
दिवाली और लोक आस्था के महापर्व छठ पर अपने घरों को लौटने वाले लाखों प्रवासी कामगारों और परिवारों के सामने यात्रा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली सभी प्रमुख नियमित ट्रेनों—जैसे बिहार संपर्क क्रांति, संपूर्ण क्रांति, मगध एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस और विक्रमशिला एक्सप्रेस—में स्लीपर और एसी श्रेणियों में सीटें महीनों पहले ही भर चुकी हैं। वर्तमान में अधिकांश ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 200 से 350 के पार जा चुकी है, जबकि दर्जनों ट्रेनों में रेलवे ने ‘रिग्रेट’ (बुकिंग बंद) घोषित कर दिया है। तत्काल और प्रीमियम तत्काल का कोटा खुलते ही महज 30 से 60 सेकंड के भीतर गायब हो रहा है, जिससे आम नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कन्फर्म सीट पाना लगभग असंभव हो चुका है।
हवाई टिकटों में ‘आसमानी लूट’: पटना और दरभंगा का किराया बैंकॉक-दुबई से भी महंगा
ट्रेनों में सीट न मिलने पर जिन यात्रियों ने फ्लाइट्स का रुख किया, उनके होश हवाई कंपनियों की डायनामिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) देखकर उड़ गए हैं।
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दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से पटना, दरभंगा, गोरखपुर और वाराणसी के लिए एक तरफ का सामान्य इकोनॉमी क्लास का किराया 20,000 रुपये से लेकर 31,000 रुपये तक पहुंच गया है।
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मुंबई से पटना के सामान्य दिनों में 5,000 से 7,000 रुपये में मिलने वाले टिकट इस समय 25,000 से 28,000 रुपये के पार बिक रहे हैं।
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दरभंगा एयरपोर्ट के लिए सीमित उड़ानों के चलते कई तारीखों पर सीटें पूरी तरह सोल्ड आउट हैं।
यात्रियों और व्यापारी संगठनों का कहना है कि इतने किराए में व्यक्ति दुबई या बैंकॉक घूमकर आ सकता है, लेकिन अपने ही देश में त्योहार पर घर जाने के लिए एयरलाइंस द्वारा 300 से 400 प्रतिशत तक की मनमानी वसूली की जा रही है। कई रूट्स पर अचानक फ्लाइट्स कैंसिल होने से यात्रियों की मुसीबत और बढ़ गई है।
प्राइवेट बस ऑपरेटरों की चांदी, 800 रुपये का किराया 3,500 से 5,000 रुपये पहुंचा
रेल और हवाई सेवा दोनों से निराश यात्रियों के पास सड़क मार्ग यानी लंबी दूरी की इंटरसिटी बसों का ही सहारा बचा है। इसका फायदा उठाकर प्राइवेट ट्रैवल्स और स्लीपर बस ऑपरेटर खुलेआम यात्रियों की जेब काट रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर और पटना जाने वाली प्राइवेट स्लीपर बसों का सामान्य किराया जहां 800 से 1,200 रुपये होता था, वह अब 3,000 से 5,000 रुपये तक वसूला जा रहा है। आनंद विहार, कश्मीरी गेट और सराय काले खां बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा अतिरिक्त बसें चलाए जाने के बावजूद भारी मांग के आगे सरकारी संसाधन भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
रेलवे ने झोंकी 7,000 से अधिक स्पेशल ट्रेनें, स्टेशनों पर बनाए गए होल्डिंग एरिया
त्योहारी भीड़ के अभूतपूर्व दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने इस बार रिकॉर्ड संख्या में विशेष ट्रेनें चलाने का दावा किया है। रेलवे बोर्ड के अनुसार, देश भर के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से पूर्वी भारत के लिए हजारों फेरे वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें, क्लोन ट्रेनें और अनरिजर्व्ड गाड़ियां चलाई जा रही हैं।
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भीड़ नियंत्रण के उपाय: नई दिल्ली, आनंद विहार, मुंबई सेंट्रल, सूरत और पटना जंक्शन जैसे संवेदनशील स्टेशनों पर भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टेशन परिसर के बाहर बड़े शामियाने लगाकर ‘पैसेंजर होल्डिंग एरिया’ बनाए गए हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था: आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं ताकि जनरल कोचों में चढ़ने के दौरान भगदड़ की स्थिति न बने और यात्रियों को कतारबद्ध तरीके से डिब्बों में बैठाया जा सके।
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प्लेटफॉर्म टिकट पर रोक: कई बड़े स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ रोकने के लिए प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।
त्योहार के बाद की वापसी (Return Rush) की चिंता ने अभी से बढ़ाई बेचैनी
यात्रियों के लिए परेशानी केवल घर पहुंचने तक सीमित नहीं है। छठ पूजा के अंतिम अर्घ्य के बाद महानगरों में वापस ड्यूटी पर लौटने के लिए भी ट्रेनों और उड़ानों में यही स्थिति बनी हुई है। प्रवासी परिवारों का कहना है कि हर साल पर्व के मौके पर अतिरिक्त गाड़ियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यही रहती है कि लाखों आम नागरिकों को बाथरूम के पास फर्श पर बैठकर या दरवाजों पर लटककर 24 से 36 घंटे का कष्टदायी सफर तय करना पड़ता है। आम जनता ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय (DGCA) और परिवहन विभागों से मांग की है कि त्योहारों के संवेदनशील समय पर हवाई टिकटों और निजी बसों के किराए की अधिकतम सीमा (Fare Cap) तय की जाए ताकि त्योहार पर घर जाने की मजबूरी किसी शोषण का जरिया न बने।
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