ट्रंप की धमकी के बीच जयशंकर को आया ईरान से कॉल: होर्मुज संकट और तेल सप्लाई पर हुई ‘सीक्रेट’ बात, मिडिल ईस्ट में मचे हड़कंप के बीच भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के गहराते बादलों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विनाशकारी चेतावनी के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अचानक एक्शन मोड में आ गए हैं। रविवार को जयशंकर के पास ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया, जिसमें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी और क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहन चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए उसके पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की धमकी दी है।

ईरान, कतर और UAE से जयशंकर की मैराथन बातचीत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण खिलाड़ियों—कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर लंबी चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ मौजूदा स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत की मुख्य चिंता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) और तेल की कीमतों में लगी आग को बुझाना है।

ट्रंप का अल्टीमेटम और भारत की ‘ईंधन सुरक्षा’

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर देगा। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए मंगाता है, इसलिए होर्मुज की नाकेबंदी भारत की ‘ईंधन और उर्वरक सुरक्षा’ (Fuel and Fertilizer Security) के लिए सीधा खतरा है। ईरान ने पहले ही संकेत दिया है कि वह भारत जैसे ‘मित्र देशों’ के जहाजों को रास्ता देने के पक्ष में है, जैसा कि हाल ही में भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ के सुरक्षित निकलने से साबित हुआ।

शांति और निर्बाध आपूर्ति के लिए भारत की ‘शटल डिप्लोमेसी’

भारत पिछले कई हफ्तों से पर्दे के पीछे रहकर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है ताकि युद्ध को टाला जा सके और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो। जयशंकर की इन फोन कॉल्स का मकसद मिडिल ईस्ट के देशों के साथ तालमेल बिठाकर एक ऐसा रास्ता निकालना है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाया जा सके। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने भी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर सहमति बनाने की कोशिश की गई है। भारत का रुख साफ है—संघर्ष तुरंत समाप्त हो और होर्मुज जैसा रणनीतिक मार्ग किसी भी कीमत पर बंद न हो।

Check Also

‘युद्ध का कोई सैन्य हल नहीं, सिर्फ एक ही रास्ता’: ईरान ने अमेरिका को दिया सीधा संदेश, होर्मुज पर कड़ा रुख

मध्य पूर्व में बढ़ते भीषण तनाव और अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने वाशिंगटन को …