election 2026: क्या हिलने वाली है डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता? आज हो रहा मतदान, जानें भारत में कब और कैसे दिखेंगे नतीजे

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों को लेकर दुनिया भर में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या इन नतीजों के बाद डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस छोड़ना पड़ेगा? इसका सीधा और स्पष्ट संवैधानिक जवाब है—बिल्कुल नहीं। अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है और ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल 20 जनवरी 2029 तक सुनिश्चित है। मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक मध्य (दो साल पूरे होने पर) में कराए जाते हैं, जहां राष्ट्रपति पद के लिए नहीं बल्कि संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों के लिए मतदान होता है। हालांकि, कुर्सी न जाने के बावजूद इस चुनाव को ट्रंप की सत्ता का ‘अप्रत्यक्ष डिमोशन’ कहा जा सकता है। यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के किसी भी सदन में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रंप अपने बचे हुए दो साल के कार्यकाल में ‘लेम डक’ (कमजोर) राष्ट्रपति बनकर रह जाएंगे। उनकी आर्थिक नीतियां, टैक्स कानून, सीमा सुरक्षा के बजट और विदेश नीति से जुड़े वित्तीय प्रस्ताव संसद में अटक जाएंगे।

भारतीय समयानुसार (IST) कब और कैसे सामने आएंगे चुनावी नतीजे?

भारत में रहने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के जानकारों के लिए अमेरिकी चुनाव के नतीजों का समय समझना बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका और भारत के बीच लगभग 10 घंटे 30 मिनट का समय अंतराल है। 3 नवंबर को अमेरिकी समयानुसार मतदान संपन्न होने के बाद काउंटिंग तुरंत शुरू हो जाती है।

  • पहला पोल क्लोजिंग: अमेरिका के पूर्वी तट (जैसे इंडियाना और केंटकी के कुछ हिस्से) पर शाम 6:00 बजे (EST) पोलिंग बूथ बंद होंगे, जिसका मतलब है कि भारत में 4 नवंबर की सुबह 4:30 बजे (IST) से शुरुआती रुझान आने शुरू हो जाएंगे।

  • मुख्य रुझान और तस्वीर: 4 नवंबर की सुबह 6:30 बजे से 9:30 बजे (IST) के बीच पेंसिल्वेनिया, ओहियो, फ्लोरिडा और जॉर्जिया जैसे अहम राज्यों के रुझान स्पष्ट होने लगेंगे।

  • अंतिम तस्वीर: पश्चिमी तट (कैलिफोर्निया, वाशिंगटन) और अलास्का में मतदान भारतीय समयानुसार 4 नवंबर की सुबह 11:30 बजे तक समाप्त होगा। इसलिए, भारत में 4 नवंबर की दोपहर तक यह साफ हो जाएगा कि अमेरिकी संसद की चाबी रिपब्लिकन के पास रहेगी या फिर डेमोक्रेट्स ने बाजी मार ली है। हालांकि, डाक मतपत्रों (मेल-इन बैलेट्स) और कड़े मुकाबलों वाले राज्यों में अंतिम आधिकारिक प्रमाणन में कुछ दिन लग सकते हैं।

संसद का गणित: 435 हाउस और 35 सीनेट सीटों पर कांटे की टक्कर

इस बार के मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों की दशा और दिशा तय होनी है।

  • प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स): निचले सदन की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है। वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 सीटें और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सीटें हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 218 है, यानी डेमोक्रेट्स को सिर्फ 4 सीटों का शुद्ध फायदा (नेट गेन) चाहिए ताकि वे निचले सदन पर कब्जा कर सकें।

  • सीनेट (उच्च सदन): 100 सदस्यों वाली सीनेट में इस समय रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत है। इस बार 35 सीटों (जिनमें फ्लोरिडा और ओहियो के दो विशेष चुनाव शामिल हैं) पर चुनाव हो रहे हैं। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की आवश्यकता होती है, जिसका अर्थ है कि डेमोक्रेट्स को सीनेट छीनने के लिए 4 सीटों का उलटफेर करना होगा।

  • गवर्नर चुनाव: इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर्स (राज्यपालों) के पदों के लिए भी मतदान कराया जा रहा है, जो राज्य स्तर की नीतियों को प्रभावित करेंगे।

यदि विपक्ष जीता तो ट्रंप प्रशासन के सामने खड़ी होंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें

यदि डेमोक्रेट्स किसी एक सदन या दोनों में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो वॉशिंगटन में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा:

  1. संसदीय जांच और समन का दौर: प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण मिलते ही हाउस ओवरसाइट और ज्यूडिशियरी कमेटियों की कमान डेमोक्रेट्स के हाथ में आ जाएगी। वे ट्रंप प्रशासन के पिछले दो साल के नीतिगत फैसलों, इमिग्रेशन आदेशों, टैरिफ और व्यापारिक डील्स की जांच शुरू कर मंत्रियों को समन भेज सकेंगे।

  2. महाभियोग (इम्पीचमेंट) का खतरा: अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव केवल प्रतिनिधि सभा ही ला सकती है। डेमोक्रेट्स के बहुमत में आने पर ट्रंप पर तीसरी बार महाभियोग की तलवार लटक सकती है, भले ही सीनेट से दो-तिहाई बहुमत के अभाव में वे पद से न हटें।

  3. नियुक्तियों और बजट पर पूर्ण रोक: यदि सीनेट डेमोक्रेट्स के पास जाती है, तो ट्रंप अपनी पसंद के सुप्रीम कोर्ट जजों, फेडरल जजों, कैबिनेट मंत्रियों और विदेशी राजदूतों की नियुक्ति नहीं करा पाएंगे।

भारत, वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव केवल वाशिंगटन का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। यदि अमेरिकी संसद विभाजित (स्प्लिट कांग्रेस) होती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एकतरफा लगाए जाने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) और व्यापारिक प्रतिबंधों पर लगाम लगेगी, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों और भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही, एच-1बी वीजा नियमों और आव्रजन नीतियों में संतुलन बना रहेगा। वैश्विक स्तर पर यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के तनाव और नाटो रक्षा बजट के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता की मंजूरी संसद से ही होकर गुजरती है। इसलिए, आज होने वाला यह मतदान तय करेगा कि आने वाले दो वर्षों तक दुनिया भर में अमेरिकी नेतृत्व आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ेगा या फिर घरेलू सियासी गतिरोध में उलझा रहेगा।

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