कोच्चि |केरल विधानसभा चुनाव 2026 के शोर के बीच एक पुरानी चुनावी जंग ने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। आरएसएस (RSS) समर्थक संगठन ‘हिंदू ऐक्य वेदी’ के प्रदेश अध्यक्ष आर.वी. बाबू ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाबू का दावा है कि सतीशन ने साल 2001 और 2006 के चुनावों में जीत हासिल करने के लिए संघ के दरवाजे खटखटाए थे और समर्थन की गुहार लगाई थी। इस खुलासे के बाद यूडीएफ (UDF) और एलडीएफ (LDF) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
“झूठ कौन बोल रहा है?” सतीशन के पुराने दौरों पर घेराबंदी
हिंदू ऐक्य वेदी के नेता आर.वी. बाबू ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में सतीशन की घेराबंदी करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने पहले 2006 में आरएसएस के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया था, लेकिन अब उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि वे वहां गए थे। बाबू ने तीखा सवाल दागते हुए कहा, “जब वह कार्यक्रम में जाने की बात मान चुके हैं, तो उन्हें भविष्य में यह भी स्वीकार करना होगा कि 2001 और 2006 में उन्होंने जीत के लिए संघ की मदद मांगी थी।” बाबू का कहना है कि 1996 में सीपीआई के पी. राजू से करारी हार मिलने के बाद सतीशन ने अपनी रणनीति बदली थी।
सतीशन का पलटवार: “बाबू मेरी हार चाहते हैं, यही मेरा प्रमाण है”
इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वी.डी. सतीशन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। सतीशन ने पत्रकारों से कहा, “बाबू खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वे चाहते हैं कि मैं चुनाव हार जाऊं। यह बयान ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि मेरा भाजपा या आरएसएस के साथ कभी कोई समझौता नहीं रहा।” उन्होंने दावा किया कि बाबू व्यक्तिगत रंजिश के कारण ऐसे बयान दे रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने उनके खिलाफ पहले कुछ सख्त टिप्पणियां की थीं। सतीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी आरएसएस या भाजपा के वोट नहीं मांगे।
केरल चुनाव में नया मोड़: RSS-CPIM सांठगांठ का आरोप
अपनी सफाई देने के साथ ही सतीशन ने पलटवार करते हुए सीपीआई(एम) और आरएसएस के बीच ‘गुपचुप सांठगांठ’ होने के अपने पुराने आरोपों को फिर हवा दे दी है। उन्होंने वामपंथी दल (LDF) को घेरते हुए सवाल उठाया कि पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) जैसे संगठनों का समर्थन लेने वाली सीपीआई(एम) क्या खुद को धर्मनिरपेक्ष कह सकती है? सतीशन ने बाबू के दावों को चुनाव से पहले ध्रुवीकरण करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
एक ही सिक्के के दो पहलू: संघ नेता का हमला
आर.वी. बाबू ने केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि वामपंथियों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि केरल में यूडीएफ और एलडीएफ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। संघ परिवार के नेता के इस रुख ने केरल के चुनावी त्रिकोण को और दिलचस्प बना दिया है, जहां भाजपा अपनी जमीन तलाश रही है और कांग्रेस व लेफ्ट एक-दूसरे पर ‘सांप्रदायिक ताकतों’ से हाथ मिलाने का आरोप लगा रहे हैं।
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