मुंबई/उदयपुर डेस्क। मशहूर फिल्ममेकर विक्रम भट्ट इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे काले अध्याय और उससे मिले आध्यात्मिक अनुभव को लेकर चर्चा में हैं। धोखाधड़ी के एक मामले में उदयपुर सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे हफ्तों गुजारने के बाद, अब बेल पर बाहर आए विक्रम ने जेल की उन खौफनाक रातों का जिक्र किया है, जिसने उनकी रूह कंपा दी थी। सोशल मीडिया पर एक भावुक और प्रेरणादायक पोस्ट साझा करते हुए विक्रम ने बताया कि कैसे मौत को करीब देख उन्होंने ‘पावर ऑफ प्रेयर’ यानी प्रार्थना की शक्ति का अनुभव किया।
कड़कड़ाती ठंड और चार कंबलों में भी कांपता शरीर
विक्रम भट्ट ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए लिखा कि यह जनवरी के मध्य की बात है। बैरक नंबर 10 की उस सर्द रात में उनके पास घड़ी तो नहीं थी, लेकिन अचानक उनकी नींद खुली और पूरा शरीर बुरी तरह थरथराने लगा। विक्रम को इतना तेज बुखार था कि उनका बदन आग की तरह तप रहा था। जेल में मौजूद कैदियों ने उन पर चार-चार कंबल डाल दिए, लेकिन कड़कड़ाती ठंड और तेज बुखार के आगे सब बेअसर था। उन्होंने एक पैरासिटामोल ली, पर हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती गई।
जेल अस्पताल की लापरवाही: ‘थर्मामीटर तक नहीं था’
फिल्ममेकर ने सिस्टम की लाचारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जब सुबह उन्हें जेल के अस्पताल ले जाया गया, तो वहां तापमान मापने के लिए थर्मामीटर तक मौजूद नहीं था। अटेंडेंट ने सिर्फ ऑक्सीजन लेवल चेक किया और उन्हें ‘ठीक’ बताकर वापस भेज दिया। विक्रम ने डॉक्टर से गुहार लगाई, डॉक्टर ने उन्हें बाहर के अस्पताल रेफर करने का नोट भी लिखा, लेकिन पुलिस बल की कमी का बहाना बनाकर उन्हें जेल से बाहर नहीं ले जाया गया। कभी वीआईपी सुरक्षा तो कभी मेलों की व्यस्तता के कारण एक बीमार इंसान को तड़पने के लिए छोड़ दिया गया।
जब देवी मां की तस्वीर के सामने टेक दिए घुटने
जब मदद की सारी उम्मीदें टूट गईं, तो विक्रम भट्ट ने अध्यात्म का सहारा लिया। उन्होंने बताया, “बैरक में देवी मां की एक बड़ी पेंटिंग थी। मैंने तेल-नमक खाना छोड़ दिया और मां के सामने बैठकर बस एक ही विनती की—’अगर आप हैं, तो चमत्कार दिखाइए। मैं यहां मरना नहीं चाहता, मेरे बच्चों, पत्नी और 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है’।” विक्रम के अनुसार, उन्होंने लगातार कई दिनों तक प्रार्थना की और धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार होने लगा। उनके वकील जब उनसे मिलने पहुंचे, तो विक्रम की आंखों में मौत का डर था, लेकिन प्रार्थना ने उन्हें जीवनदान दिया।
15 दिन बाद मिला इलाज, मां को कहा शुक्रिया
चमत्कार ऐसा हुआ कि बिना किसी बाहरी डॉक्टरी मदद के विक्रम का बुखार और शरीर का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा। जिस पुलिस ने उन्हें 15 दिनों तक अस्पताल ले जाने से मना किया था, वह अचानक एक सुबह आई और उन्हें चेकअप के लिए लेकर गई। विक्रम इसे देवी मां की कृपा मानते हैं और कहते हैं कि उस कठिन समय ने उन्हें ईश्वर पर अटूट विश्वास करना सिखा दिया।
क्या था पूरा मामला?
बता दें कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को उदयपुर के एक बिजनेसमैन के साथ ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में कुल 8 लोग आरोपी थे। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। फिलहाल विक्रम अपनी आपबीती के जरिए जेल के सिस्टम और प्रार्थना की ताकत को दुनिया के सामने रख रहे हैं।
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