यूपी में फिर लौटेगी आंधी-बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट; जानें कब तक मिलेगी गर्मी से राहत

लखनऊ, डेस्क रिपोर्ट। उत्तर प्रदेश में इस साल मई की शुरुआत उम्मीद से उलट काफी राहत भरी रही है। जहां अमूमन इस समय लू (Loo) के थपेड़े चलते थे, वहीं इस बार बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने पारे को नियंत्रण में रखा है। मौसम विभाग (IMD) ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आंधी, बारिश और वज्रपात (Lightning) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण प्रदेश का मौसम अगले कुछ दिनों तक अस्थिर बना रहेगा।


अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान: 14 मई तक छाए रहेंगे बादल

मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, 9 मई से 14 मई के बीच यूपी के विभिन्न हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।

  • तेज हवाएं: कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चल सकती है।

  • बारिश और ओलावृष्टि: 12 मई तक प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका जताई गई है।

  • तापमान में गिरावट: बारिश और पुरवा हवाओं के चलने से सुबह और रात के तापमान में कमी आएगी, जिससे लोगों को हल्की ठंडक का एहसास होगा। हालांकि, दिन में धूप निकलने पर उमस (Humidity) परेशान कर सकती है।

उमस और धूप-छांव का खेल

बीते शुक्रवार को राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों में मौसम का मिजाज पल-पल बदलता दिखा। सुबह बादल छाए रहे, लेकिन दोपहर में चटख धूप ने उमस बढ़ा दी। शाम होते-होते फिर से बादलों ने डेरा डाल लिया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में नमी का स्तर 71 प्रतिशत रहने के कारण दोपहर में चिपचिपी गर्मी महसूस की गई।

सावधान! खराब मौसम में बरतें ये एहतियात

मौसम विभाग ने वज्रपात (बिजली गिरने) की चेतावनी देते हुए लोगों से अपील की है कि:

  1. आंधी-तूफान के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे शरण न लें।

  2. बिजली के खंभों और ऊंचे टावरों से दूर रहें।

  3. किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें और मौसम को देखते हुए ही सिंचाई का निर्णय लें।


क्यों बदल रहा है बार-बार मौसम?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने और पहाड़ों पर हो रही हलचल का असर मैदानी इलाकों में दिख रहा है। इसी वजह से मई के महीने में भी भीषण गर्मी के बजाय प्री-मानसून जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।

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