
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति का सबसे बड़ा पत्ता फेंक दिया है। प्रदेश की सभी 403 सीटों पर एक साथ बूथ सम्मेलनों का आयोजन कर भाजपा ने चुनावी बिगुल फूंक दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के तमाम दिग्गजों की मौजूदगी में पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि इस बार मुकाबला सीधे जमीनी स्तर पर होगा।
सपा-बसपा के मजबूत क्षत्रपों को साधने की रणनीति
भाजपा की इस रणनीतिक कवायद के केंद्र में विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के जमीनी क्षत्रप हैं। बूथ स्तर पर ऐसे प्रभावशाली जातिगत चेहरों की मैपिंग शुरू हो चुकी है जो अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं। पार्टी का सीधा लक्ष्य इन स्थानीय नेताओं को जोड़कर अपने सामाजिक समीकरण को अभेद्य बनाना है।
हर बूथ पर डेटा मैपिंग और सोशल इंजीनियरिंग
‘बूथ जीता-चुनाव जीता’ के मंत्र को साकार करने के लिए पार्टी ने पदाधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है। इसके तहत:
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दलगत सूची: सपा, बसपा और अन्य दलों के मजबूत जातीय चेहरों की पहचान।
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समर्पित कार्यकर्ता: पन्ना प्रमुख, आरएसएस कार्यकर्ता और पूर्व दिग्गजों का डेटाबेस।
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स्थानीय प्रभाव: ग्राम प्रधान और प्रभाव रखने वाले वरिष्ठ सामाजिक चेहरों की मैपिंग।
2027 की जंग: सीधे मतदाता के दरवाजे पर दस्तक
सीएम योगी के तूफानी दौरों और संगठन के इस डेटा-संचालित अभियान से साफ है कि भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। भाजपा अब हर वर्ग, समाज और विरोधी खेमे के भी असरदार लोगों तक सीधे पहुंचकर उत्तर प्रदेश के सियासी किले को फिर से फतह करने की कोशिश में है।
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