उत्तर प्रदेश में एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में हाथरस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति’ को राम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर आगे बढ़ाने का आह्वान करने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) को आड़े हाथों लिया है।
AIMIM का योगी और अखिलेश पर निशाना
इस विवाद पर AIMIM के पूर्वांचल अध्यक्ष इसरार अहमद ने कहा कि भाजपा और सपा दोनों का एजेंडा एक ही है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए पूछा, “क्या अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में विकास और शिक्षा के बजाय केवल धर्म ही एकमात्र मुद्दा रह गया है?” इसरार अहमद ने इस बयानबाजी को जनता का ध्यान भटकाने वाली राजनीति करार दिया।
‘एनकाउंटर’ और ‘राजधर्म’ का मुद्दा उठाया
AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:
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एनकाउंटर पर सवाल: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सीएम योगी अक्सर राम मंदिर और कृष्ण जन्मभूमि की बात करते हैं, लेकिन वे अपने शासनकाल में हुए ’17 हजार एनकाउंटर्स’ पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
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राजधर्म की याद: शादाब चौहान ने मुख्यमंत्री को ‘राजधर्म’ की शपथ याद दिलाते हुए कहा कि वे संविधान से बंधे हैं। धार्मिक विषयों को उछालकर वे प्रदेश के मूल विषयों से जनता का ध्यान भटका रहे हैं।
क्या है योगी आदित्यनाथ का बयान?
हाथरस के कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा कि, “श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए।” इस बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
सियासी गलियारों में बहस
इस पूरे मुद्दे पर न केवल AIMIM, बल्कि अन्य विपक्षी दल भी इसे चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहे हैं। ओम प्रकाश राजभर जैसे नेताओं ने भी इस बहस के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कृष्ण जन्मभूमि का यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है और क्या यह राम मंदिर की तरह ही एक बड़ा राष्ट्रीय विमर्श बनेगा?
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