हॉर्मुज में फंसा ‘ड्रैगन’ का करोड़ों का माल: अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद भी चीन के विशाल टैंकरों को रास्ता नहीं

बीजिंग/दुबई। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद पूरी दुनिया की नजरें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं। लेकिन जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। चीन, जो खुद को ईरान का करीबी सहयोगी मानता है, उसके दो विशाल तेल टैंकर— ‘कॉस्पियरल लेक’ (Cospearl Lake) और ‘हे रोंग हाई’ (He Rong Hai)— करोड़ों के कच्चे तेल के साथ हॉर्मुज के मुहाने पर फंसे हुए हैं। सीजफायर के बावजूद ईरान ने अभी तक इस रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह खोलने का संकेत नहीं दिया है।


चीनी जहाजों की ‘अग्निपरीक्षा’: ट्रैकिंग डेटा क्या कहता है?

शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, गुरुवार सुबह चीन के इन दोनों जहाजों ने अपनी गति बढ़ाई थी, लेकिन हॉर्मुज के पास पहुँचते ही इन्हें फिर से रुकना पड़ा।

  • सुरक्षा सिग्नल: दोनों जहाज अपने ट्रैकिंग सिस्टम पर ‘चीनी मालिक’ (Chinese Owner) का स्पष्ट सिग्नल दे रहे हैं। यह एक कूटनीतिक संदेश है ताकि ईरानी सेना इन्हें निशाना न बनाए।

  • कार्गो का महत्व: ‘कॉस्पियरल लेक’ में इराक का 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जबकि ‘हे रोंग हाई’ में सऊदी अरब का 20 लाख बैरल तेल लदा है। ईरान इराक को अपना ‘भाई’ मानता है, इसके बावजूद ड्रैगन के जहाज को हरी झंडी नहीं मिली है।

ट्रंप बनाम ईरान: कौन कंट्रोल कर रहा है हॉर्मुज?

सीजफायर समझौते की शर्तों को लेकर गहरा असमंजस बना हुआ है:

  • ट्रंप का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि हॉर्मुज को ‘तत्काल और सुरक्षित’ रूप से खोल दिया गया है।

  • ईरान की हकीकत: ईरान के रेडियो प्रसारणों में जहाजों को सूचित किया जा रहा है कि जलमार्ग अभी भी बंद है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि यातायात उसके सशस्त्र बलों (Armed Forces) के पर्यवेक्षण और उसके द्वारा निर्धारित ‘सुरक्षित मार्गों’ से ही संभव होगा।


हॉर्मुज के बाहर जहाजों का ‘बेड़ा’: भारत और सऊदी भी कतार में

केवल चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के जहाज भी हॉर्मुज के बाहर जमा हो रहे हैं:

  1. भारत: भारतीय ध्वज वाला ‘देश विभोर’ जहाज कच्चे तेल से लदा हुआ रास अल खैमाह के तट पर खड़ा है। यह जहाज ‘भारत सरकार के चालक दल’ का सिग्नल दे रहा है।

  2. सऊदी अरब: सऊदी अरब का विशाल टैंकर ‘जहम’ (Jahm) भी दुबई के पास होल्डिंग क्षेत्र में इंतजार कर रहा है।

  3. जापान: जापानी शिपिंग दिग्गज ‘मित्सुई ओएसके लाइन्स’ ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक अपने जहाज नहीं भेजेंगे जब तक ‘टिकाऊ स्थिरता’ (Sustainable Stability) सुनिश्चित न हो जाए।

[Image Concept: Two massive Chinese oil tankers anchored in blue waters with the Iranian coastline in the background and a digital map showing the narrow Strait of Hormuz]


चीन की ‘कूटनीतिक बेबसी’ या रणनीति?

चीन ने पिछले महीने अपने दो कंटेनर जहाजों को निकालने के लिए ईरान के साथ ‘विशेष कूटनीतिक मदद’ ली थी। लेकिन अब, जब अमेरिका के साथ सीजफायर हो चुका है, चीन के ‘कोस्को शिपिंग’ (COSCO) जैसे दिग्गजों का फंसना यह दर्शाता है कि ईरान हॉर्मुज पर अपनी पकड़ ढीली करने के मूड में नहीं है। वह इस जलमार्ग को एक सौदेबाजी के चिप (Bargaining Chip) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

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