राम मंदिर निर्माण लागत और वित्तीय अनियमितताएं: पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने एसआईटी को सौंपे 20 बिंदुओं के साक्ष्य, चंपत राय पर गंभीर आरोप

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने राममंदिर की निर्माण लागत 800 करोड़ से बढ़कर 2,200 करोड़ रुपये तक पहुंचने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं का मामला एसआईटी (SIT) के सामने आधिकारिक रूप से उठा दिया है। लखनऊ के कमिश्नर और एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत द्वारा लिखित साक्ष्य मांगे जाने के बाद, महिपाल सिंह ने 20 बिंदुओं की एक विस्तृत सूची और साक्ष्य एसआईटी को भेज दिए हैं। इस शिकायत में पूर्व महासचिव चंपत राय, रामशंकर यादव ‘टिन्नू यादव’, बैंक कर्मचारियों समेत कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

लागत में भारी वृद्धि और अनावश्यक निर्माण के आरोप

महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में राम मंदिर निर्माण की लागत पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • लागत में भारी उछाल: उनका कहना है कि शुरुआत में मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 800 करोड़ रुपये तय की गई थी, जो बाद में बढ़कर करीब 2,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उनका सवाल है कि जब मंदिर का स्वरूप, डिजाइन और योजना पहले से तय थी, तो लागत में इतनी बड़ी वृद्धि किन कारणों से हुई।

  • अनावश्यक निर्माण: आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान कई ऐसे स्थायी निर्माण कराए गए, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी और जिन्हें अस्थायी व्यवस्था से भी पूरा किया जा सकता था, लेकिन इन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए।

चंदा चोरी और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत

चंदा संग्रह और प्रबंधन को लेकर महिपाल सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

  • बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता: शिकायत में दावा किया गया है कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से निर्धारित 10 गड्डियों के स्थान पर परिसर से बाहर 11, 12 और 13 गड्डियां भेजी जाती थीं।

  • शिकायत पर अनसुना करना: महिपाल का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार तत्कालीन महासचिव चंपत राय को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अनिल मिश्रा ने उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाकर किसी अन्य को यह कार्यभार सौंप दिया था।

चांदी के झूले से लेकर विवादित संपत्तियों तक के आरोप

  • चांदी के झूले में अनियमितता: महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि 150 किलोग्राम चांदी का झूला बनवाने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसमें केवल 85 किलोग्राम चांदी का ही उपयोग किया गया।

  • विवादित संपत्तियां: ट्रस्ट की ओर से मंदिर के आसपास कई ऐसी विवादित संपत्तियां खरीदी गईं जिनके मामले अदालत में लंबित हैं, जिससे ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।

  • कार्यालय के खर्च: चंपत राय के निवास ‘भारत कुटी’ में बिना रसीद के चढ़ावा प्राप्त करने और कारसेवकपुरम (VHP कार्यालय) के आयोजनों का खर्च ट्रस्ट के धन से वहन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

राजनीतिक सरगर्मी और जांच का दायरा

यह पूरा विवाद सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा 7 जून को उठाए गए आरोपों के बाद सामने आया था। इसके तुरंत बाद 9 जून को महिपाल सिंह ने सोशल मीडिया पर कई खुलासे किए थे। इसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी एसआईटी को जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज सौंपे थे। अब एसआईटी इन सभी 20 बिंदुओं की गहन और निष्पक्ष जांच कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके।

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