लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) के जूनियर इंजीनियरों के लिए लखनऊ हाईकोर्ट से एक बहुत बड़ी और सुखद खबर आई है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को तगड़ा झटका देते हुए सरकार द्वारा दाखिल की गई 11 विशेष अपीलों को एक साथ खारिज कर दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले से उन सैकड़ों इंजीनियरों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ पाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जो दशकों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
क्या है पूरा मामला? 1984 से 2001 तक का सफर
यह कानूनी विवाद जूनियर इंजीनियरों के विनियमितीकरण (Regularization) की तारीख को लेकर था।
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नियुक्ति: ये जूनियर इंजीनियर 1984 से 1989 के बीच पीडब्ल्यूडी में डेली वेजेज (दैनिक भोगी) या वर्क चार्ज कर्मचारी के रूप में नियुक्त हुए थे।
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विवाद: सरकार इन्हें साल 2006 से विनियमित मान रही थी, जबकि इंजीनियरों की मांग थी कि उन्हें 2001 से विनियमित माना जाए।
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एकल पीठ का फैसला: 9 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इंजीनियरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें साल 2001 से विनियमित करने का आदेश दिया था। 2001 से नियमित माने जाने का सीधा मतलब यह है कि ये कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) के दायरे में आ जाएंगे।
सरकार की ‘सुस्ती’ पड़ी भारी, खंडपीठ ने लगाई फटकार
राज्य सरकार ने एकल पीठ के इस आदेश को दो जजों की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सरकार की इन 11 अपीलों पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि ये अपीलें तय समय सीमा के बाद (93 से 195 दिन की देरी से) दाखिल की गई थीं।
अदालत ने सरकार द्वारा देरी के लिए दिए गए तर्कों—जैसे फाइलों का मूवमेंट, विभागीय प्रक्रिया और विधानसभा सत्र—को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा:
“प्रशासनिक सुस्ती और सरकारी फाइलों के इधर-उधर घूमने को देरी का उचित कारण नहीं माना जा सकता। सरकार के पास पर्याप्त संसाधन हैं, फिर भी ऐसी देरी न्याय व्यवस्था में अनिश्चितता पैदा करती है।”
इंजीनियरों को क्या होगा फायदा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जूनियर इंजीनियरों को निम्नलिखित बड़े लाभ मिलना तय हैं:
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पुरानी पेंशन (OPS): चूंकि अब इन्हें 2001 से नियमित माना जाएगा, इसलिए ये 2005 के बाद लागू हुई नई पेंशन योजना (NPS) के बजाय पुरानी पेंशन के हकदार होंगे।
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एरियर और भत्ते: 2001 से 2006 के बीच की अवधि के वेतन अंतर और अन्य भत्तों का लाभ भी मिल सकेगा।
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वरिष्ठता: सेवा रिकॉर्ड में वरिष्ठता (Seniority) का लाभ मिलेगा, जो पदोन्नति (Promotion) में सहायक होगा।
न्याय व्यवस्था में नजीर बनेगा यह फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि देरी माफी (Condonation of Delay) के आवेदन पर विचार करते समय सरकारी विभागों को कोई विशेष छूट नहीं दी जा सकती। यदि विभाग की सुस्ती को स्वीकार किया गया, तो यह आम वादियों के अधिकारों का हनन होगा। इस आदेश के साथ ही सभी विलंब माफी प्रार्थना पत्र और 11 विशेष अपीलें स्वतः निरस्त हो गईं, जिससे इंजीनियरों की वर्षों की तपस्या सफल हुई है।
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