बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के हटने के बाद उम्मीद थी कि नए निजाम में अल्पसंख्यकों को राहत मिलेगी। इस साल फरवरी में जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तो उन्होंने देश और दुनिया से एक बड़ा वादा किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार देश को सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित बनाएगी, चाहे वे किसी भी पार्टी, धर्म या जातीयता के हों। लेकिन सत्ता गलियारों के इन दावों के उलट जमीनी हकीकत आज भी बेहद खौफनाक और चिंताजनक बनी हुई है। एक नई और प्रामाणिक रिपोर्ट ने बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर तारिक रहमान सरकार के दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है।
सनातनी फाउंडेशन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, चंद महीनों में हुईं 111 हिंसक वारदातें
बांग्लादेशी अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ‘सनातनी फाउंडेशन’ द्वारा जारी एक विस्तृत और चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह साफ दावा किया गया है कि पड़ोसी देश में नई सरकार के आने के बाद भी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सिलसिला बदस्तूर जारी है। रिपोर्ट में हर महीने के आंकड़े सिलसिलेवार ढंग से पेश किए गए हैं। इन आंकड़ों के विश्लेषण से यह परेशान करने वाली सच्चाई सामने आई है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ लेने के समय से लेकर 30 अप्रैल तक की बेहद छोटी अवधि में ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुल 111 गंभीर हिंसक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
हत्या, लूटपाट और गैंगरेप: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अपराध का खौफनाक पैटर्न
इस रिपोर्ट से यह बात खुलकर सामने आई है कि नई सरकार भी कट्टरपंथियों और दंगाइयों पर लगाम कसने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। हिंदुओं के खिलाफ दर्ज किए गए इन 111 मामलों में सबसे बड़ा और डरावना हिस्सा हत्याओं का रहा है, जहां इस दौरान 24 मासूम अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा, कुल मामलों में 19 फीसदी घटनाएं लूटपाट और चोरी की थीं। वहीं, भू-माफियाओं और कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं की जमीन कब्जाने के 16 मामले सामने आए हैं। इस दौरान खुलेआम फायरिंग की गई और 3 प्रमुख धार्मिक स्थलों व मंदिरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। सबसे ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि इस अवधि में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों के तहत 2 बलात्कार के मामले भी दर्ज हुए, जिनमें हाल ही में एक दिव्यांग महिला को कीर्तन कार्यक्रम से अगवा कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) करने की रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात भी शामिल है।
ग्रामीण इलाकों में हिंदुओं को डरा-धमका कर भगाने और जमीन हड़पने की सोची-समझी साजिश
रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ सुनियोजित और टारगेटेड हिंसा में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो अब एक डरावने पैटर्न का रूप ले चुकी है। हिंदू समाज के पूजा स्थलों और उनके पवित्र धार्मिक प्रतीकों को जानबूझकर लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जांच में यह भी देखा गया कि कई जगहों पर बेहद मामूली स्थानीय या व्यक्तिगत विवादों को भी बहुसंख्यक समाज द्वारा जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है ताकि हिंदुओं को निशाना बनाया जा सके। विशेषकर बांग्लादेश के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में हिंदू परिवारों को डरा-धमका कर उनकी कीमती संपत्तियों, मकानों और खेती योग्य जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों को लगातार जान से मारने की धमकियां देकर उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़कर पलायन करने पर मजबूर किया जा रहा है।
भारत सरकार ने जताई थी गहरी चिंता, बांग्लादेश ने बताया ‘छिटपुट घटना’
आपको बता दें कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन चौतरफा हमलों को लेकर भारत सरकार शुरू से ही बेहद सख्त और संवेदनशील रुख अपनाए हुए है। इससे पहले भी भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेशी प्राधिकारियों के सामने अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई थीं। भारत ने साफ शब्दों में कहा था कि वहां की मौजूदा सरकार को अपने देश के हिंदू नागरिकों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने और ऐसे बर्बर हमलों पर तुरंत कड़ा कानूनी संज्ञान लेने की जरूरत है। हालांकि, तब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इन गंभीर मामलों को महज ‘छिटपुट घटनाएं’ बताकर खारिज करने की कोशिश की थी, जिस पर भारत ने कड़ा पलटवार करते हुए दोहराया था कि मासूमों की चुन-चुनकर की जा रही हत्याओं (टारगेटेड किलिंग्स) को किसी भी सूरत में महज छिटपुट घटना का नाम देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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