
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (Filmfare Awards) का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। साल 1954 में जब पहली बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की शुरुआत हुई थी, तब सिर्फ कुछ ही चुनिंदा कैटेगरी में कलाकारों को सम्मानित किया जाता था। हालांकि, जैसे-जैसे समय बदला, इस अवॉर्ड शो में कई नए बदलाव और नई कैटेगरी जोड़ी गईं।
ऐसा ही एक ऐतिहासिक बदलाव 1960 के दशक में हुआ, जब दो गानों की लोकप्रियता और सिंगर्स के बीच बढ़ते कड़े कॉम्पटीशन के कारण फिल्मफेयर को अपनी 13 साल पुरानी परंपरा बदलनी पड़ी। इसी के बाद बेस्ट सिंगर (Best Singer) की एक कॉमन कैटेगरी को बांटकर ‘बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर’ और ‘बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर’ की दो नई कैटेगरी बनाई गईं।
जब 1959 में शुरू हुआ था बेस्ट सिंगर का अवॉर्ड
फिल्मफेयर की शुरुआत के 5 साल बाद, यानी 1959 में पहली बार प्लेबैक सिंगर्स को सम्मानित करने के लिए ‘बेस्ट सिंगर’ की कैटेगरी शुरू की गई थी। हालांकि, उस समय मेल (पुरुष) और फीमेल (महिला) सिंगर्स के लिए अलग-अलग अवॉर्ड नहीं होते थे। पूरे साल में केवल एक ही सिंगर (चाहे पुरुष हो या महिला) को यह ट्रॉफी दी जाती थी।
1966 के वे 2 गाने, जिन्होंने जूरी को दुविधा में डाला
बात साल 1966 की है, जब बॉलीवुड संगीत में एक से बढ़कर एक सदाबहार नगमें रिलीज हुए थे:
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‘बहारों फूल बरसाओ’ (फिल्म: सूरज): राजेंद्र कुमार की फिल्म ‘सूरज’ का यह गाना मोहम्मद रफी साहब की जादुई आवाज में रिलीज हुआ और पूरे देश में छा गया।
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‘तितली उड़ी’ (फिल्म: सूरज): इसी फिल्म में महिला सिंगर शारदा द्वारा गाया गया यह गाना भी रातों-रात ब्लॉकबस्टर साबित हुआ।
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लता मंगेशकर के आइकॉनिक नगमे: इसी साल लता मंगेशकर ने फिल्म ‘दो बदन’ के लिए ‘लो आ गई उनकी याद’ और फिल्म ‘गाइड’ के लिए ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ जैसे कालजयी गाने गाए थे।
जब 1967 में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की जूरी बैठी, तो वे भारी धर्मसंकट में फंस गए। उनके सामने सवाल यह था कि केवल एक उपलब्ध ‘बेस्ट सिंगर’ का अवॉर्ड मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर या शारदा में से किसे दिया जाए? काफी सोच-विचार और जूरी के फैसले के बाद अंततः मोहम्मद रफी को ‘बहारों फूल बरसाओ’ के लिए उस साल का बेस्ट सिंगर चुना गया।
1968 में बदली परंपरा: लाई गई मेल और फीमेल सिंगर्स की अलग कैटेगरी
1967 की इस दुविधा और सिंगर्स के बीच बढ़ते मुकाबले को देखते हुए फिल्मफेयर आयोजकों ने अगले ही साल अपनी परंपरा बदलने का बड़ा फैसला लिया। साल 1968 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट सिंगर’ की कैटेगरी को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया—बेस्ट मेल सिंगर और बेस्ट फीमेल सिंगर।
इस नई कैटेगरी के पहले विजेता:
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बेस्ट मेल सिंगर: महेंद्र कपूर (फिल्म ‘उपकार’ के सदाबहार गाने ‘नीले गगन के तले’ के लिए)।
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बेस्ट फीमेल सिंगर: आशा भोसले (फिल्म ‘दस लाख’ के मशहूर गाने ‘गरीबों की सुनो’ के लिए)।
1968 में शुरू हुई यह व्यवस्था आज तक कायम है और हर साल फिल्मफेयर में मेल और फीमेल सिंगर्स को अलग-अलग ट्रॉफियों से सम्मानित किया जाता है।
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