उत्तराखंड की हसीन वादियों में नैनीताल जिले के पास स्थित ‘कैंची धाम’ (Kainchi Dham) सिर्फ एक मंदिर या आश्रम नहीं है, बल्कि यह देश-विदेश के लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है. नीम करौली बाबा (Neem Karoli Baba) के इस पावन दर पर हर साल 15 जून को स्थापना दिवस बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल भी 15 जून 2026 को होने वाले भव्य मेले और भंडारे की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो चुकी हैं. आज यानी 10 जून 2026, बुधवार से बाबा का सबसे पसंदीदा और प्रसिद्ध ‘मालपुए का प्रसाद’ बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है. कैंची धाम के इस महाप्रसाद का अपना एक बेहद खास और आध्यात्मिक महत्व है. आइए जानते हैं कि यह प्रसाद क्यों इतना विशेष है और इसे बनाने के क्या कड़े नियम हैं.
मथुरा के कारीगरों और कड़े नियमों के बीच तैयार होता है प्रसाद
कैंची धाम में मालपुए का प्रसाद बनाने की शुरुआत बेहद पावन तरीके से की जाती है. इस साल प्रसाद तैयार करने के लिए विशेष रूप से मथुरा से एक दर्जन से अधिक अनुभवी कारीगर कैंची धाम पहुंचे हैं. इनके साथ मंदिर के मुख्य सेवक और स्थानीय ग्रामीण भी इस सेवा कार्य में हाथ बंटाते हैं.
आपको जानकर हैरानी होगी कि कैंची धाम में बाबा का प्रसाद बनाने के बेहद कड़े और सख्त नियम हैं, जिनका पालन करना हर किसी के लिए अनिवार्य है:
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अनिवार्य व्रत: प्रसाद बनाने की प्रक्रिया में केवल वही श्रद्धालु या कारीगर शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत (Upwas) रखा हो.
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पारंपरिक वेशभूषा: सेवादारों के लिए धोती-कुर्ता धारण करना अनिवार्य होता है.
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हनुमान चालीसा का निरंतर पाठ: सबसे खास नियम यह है कि जब तक भट्टी पर प्रसाद बनाने का काम चलता है, तब तक वहां उपस्थित सभी लोगों को निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ करना होता है.
पूरी तरह पारंपरिक है मालपुआ बनाने की विधि
बाबा नीम करौली महाराज को मालपुए का भोग अतिप्रिय था, इसलिए इसे पूरी शुद्धता के साथ पारंपरिक तरीके से ही बनाया जाता है. इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, शुद्ध दूध, गुड़, चीनी और प्रचुर मात्रा में शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है. जब यह प्रसाद बनना शुरू होता है, तो शुद्ध घी और गुड़ की सोंधी महक पूरे मंदिर परिसर और आसपास की वादियों में फैल जाती है, जिससे वहां का पूरा वातावरण अलौकिक और पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.
वैदिक भट्टी पूजन के बाद 3 लाख भक्तों में बंटेगा आशीर्वाद
प्रसाद बनाने की शुरुआत करने से पहले उस स्थान पर विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भट्टी का पूजन किया जाता है. इसके बाद लगातार पांच दिनों तक दिन-रात महाप्रसाद तैयार किया जाएगा. 15 जून 2026 को स्थापना दिवस के मुख्य अवसर पर सबसे पहले बाबा नीम करौली महाराज को इस दिव्य मालपुए का भोग लगाया जाएगा. इसके बाद देश-विदेश से आने वाले करीब 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बीच इस महाप्रसाद को बाबा के आशीर्वाद के रूप में वितरित किया जाएगा.
क्यों पूरी दुनिया में विख्यात है कैंची धाम?
कैंची धाम को महान संत नीम करौली बाबा की तपोस्थली और एक चमत्कारिक सिद्धपीठ माना जाता है. बाबा के भक्त उन्हें साक्षात संकटमोचन हनुमान जी का अवतार मानते हैं. बाबा ने साल 1964 में इस पावन आश्रम की स्थापना की थी. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी कोई भी मुराद खाली नहीं जाती. यही वजह है कि फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग से लेकर एप्पल के स्टीव जॉब्स जैसी वैश्विक हस्तियां भी बाबा के चमत्कारों के आगे अपना सिर झुका चुकी हैं. 15 जून को होने वाले इस विशाल मेले में आस्था का सैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है.
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