Solar Eclipse 2026 : खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए साल 2026 एक रोमांचक खगोलीय घटना लेकर आ रहा है। मार्च के बाद अब अगस्त में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण न केवल दुर्लभ होगा, बल्कि आसमान में ‘रिंग ऑफ फायर’ जैसी अद्भुत आकृति भी बनाएगा। क्या आप भी इस घटना को लेकर उत्साहित हैं? आइए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी सभी अहम जानकारियां।
कब और कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण?
साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। चूंकि यह समय रात का है, इसलिए भारत में इस खगोलीय घटना को देख पाना संभव नहीं होगा।
क्या भारत में दिखेगा ग्रहण और क्या है सूतक का नियम?
वैज्ञानिक और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं में यह स्पष्ट है कि जिस भौगोलिक क्षेत्र में ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए, भारत में रहने वाले लोगों को पूजा-पाठ, खान-पान या अन्य दैनिक कार्यों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी मानने की आवश्यकता नहीं है।
क्या है ‘रिंग ऑफ फायर’ की खगोलीय घटना?
यह एक ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) है। इस स्थिति में चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच तो आता है, लेकिन वह सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप, सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकती हुई रिंग की तरह दिखाई देता है। इसी अद्भुत नजारे को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगेगा।
किन देशों में दिखेगा यह ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा। इसमें यूरोप के कई देश, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, आर्कटिक क्षेत्र और रूस का उत्तर-पूर्वी हिस्सा शामिल है। इसके अलावा, अटलांटिक महासागर के समीपवर्ती क्षेत्रों में भी लोग इस खगोलीय घटना के गवाह बन सकेंगे।
ग्रहण देखते समय बरतें ये सावधानियां
अगर आप ऐसी जगह हैं जहां यह ग्रहण दिखाई देने वाला है, तो विशेष सुरक्षा का ध्यान रखना अनिवार्य है:
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नंगी आंखों से न देखें: सूर्य को सीधे नंगी आंखों से देखना आपकी आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
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सही चश्मे का प्रयोग: ग्रहण देखने के लिए हमेशा प्रमाणित ‘सोलर फिल्टर’ वाले चश्मों का उपयोग करें।
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टेलीस्कोप सावधानी: यदि आप दूरबीन या टेलीस्कोप का उपयोग कर रहे हैं, तो उसमें भी सोलर फिल्टर लगा होना बेहद जरूरी है।
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ऑनलाइन लाइव देखें: चूंकि भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा, इसलिए आप नासा (NASA) जैसी प्रमुख स्पेस एजेंसियों की वेबसाइट या यूट्यूब चैनल पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग का आनंद ले सकते हैं।
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