
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और प्रदेश की सभी पांचों सरकारी विद्युत वितरण कंपनियां (मध्यांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल, पूर्वांचल और केस्को) अगले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR – Annual Revenue Requirement) दाखिल करने की अंतिम तैयारियों में जुटी हैं। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के नियमों के अनुसार सभी वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को 30 नवंबर तक अपना वित्तीय लेखा-जोखा और संभावित टैरिफ प्रस्ताव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। इस प्रस्ताव में कंपनियां वर्ष भर में बिजली खरीद की अनुमानित लागत, वितरण एवं पारेषण खर्च, लाइन लॉस और राजस्व घाटे का पूरा ब्योरा देती हैं। इसी आधार पर यह तय होता है कि आगामी वर्ष में बिजली की दरों में बदलाव की आवश्यकता है अथवा नहीं।
वर्तमान में यूपी में क्या है प्रति यूनिट बिजली की दर?
वर्तमान लागू टैरिफ व्यवस्था के अनुसार उत्तर प्रदेश में घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए स्लैबवार बिजली की दरें इस प्रकार निर्धारित हैं:
| उपभोक्ता श्रेणी | मासिक यूनिट स्लैब | ऊर्जा दर (प्रति यूनिट) | फिक्स्ड चार्ज (प्रति माह) |
| शहरी घरेलू (LMV-1) | 0 से 150 यूनिट | ₹5.50 / यूनिट | ₹110 प्रति किलोवाट |
| शहरी घरेलू (LMV-1) | 151 से 300 यूनिट | ₹6.00 / यूनिट | ₹110 प्रति किलोवाट |
| शहरी घरेलू (LMV-1) | 300 यूनिट से अधिक | ₹6.50 / यूनिट | ₹110 प्रति किलोवाट |
| ग्रामीण घरेलू (LMV-1) | 0 से 100 यूनिट | ₹3.35 / यूनिट | ₹90 प्रति किलोवाट |
| ग्रामीण घरेलू (LMV-1) | 101 से 150 यूनिट | ₹3.85 / यूनिट | ₹90 प्रति किलोवाट |
| ग्रामीण घरेलू (LMV-1) | 151 से 300 यूनिट | ₹5.00 / यूनिट | ₹90 प्रति किलोवाट |
| ग्रामीण घरेलू (LMV-1) | 300 यूनिट से अधिक | ₹5.50 / यूनिट | ₹90 प्रति किलोवाट |
| लाइफलाइन उपभोक्ता (BPL) | 0 से 100 यूनिट (1 kW लोड) | ₹3.00 / यूनिट | ₹50 प्रति किलोवाट |
| व्यावसायिक / दुकानें (LMV-2) | 0 से 300 यूनिट (4 kW तक) | ₹7.50 / यूनिट | ₹330 प्रति किलोवाट |
| व्यावसायिक / दुकानें (LMV-2) | 300 यूनिट से अधिक (4 kW तक) | ₹8.40 / यूनिट | ₹330 प्रति किलोवाट |
(नोट: कुल बिल में 5% विद्युत शुल्क (इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) और मासिक ईंधन अधिभार समायोजन (FPPAS) अलग से जोड़ा या घटाया जाता है।)
क्या इस बार बढ़ेंगी बिजली की कीमतें?
डिस्कॉम्स जब 30 नवंबर तक अपनी याचिका दाखिल करेंगी, तो उसके बाद विद्युत नियामक आयोग (UPERC) इसकी तकनीकी जांच करेगा। आयोग कंपनियों के दावों पर आपत्तियां मांगने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करता है और राज्य भर में जनसुनवाई आयोजित करता है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का स्पष्ट तर्क रहा है कि पूर्ववर्ती वर्षों के वित्तीय समायोजन (ट्रू-अप) के आधार पर बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का अधिशेष (सरप्लस) जमा है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों की मांग है कि दरों में बढ़ोतरी के बजाय यूनिट दरों में कटौती की जानी चाहिए।
नियामक आयोग जनसुनवाई और कंपनियों के वास्तविक खर्चों की गहन ऑडिट के बाद ही अंतिम टैरिफ आदेश (Tariff Order) जारी करता है, जो सभी कानूनी प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद ही लागू होता है।
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