अयोध्या: रामलला के दरबार में पास धारकों के लिए बढ़ा ‘सप्त मंडपम’ का इंतजार, जानें क्या है इसकी बड़ी वजह

Ayodhya Ram Mandir Update: अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्थाओं में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। 13 अप्रैल से राम जन्मभूमि परिसर के सभी मंदिरों को आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन ‘सुगम’ और ‘विशिष्ट’ पास धारकों के लिए एक नई पहेली खड़ी हो गई है। दरअसल, विशेष पास होने के बावजूद इन श्रद्धालुओं को शेषावतार, सप्त मंडपम और कुबेर नवरत्न टीला के दर्शन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

पुराना सॉफ्टवेयर बना बाधा, पास पर नहीं मिल रही नई एंट्री

अयोध्या से मिल रही ताजा जानकारी के मुताबिक, सुगम और विशिष्ट पास धारकों के लिए अभी तक किसी नए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। पुराने सॉफ्टवेयर से जारी हो रहे पास पर केवल ‘रामलला एवं राम परिवार दर्शन’ ही अंकित है। यही कारण है कि इन पास धारकों को परकोटे के सभी छह मंदिरों में जाने की ऐच्छिक अनुमति तो मिल गई है, लेकिन शेषावतार और सप्त मंडपम जैसे विशेष स्थलों के लिए न तो कोई स्पष्ट रास्ता निर्धारित किया गया है और न ही आधिकारिक अनुमति।

केवल VVIPs के लिए ही खुली है ‘विशेष राह’

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, शेषावतार मंदिर तक पहुंचना अभी आम पास धारकों के लिए आसान नहीं है। जिन अति-विशिष्ट मेहमानों को ट्रस्ट से विशेष अनुमति मिलती है, उन्हें ट्रस्ट के कार्यकर्ता गोल्फ कार्ट के जरिए मंदिर के पश्चिमी रास्ते से ले जाकर दर्शन कराते हैं। शेष श्रद्धालुओं, चाहे उनके पास सुगम या विशिष्ट पास ही क्यों न हो, उन्हें फिलहाल इस सुविधा से वंचित रखा गया है।

ऑनलाइन पास की मारामारी और ‘रेफरल’ का खेल

अयोध्या में सुगम और विशिष्ट दर्शन पास की सुविधा वैसे तो ऑनलाइन उपलब्ध है, लेकिन इनकी संख्या बहुत सीमित है। अधिकांश पास ‘रेफरल’ श्रेणी में आते हैं, जिनके लिए ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी की संस्तुति अनिवार्य होती है। इन पासों पर पदाधिकारी की आईडी का विशेष कोड अंकित होता है। वहीं दूसरी ओर, ‘सामान्य दर्शन पास’ के लिए एक अलग सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे श्रद्धालु 15 दिन पहले ही वेबसाइट से जनरेट कर सकते हैं।

सामान्य पास धारकों के लिए क्या है नियम?

सामान्य पास धारकों को आद्य गुरु रामानंदाचार्य प्रवेश द्वार से प्रवेश की अनुमति है। रामलला और राम परिवार के दर्शन के बाद, जब ये श्रद्धालु दक्षिण द्वार से परकोटे के बाहर आते हैं, तब उन्हें दाहिने रास्ते से शेषावतार मंदिर, सप्त मंडपम और कुबेरेश्वर महादेव के दर्शन की इजाजत दी जाती है। हालांकि, उन्हें परकोटे के भीतर बने मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं है। बिना पास वाले श्रद्धालुओं को मुख्य दर्शन के बाद सीधे निकास द्वार की ओर भेज दिया जाता है।

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