3 अप्रैल, 2026: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह ठप कर दिया है। इस वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए गुरुवार को भारत समेत 60 से अधिक देशों ने एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक की। इस बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) शामिल नहीं हुआ, और दुनिया के कई देशों ने अब इस संकट के समाधान के लिए वॉशिंगटन के बजाय कूटनीतिक ‘प्लान बी’ पर काम करना शुरू कर दिया है।
क्या है ‘प्लान बी’ और अमेरिका से दूरी क्यों?
ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेटे कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सैन्य हस्तक्षेप के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक रास्तों से होर्मुज जलमार्ग को फिर से खुलवाना है।
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अमेरिका की अनुपस्थिति: बैठक में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का शामिल न होना दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यूरोपीय और एशियाई सहयोगियों को डर है कि राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज को फिर से खोलने के बजाय केवल अपने सैन्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
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यूरोपीय देशों का विद्रोह: पहली बार स्पेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों ने खुलकर ट्रंप की सैन्य आक्रामकता का विरोध किया है। इन देशों ने अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
होर्मुज का संकट: 2,000 जहाज फंसे, तेल सप्लाई ठप
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस की 20% सप्लाई होती है।
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विनाशकारी प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, इस मार्ग के दोनों ओर लगभग 2,000 जहाज फंसे हुए हैं। सामान्य दिनों में जहाँ यहाँ से रोज 100 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर 3-4 रह गई है।
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ऊर्जा संकट: सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे निर्यातकों के रास्ते बंद होने से दुनिया भर में बिजली कटौती और ईंधन की भारी किल्लत शुरू हो गई है।
[Image showing the strategic location of Strait of Hormuz and blocked shipping lanes]
भारत की स्थिति: संकट के बीच ‘मित्र देश’ की राहत
भारत के लिए इस तनावपूर्ण माहौल में एक आंशिक राहत की खबर आई है। ईरान ने भारत को उन चुनिंदा ‘मित्र देशों’ (चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के साथ) की सूची में रखा है, जिन्हें इस जलमार्ग से सशर्त गुजरने की अनुमति दी गई है।
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भारतीय जहाजों की आवाजाही: हाल ही में 6 भारतीय जहाजों ने सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार किया है। भारत वर्तमान में अपने 18 अन्य जहाजों की करीब से निगरानी कर रहा है।
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टोल टैक्स का मुद्दा: ईरान इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों पर ‘ट्रांजिट शुल्क’ या टोल लगाने पर विचार कर रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस संबंध में किसी भी भुगतान की बातचीत में शामिल नहीं है। अमेरिका ने ईरान के इस कदम को ‘अवैध और खतरनाक’ बताया है।
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कूटनीति पर जोर: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नेविगेशन की स्वतंत्रता की वकालत की और मर्चेंट जहाजों पर हमलों में नाविकों की जान जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की।
आगे का रास्ता: नौसैनिक बेड़े और UN की मध्यस्थता
अगले सप्ताह इन 60 देशों के सैन्य अधिकारी फिर से बैठक करेंगे। इसमें इस बात पर विचार होगा कि ईरान की सहमति के बिना या सहमति के साथ, बारूदी सुरंगों को हटाने और जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गलियारा (Maritime Corridor) कैसे बनाया जा सकता है। जापान और कनाडा जैसे देश संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता के जरिए शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में हैं।
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