ईरान से बड़ी खबर: मौत के मुंह से लौटे सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई! चेहरा झुलसा, पैर कटा; अब प्लास्टिक सर्जरी का सहारा

तेहरान/न्यूयॉर्क | ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों में मोजतबा केवल घायल ही नहीं हुए, बल्कि उनकी स्थिति अब भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा न तो ठीक से बोल पा रहे हैं और न ही कुछ खा पाने की स्थिति में हैं।

भीषण हमलों में झुलसा चेहरा, बोल पाने में भी असमर्थ

ईरानी अधिकारियों के हवाले से किए गए दावों के अनुसार, हमलों के दौरान मोजतबा खामेनेई का चेहरा और होंठ बुरी तरह झुलस गए थे। जख्म इतने गहरे हैं कि उन्हें शब्दों के उच्चारण में भारी दिक्कत हो रही है। डॉक्टरों का मानना है कि उनकी सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए चेहरे की जटिल प्लास्टिक सर्जरी करनी होगी। फिलहाल वह एक विशेष मेडिकल टीम की कड़ी निगरानी में हैं, जहां उनके खाने-पीने का प्रबंधन भी कृत्रिम माध्यमों से किया जा रहा है।

तीन बार हो चुकी है सर्जरी, लगेगा प्रोस्थेटिक पैर

हमलों का असर मोजतबा के शरीर पर काफी गहरा पड़ा है। रिपोर्ट की मानें तो उनकी एक टांग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी अब तक तीन बार सर्जरी की जा चुकी है। अब उन्हें सामान्य रूप से चलने-फिरने के लिए नकली पैर यानी प्रोस्थेटिक लेग की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा, उनके एक हाथ का भी ऑपरेशन किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह बताई जा रही है कि शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद वे मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय और अलर्ट हैं।

लोकेशन गुप्त रखने के लिए ‘चिट्ठी-पत्री’ का दौर

इजरायली खुफिया एजेंसी और अमेरिकी हमलों के डर से मोजतबा की लोकेशन को टॉप सीक्रेट रखा गया है। ताज्जुब की बात यह है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडर भी उनसे सीधे मिलने से परहेज कर रहे हैं। सुप्रीम लीडर तक संदेश पहुंचाने के लिए किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का इस्तेमाल नहीं हो रहा, बल्कि पुराने दौर की तरह हाथ से लिखे पत्रों को बंद लिफाफों में एक भरोसेमंद कूरियर चेन के जरिए उन तक पहुंचाया जा रहा है।

मौत की अफवाहों के बीच छिपे रहने की मजबूरी

याद रहे कि 28 फरवरी को हुए भीषण हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही मोजतबा सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। लंबे समय तक उनकी आवाज न सुने जाने के कारण सोशल मीडिया पर उनकी मौत तक की अफवाहें उड़ने लगी थीं। ताजा रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि वे जिंदा तो हैं, लेकिन एक ऐसी जंग लड़ रहे हैं जहां उनका सामना अपनी ही शारीरिक चुनौतियों से है।

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