
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने समय से काफी पहले अपनी रणनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नई दिल्ली स्थित आवास पर हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की एक उच्चस्तरीय मैराथन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता इमरान मसूद समेत प्रदेश की सर्वे टीम के प्रमुख सदस्य शामिल रहे।
बैठक का मुख्य एजेंडा समाजवादी पार्टी के साथ आगामी गठबंधन में सीटों के तालमेल और कांग्रेस के संगठन की वास्तविक जमीनी ताकत का आकलन करना रहा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रियंका गांधी ने साफ निर्देश दिया है कि इस बार कांग्रेस महज ‘जूनियर पार्टनर’ बनकर औपचारिकता की राजनीति नहीं करेगी, बल्कि ठोस होमवर्क और अंदरूनी सर्वे के आधार पर सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग रखेगी।
कितनी सीटों पर दावेदारी ठोक रही है कांग्रेस? 125 से 150 सीटों की सूची तैयार
लोकसभा चुनाव में मिले आत्मविश्वास के बाद प्रदेश कांग्रेस इकाई ने उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान की है जहां पार्टी का पारंपरिक वोटबैंक (मुस्लिम, दलित और सवर्ण/ब्राह्मण) मजबूत स्थिति में है।
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शुरुआती मांग: कांग्रेस ने आंतरिक सर्वे के आधार पर करीब 125 से 150 विधानसभा सीटों का एक व्यापक खाका तैयार किया है।
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सपा को सौंपी जाने वाली लिस्ट: पार्टी नेतृत्व ने इनमें से लगभग 125 से 130 मजबूत सीटों की प्रारंभिक सूची सपा प्रमुख अखिलेश यादव के विचारार्थ तैयार की है, जिसमें बुंदेलखंड, तराई, अवध और पश्चिमी यूपी की वे सीटें शामिल हैं जहां कांग्रेस का कैडर सक्रिय रहा है।
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दबाव की रणनीति: हालांकि पार्टी के कई आक्रामक नेता सार्वजनिक तौर पर 150 से 200 सीटों तक की मांग उठा रहे हैं, लेकिन आलाकमान जानता है कि गठबंधन की टेबल पर शुरुआती मांग बड़ी रखकर ही एक मजबूत आंकड़ा हासिल किया जा सकता है।
क्या है अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का रुख?
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गठबंधन को जारी रखने के पक्षधर तो हैं, लेकिन वे सीटों की बंदरबांट पर बेहद सतर्क हैं। सपा नेतृत्व का मानना है कि:
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विनेबिलिटी (जीतने की क्षमता) ही एकमात्र पैमाना: अखिलेश यादव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सीट बंटवारे का आधार सिर्फ ‘विनेबिलिटी’ होगा। जहां जिस पार्टी का उम्मीदवार मजबूत होगा, वही चुनाव लड़ेगा।
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उम्मीदवारों के नाम मांगे: सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की 125-130 सीटों की मांग पर सपा ने कांग्रेस से उन सभी सीटों पर मजबूत और संभावित प्रत्याशियों के नाम मांगे हैं। सपा का तर्क है कि बिना मजबूत चेहरे के सिर्फ सीट लेने से भाजपा को वॉकओवर मिल जाएगा।
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सपा 340+ सीटों पर लड़ने की इच्छुक: सपा 403 में से कम से कम 340 से 350 सीटों पर अपनी साइकिल के सिंबल पर उतरना चाहती है, क्योंकि उसका मानना है कि उसका कोर वोटबैंक तभी पूरी तरह सक्रिय होता है।
तो आखिर कितनी सीटों पर बन सकती है दोनों दलों के बीच सहमति?
राजनीतिक विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस और सपा दोनों ही मोलभाव (Bargaining) के शुरुआती दौर में हैं:
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सपा खेमा कांग्रेस को 40 से 50 सीटें देने का मन बना रहा है।
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वहीं, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व कम से कम 60 से 75 सीटों के सम्मानजनक आंकड़े पर अड़ा रहेगा।
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अंतिम सहमति संभवतः 55 से 70 सीटों के बीच बन सकती है, जिसमें कांग्रेस के मौजूदा विधायकों की सीटें, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बढ़त वाली विधानसभाएं और कुछ शहरी सीटें शामिल होंगी।
दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण समीकरण साधने में जुटी कांग्रेस
प्रियंका गांधी के साथ हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि कांग्रेस संगठन को केवल सपा के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम दलित बस्तियों और वंचित वर्गों के बीच लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं, जबकि इमरान मसूद के जरिए पश्चिमी यूपी के अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधा जा रहा है। कांग्रेस 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, जिसके लिए यूपी के कई जिलों से कार्यकर्ताओं के जत्थे कूच करेंगे।
सपा के साथ स्वामी प्रसाद मौर्य की बयानबाजी और सीटों के इस नए फॉर्मूले के बीच प्रियंका गांधी की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी मौजूदगी को मजबूती से दर्ज कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ने वाली।
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