International Jat Sammelan Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जाट सम्मेलन ने अपनी कट्टर सामाजिक नियमावली और बड़े फैसलों से पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। सकौती टांडा के हितकारी किसान इंटर कॉलेज में आयोजित इस भव्य समारोह में हिंदू हृदय सम्राट महाराजा सूरजमल की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी में समाज की बेहतरी और कुरीतियों को दूर करने के नाम पर 11 अहम प्रस्ताव पारित किए गए। हालांकि, इन प्रस्तावों में अंतरजातीय विवाह पर रोक और शादी की उम्र सीमा तय करने जैसे फैसलों ने नई बहस छेड़ दी है।
शादी की उम्र और इंटरकास्ट मैरिज पर सख्त रुख
सम्मेलन में जाट सरदारी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया कि समाज के बच्चों की शादियां 23 से 25 साल की उम्र तक हर हाल में कर दी जानी चाहिए। इसके पीछे तर्क दिया गया कि सही समय पर विवाह होने से पारिवारिक स्थिरता बनी रहती है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला फैसला ‘अंतरजातीय विवाह (Inter-caste Marriage)’ को लेकर रहा। सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि समाज के युवाओं को अंतरजातीय विवाह से पूरी तरह बचना चाहिए और इस पर ‘पूर्ण विराम’ लगाया जाना चाहिए। समाज के बुजुर्गों का मानना है कि इससे जातीय शुद्धता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी।
आरक्षण और भारत रत्न की हुंकार
समारोह के मंच से राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की भी मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। जाट प्रतिनिधियों ने मांग की कि ‘रहबरे आजम’ सर चौधरी छोटूराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा जाए। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत उन राज्यों में जहां जाटों को ओबीसी (OBC) श्रेणी में आरक्षण नहीं मिल रहा है, वहां एकजुट होकर संघर्ष करने और आरक्षण दिलाने का संकल्प लिया गया। समाज ने यह भी मांग की कि सीबीएसई और एनसीईआरटी के पाठ्यक्रमों में जाट महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास को शामिल किया जाए।
प्रतिमा के फाउंडेशन से ‘जाट’ शब्द हटाने पर भारी बवाल
समारोह के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब युवाओं ने देखा कि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के फाउंडेशन से ‘जाट’ शब्द हटा दिया गया है। इसे लेकर जाट युवाओं ने जमकर हंगामा किया और पुलिस प्रशासन के साथ तीखी धक्का-मुक्की हुई। युवा प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और दोबारा शब्द लिखने की मांग करने लगे। माहौल बिगड़ता देख प्रशासन के आला अधिकारियों ने 15 दिन का समय मांगा, जिसके बाद किसी तरह धरना समाप्त हुआ।
नशा मुक्ति और तकनीक पर जोर
विवादास्पद फैसलों के इतर, सम्मेलन में कुछ सकारात्मक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। प्रस्ताव में कहा गया कि जाट समाज को ‘नशा मुक्त’ बनाने के लिए गांव-गांव अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर टेक्निकल एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार (Startup) की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, गोत्रवाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर पूरी दुनिया के जाटों को एक सूत्र में पिरोने की बात कही गई।
लंगर में गैस की किल्लत, लकड़ी पर बना खाना
इस विशाल आयोजन में हजारों लोगों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े आयोजन में गैस सिलेंडरों की किल्लत हो गई। मजबूरी में हलवाइयों को कोयले और लकड़ी की भट्ठियों पर खाना तैयार करना पड़ा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि भारी भीड़ के कारण संसाधनों की कमी हुई, लेकिन परंपरा के अनुसार किसी भी आगंतुक को भूखा नहीं जाने दिया गया।
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