CBSE OSM टेंडर विवाद: राहुल गांधी ने पीएम मोदी और शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना, 18.5 लाख छात्रों के भविष्य को लेकर उठाए गंभीर सवाल

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली और इसके टेंडर आवंटन प्रक्रिया को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।

राहुल गांधी के मुख्य आरोप:

  • टेंडर प्रक्रिया में धांधली: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि टेंडर में तकनीकी मानकों को बार-बार कमतर किया गया ताकि ‘COEMPT’ कंपनी पात्र हो सके। उन्होंने दावा किया कि स्कैनिंग रेजोल्यूशन घटाया गया, रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता खत्म की गई और जुर्माने के प्रावधान हटा दिए गए।

  • अयोग्य वेंडर का चयन: राहुल गांधी ने कहा कि टीसीएस (TCS) जैसी बड़ी कंपनी को दरकिनार कर ‘COEMPT’ को ठेका दिया गया, जिसका पिछला रिकॉर्ड विवादास्पद रहा है।

  • जल्दबाजी का दुष्प्रभाव: शिक्षकों की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए इस प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अब छात्र खराब स्कैनिंग, गायब पन्ने और मूल्यांकन में त्रुटियों की शिकायत कर रहे हैं।

जयराम रमेश ने जारी किया तकनीकी ब्यौरा:

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले में तकनीकी खामियों को विस्तार से रखा है:

  • मानकों में ढील: अनिवार्य ‘CMMI’ प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 किया गया।

  • गुणवत्ता से समझौता: स्कैनिंग रेजोल्यूशन को 300 DPI से कम करके 200 DPI कर दिया गया।

  • उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा: ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा पर खतरा पैदा हुआ।

विपक्ष की प्रमुख मांगें:

  • स्वतंत्र न्यायिक जांच: राहुल गांधी ने CBSE से लेकर COEMPT को दिए गए हर अनुबंध की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।

  • दस्तावेजों को सार्वजनिक करना: कांग्रेस ने मांग की है कि बोर्ड वेंडर चयन, RFP (Request for Proposal) में किए गए संशोधनों और परीक्षाओं से पहले हुई बोर्ड बैठकों के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

  • जवाबदेही: कांग्रेस नेताओं ने पूछा है कि किसके दबाव में तकनीकी मानकों को इतना कमजोर किया गया और क्या यह वेंडर के कहने पर हुआ था?

सरकार का रुख:

दूसरी ओर, शिक्षा मंत्रालय और CBSE का आधिकारिक कहना है कि पूरी प्रक्रिया में कानूनी मानकों और नियमों का पालन किया गया है।

यह विवाद अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 18.5 लाख छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच चिंता का विषय बन गया है। विपक्ष अब इसे सरकार की जवाबदेही और ‘भविष्य के साथ खिलवाड़’ का मुद्दा बनाकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

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