अक्सर हम कहते हैं कि “पुराने गानों की बात ही कुछ और थी।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उन धुनों में ऐसा क्या जादू था जो आज के शोर-शराबे वाले गानों में नहीं मिलता? दरअसल, पुराने दौर के संगीतकार केवल धुन नहीं बुनते थे, वे मनोविज्ञान और रागों के साथ खेलते थे।
अगर कोई गाना सुनकर आपको विरह, तड़प या एक ‘मीठी उदासी’ महसूस होती है, तो मुमकिन है कि उसमें ‘राग शिवरंजनी’ का इस्तेमाल हुआ हो। आइए जानते हैं संगीत के इस जादू और उन 7 एवरग्रीन गानों के बारे में जो आज भी हमारी रूह को सुकून देते हैं।
क्या है राग शिवरंजनी का जादू?
राग शिवरंजनी को बॉलीवुड का सबसे ‘इमोशनल’ राग माना जाता है। इसमें केवल 5 सुरों (सा, रे, ग, प, ध) का प्रयोग होता है, जिसमें ‘कोमल गंधार’ (ग) का इस्तेमाल इसे एक करुण और विरह भरा अहसास देता है।
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प्रभाव: यह राग सीधा दिल पर चोट करता है और भक्ति, प्रेम या बिछड़न के भाव को गहराई से प्रकट करता है।
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समय: इसे गाने का सबसे उपयुक्त समय रात का दूसरा पहर माना जाता है, जब चारों ओर शांति होती है।
रूह को छू लेने वाले ये 7 क्लासिक गाने
1. मेरे नैना सावन भादों (फिल्म: महबूबा)
आरडी बर्मन का संगीत और किशोर कुमार की जादुई आवाज। इस गाने में छिपी तड़प राग शिवरंजनी की ही देन है। जब लता मंगेशकर इसका फीमेल वर्जन गाती हैं, तो वह और भी मार्मिक हो जाता है।
2. जाने कहां गए वो दिन (फिल्म: मेरा नाम जोकर)
राज कपूर की मायूसी और शंकर-जयकिशन का संगीत। यह गाना बीते हुए सुनहरे वक्त की याद दिलाता है और सुनने वाले को एक गहरी उदासी में ले जाता है।
3. बहारों फूल बरसाओ (फिल्म: सूरज)
मोहम्मद रफी का यह कालजयी गीत शादियों की रौनक है। शिवरंजनी पर आधारित होने के बावजूद इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता है, जो इसे बेहद मधुर बनाता है।
4. आवाज देके हमें तुम बुलाओ (फिल्म: प्रोफेसर)
मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की जुगलबंदी। इस गाने की गहराई और इसमें छिपी पुकार सीधे रूह तक पहुंचती है।
5. दिल के झरोखे में तुझको बैठाकर (फिल्म: ब्रह्मचारी)
हालांकि इस गाने की गति (टेम्पो) तेज है, लेकिन शिवरंजनी के सुरों की वजह से इसमें प्यार और बिछड़न का अद्भुत मिश्रण महसूस होता है।
6. तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अंजाना (फिल्म: एक दूजे के लिए)
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस लव सॉन्ग में भी एक छिपा हुआ दर्द पिरोया है। यह गाना आज भी प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है।
7. कहीं दीप जले कहीं दिल (फिल्म: बीस साल बाद)
हेमंत कुमार का संगीत और लता जी की रहस्यमयी आवाज। इस गाने में राग शिवरंजनी का उपयोग डर और उदासी के बीच एक बारीक लकीर खींचता है।
क्यों जरूरी है संगीत का सही चुनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि राग हमारे मूड पर सीधा असर डालते हैं। इसीलिए ब्रेकअप या दुख के समय बहुत ज्यादा उदास गाने सुनने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि राग शिवरंजनी जैसे राग आपके अवसाद को और गहरा कर सकते हैं। लेकिन अगर आप अकेलेपन में सुकून तलाश रहे हैं, तो इन गानों से बेहतर साथी कोई और नहीं हो सकता।
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