“घमंड और भाई-भतीजावाद ने डूबा दी लंका…” ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर क्यों इस कदर आगबबूला हैं बागी विधायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी बगावत की आग अब एक बेहद खतरनाक राजनीतिक ज्वालामुखी का रूप ले चुकी है। पार्टी के 58 बागी विधायकों ने न सिर्फ ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ तख्तापलट कर दिया है, बल्कि उन्हें ‘नई टीएमसी’ से पूरी तरह ‘गेट आउट’ यानी बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

टीएमसी के इतिहास में यह पहली बार है जब ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे ताकतवर चेहरे माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को अपनी ही पार्टी के साथियों और विधायकों की इस कदर भयंकर नफरत और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। आखिर क्यों बागी विधायक अभिषेक का नाम तक सुनने को तैयार नहीं हैं? आइए समझते हैं इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

ताकत का अंधा अहंकार और ‘आई-पैक’ (I-PAC) का टॉर्चर

विद्रोही खेमे से जुड़े नेताओं और विधायकों का गुस्सा सबसे ज्यादा अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके और उनके रवैये को लेकर है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक बागी टीएमसी विधायक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर सीधे तौर पर आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के भीतर ‘ताकत का अंधा अहंकार’ और ‘जमकर किया गया भाई-भतीजावाद’ ही आज पार्टी की इस दुर्दशा और चुनावी हार का सबसे बड़ा कारण बना है।

विधायकों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी ‘आई-पैक’ (I-PAC) के साथ मिलकर पार्टी के जमीनी, वफादार और पुराने कार्यकर्ताओं को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया था। टिकट बंटवारे से लेकर संगठन के फैसलों तक में सिर्फ अभिषेक और आई-पैक की ही मनमानी चलती थी, जिससे सालों से खून-पसीना बहाने वाले नेता खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे।

पुराने कद्दावर नेताओं की ‘बलि’: मुकुल रॉय से लेकर शुभेंदु अधिकारी तक का सच

बागी नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी का अपने भतीजे के प्रति आंख मूंदकर किया गया अंधा लगाव ही पार्टी में आंतरिक दरार की सबसे बड़ी वजह बना। टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले मुकुल रॉय का साइडलाइन होना और अभिषेक बनर्जी का तेजी से उभरना एक साथ हुआ, जिसने पुराने नेताओं के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी थी।

यही नहीं, बंगाल के वर्तमान मुख्यमंत्री और कभी ममता बनर्जी के सबसे खासमखास रहे शुभेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़ने की असली वजह भी अब सामने आ चुकी है। नेताओं ने दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी जब तृणमूल यूथ कांग्रेस के प्रमुख थे और मालदा, मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में उनका भारी दबदबा था, तब अभिषेक बनर्जी ने उनके समानांतर अपनी एक अलग ‘यूथ ब्रिगेड’ खड़ी कर दी थी। जब यह विवाद ममता बनर्जी के पास पहुंचा, तो उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को हटाकर अपने भतीजे अभिषेक को यूथ विंग का निर्विरोध बॉस बना दिया। इसी अपमान का बदला लेने के लिए शुभेंदु ने टीएमसी को अलविदा कह दिया था।

फलता में फेल हुआ ‘अभिषेक मॉडल’, बाहुबली जहांगीर खान का रहस्यमयी सरेंडर

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विधायकों का गुस्सा भड़कने की एक बड़ी वजह उनके अपने गढ़ में मिली शर्मनाक और संदिग्ध हार भी है। टीएमसी का अभेद्य किला मानी जाने वाली ‘फलता’ विधानसभा सीट इस चुनाव में भाजपा के खाते में चली गई। यह सीट सीधे तौर पर अभिषेक के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

यहां से अभिषेक बनर्जी के सबसे करीबी और टीएमसी के बाहुबली नेता जहांगीर खान चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि मतदान से ठीक एक दिन पहले जहांगीर खान ने रहस्यमयी ढंग से चुनावी मैदान से अपना नाम वापस ले लिया, जिससे भाजपा बिना लड़े ही जीत गई। टीएमसी ने इसे जहांगीर का निजी फैसला बताया, लेकिन बागी विधायक इस बात से बेहद नाराज हैं कि इतनी बड़ी गद्दारी के बाद भी अभिषेक ने अपने करीबी जहांगीर खान पर आज तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की।

‘ममता दीदी मंजूर हैं, लेकिन उनका भतीजा किसी कीमत पर नहीं’

न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, बागी खेमे के एक बड़े रणनीतिकार नेता ने साफ शब्दों में कहा, “हम ममता बनर्जी को आज भी अपनी सर्वोच्च नेता स्वीकार करते हैं, लेकिन हम अभिषेक बनर्जी को अपने नेता के रूप में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते।”

गौर करने वाली बात यह है कि विद्रोही विधायकों ने बहुत चालाकी से काम लेते हुए सीधे तौर पर ममता बनर्जी की सर्वोच्चता को कोई चुनौती नहीं दी है। विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए अपने आधिकारिक पत्र में बागियों ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में मान्यता देना जारी रखा है, लेकिन उन्होंने बहुत कड़े शब्दों में यह स्पष्ट लिख दिया है कि वे अब से विधायक दल के किसी भी कामकाज या फैसले में उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के हस्तक्षेप और तानाशाही अधिकार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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