हिंदू पंचांग में अधिकमास की पूर्णिमा का अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष अधिकमास की पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग दो दिनों तक बन रहा है, जो भक्तों के लिए सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्राप्ति का सुनहरा अवसर है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त उपासना करना बेहद फलदायी माना जाता है। यदि आप भी इस शुभ अवसर पर अपने घर में सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि का वास चाहते हैं, तो इन आसान विधियों और उपायों का पालन करें।
घर पर कैसे करें लक्ष्मी-नारायण की सरल पूजा
पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और नारायण की कृपा पाने के लिए आप घर पर ही श्रद्धा के साथ पूजा कर सकते हैं:
-
स्नान और शुद्धिकरण: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। यदि किसी पवित्र नदी में जाना संभव न हो, तो नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
-
अभिषेक और श्रृंगार: भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
-
अर्पण: भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, चंदन, पुष्प और पीले फल चढ़ाएं। माता लक्ष्मी को गुलाबी या लाल रंग के फूल, चंदन और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
-
पूजा विधि: मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इस दिन ‘सत्यनारायण कथा’ का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। अंत में आरती करें और माता को खीर, पंचामृत या सूखे मेवों का भोग लगाएं।
-
चंद्र देव को अर्घ्य: शाम को चंद्रोदय के बाद कच्चे दूध मिश्रित जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें। यह मानसिक शांति और सुख प्रदान करता है।
पूजा के विशेष मुहूर्त (30-31 मई 2026)
पूजा और शुभ कार्यों के लिए समय का ध्यान रखना लाभकारी होता है:
-
ब्रह्म मुहूर्त: 04:03 AM से 04:43 AM (30 मई)
-
अभिजित मुहूर्त: 11:51 AM से 12:46 PM
-
गोधूलि मुहूर्त: 07:12 PM से 07:33 PM
-
अमृत काल: 04:33 AM (31 मई) से 06:21 AM (31 मई)
-
चंद्रोदय का समय: शाम 06:40 PM (30 मई)
जीवन में सुख-समृद्धि के लिए करें ये अचूक उपाय
पूर्णिमा के दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं:
-
कनकधारा स्तोत्र: आर्थिक तंगी दूर करने और धन वृद्धि के लिए ‘कनकधारा स्तोत्र’ या ‘श्री सूक्तम’ का पाठ अवश्य करें।
-
दान का महत्व: पूर्णिमा पर सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान करना या पशु-पक्षियों को भोजन खिलाना पुण्यदायी माना जाता है।
-
संकल्प: यदि आप पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं, तो हाथ में जल, अक्षत (चावल) और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
31 मई को स्नान और दान के लिए सुबह 08:51 से 10:35 बजे तक का समय बहुत शुभ है। इस दिन भक्ति भाव के साथ की गई पूजा आपके परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया